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दिव्यांगों की सफलता ही नए भारत की शक्ति...दिव्यांग दिवस पर बोले CM योगी, कहा-सरकार साथ है, नहीं होगी राशि की कमी

विश्व दिव्यांग दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी की शारीरिक क्षमता से उसके सामर्थ्य को नहीं आंक सकते. सूरदास जी, ऋषि अष्टावक्र सहित कई ऐसे लोग हुए हैं जिन्होंने ये समय-समय पर साबित किया है. उन्होंने आगे कहा कि जब भी दिव्यांगों को थोड़ा भी संबल मिला, उन्होंने ऐसे कार्य किए जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता. सीएम योगी ने बताया कि कैसे डबल इंजन सरकार ना सिर्फ दिव्यांगों के प्रति दृष्टि बदलने का काम किया बल्कि उनके लिए कई सरोकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं.

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03 Dec 2025
( Updated: 11 Dec 2025
03:35 AM )
दिव्यांगों की सफलता ही नए भारत की शक्ति...दिव्यांग दिवस पर बोले CM योगी, कहा-सरकार साथ है, नहीं होगी राशि की कमी

अतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारी ऋषि परंपरा ने शारीरिक बनावट को कभी सामर्थ्य को आंकने का माध्यम नहीं बनाया. हमारा मानना है कि 'हर व्यक्ति ईश्वरीय कृति है और मनुष्य उस ईश्वरीय कृति की सर्वश्रेष्ठ कृति है. आपको बताएं कि विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारत की ऋषि परंपरा ने हमेशा हमें यह प्रेरणा दी है कि व्यक्ति की शारीरिक बनावट उसकी क्षमता का निर्धारण नहीं करती. भारतीय दर्शन का मानना है 'यद् भावं तद् भवति', अर्थात वास्तविक शक्ति मन, संकल्प और आत्मबल में है. दुनिया ने इस संकल्प शक्ति, आत्मबल और दिव्यांगजन की क्षमता को वास्तविक और व्यावहारिक जीवन में बार-बार प्रमाणित होते देखा है.

'ऋषि अष्टावक्र-सूरदास जी दिव्यांगों की सबसे बड़ी प्रेरणा'

उन्होंने आगे कहा कि हमारे यहां अष्टावक्र गीता का महान उदाहरण है. ऋषि अष्टावक्र ने स्वयं अनेक शारीरिक चुनौतियों के बावजूद अद्भुत ज्ञान प्रदान किया. मध्यकाल में संत सूरदास इसके दूसरा उदाहरण हैं. दुनिया के इतिहास में अनेकों बार यह सिद्ध हुआ है कि जब भी दिव्यांगजनों को थोड़ा संबल मिलता है, तो वे अपनी शक्ति और सामर्थ्य से वह सब कर दिखाते हैं जिसकी कल्पना सामान्य व्यक्ति भी नहीं कर सकता.

सीएम योगी ने आगे सरकारी योजनाओं पर जोर देते हुए कहा कि इस अवसर पर दिव्यांगजन के कल्याण के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं आपके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती हैं. अक्सर परिवार यह मान लेता है कि यदि किसी कारण से उनके यहां कोई बच्चा दिव्यांग पैदा हो गया हो, तो वह जीवनभर बोझ रहेगा. समाज भी उसे उपेक्षित कर देता है. परिणाम यह होता है कि बचपन में ध्यान न मिलने से और समाज व परिवार का संबल न होने से वह बच्चा भीतर ही भीतर कुंठाओं से भर जाता है.

'हमारे तो सचिव, मंडलायुक्त दिव्यांग लेकिन हैं बड़े होनहार'

CM योगी ने कहा कि यदि दिव्यांगों को थोड़ा-सा भी संबल दे दिया जाए, तो वह असाधारण परिणाम दे सकता है. उत्तर प्रदेश सरकार में ही आप अनेक उदाहरण देख सकते हैं—हमारे खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव स्वयं ओलंपिक और पैरा ओलंपिक में मेडल जीत चुके हैं. चित्रकूट के मंडलायुक्त दृष्टिबाधित थे, लेकिन आज वे अत्यंत कुशलता से अपना कार्य कर रहे हैं.

'हमारी इच्छा-शक्ति ही वास्तविक सामर्थ्य'

CM ने आगे कहा कि इनसान का, हमारा संकल्प, हमारी इच्छा-शक्ति ही हमारा वास्तविक सामर्थ्य है. भारत की संस्कृति और ऋषि परंपरा ने कभी भी शारीरिक बनावट को व्यक्ति की सामर्थ्य का पैमाना नहीं माना. हर व्यक्ति ईश्वर की श्रेष्ठ कृति है. यदि हम हर मनुष्य में ईश्वर का वास मानकर उसकी ओर संवेदना और सहानुभूति रखें, उसे थोड़ा सा संबल दे दें, तो समाज के सहयोग से हम एक बड़ी संख्या में उपेक्षित लोगों को मुख्यधारा से जोड़ सकते हैं. वे अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य से समाज और राष्ट्र को लाभान्वित कर सकते हैं जैसा कि अतीत में बार-बार हुआ है.

पीएम मोदी ने बदली दिव्यांगों के प्रति दृष्टि!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने दिव्यांगजन के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदलने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की. पहले ‘विकलांग’ जैसे शब्दों से एक नकारात्मक सोच पनपती थी. माननीय प्रधानमंत्री जी ने कहा कि ईश्वर यदि किसी में कोई अभाव देता है, तो वह उसे किसी अन्य रूप में उससे अधिक क्षमता भी देता है—हमारा कर्तव्य है कि हम उसे थोड़ा-सा संबल दें.

दिव्यांगों के लिए योगी सरकार की योजनाएं!

2017 के पहले उत्तर प्रदेश में केवल 8 लाख दिव्यांगजन को मात्र 300 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती थी. उसमें भी कई जगह कटौती होती थी. आज राज्य सरकार 11 लाख से अधिक दिव्यांगजन को यह सुविधा दे रही है. राशि 300 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दी गई है, और सीधा खाते में भेजी जा रही है. दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरणों का वितरण तेज हुआ है. 2014 के बाद डीईडीआरसी (DEDRC) को कानपुर और अन्य स्थानों पर सक्रिय कर उपकरण वितरण की प्रक्रिया मजबूत की गई. राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि हर मंडल मुख्यालय पर एक सशक्त डीईडीआरसी स्थापित किया जाएगा.

'दिव्यांगों के जीवन को सरकार बना रही बैरियर-फ्री'

दिव्यांगजनों के लिए सरकारी भवन, परिवहन और सार्वजनिक स्थलों को बैरियर-फ्री बनाया जा रहा है. ब्रेल लिपि, साइन लैंग्वेज, कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता पर विशेष बल दिया जा रहा है. राज्य अधीन सेवाओं में 4% और शिक्षण संस्थानों में 5% आरक्षण लागू किया गया है.

विशेष दिव्यांग पहचान पत्र (यूडीआइडी) के पंजीकरण को तेजी से बढ़ाया जा रहा है. कॉकलीयर इंप्लांट की सहायता से अब बच्चे सामान्य रूप से बोल-सुन सकें, इसके लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है. अकेले इस वर्ष 108 बच्चों को कॉकलीयर इंप्लांट के लिए आर्थिक सहायता दी गई है.

'पूरे प्रदेश नें चल रही दिव्यांगों के लिए योजनाओं'

मानसिक दिव्यांगजनों के लिए बरेली, मेरठ, गोरखपुर और लखनऊ में आश्रयगृह संचालित हैं. 16 जनपदों में 24 स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा भी आश्रयगृह चलाए जा रहे हैं. विवाह प्रोत्साहन एवं स्वरोजगार हेतु हजारों दिव्यांगजनों को सहायता दी जा चुकी है. 3 से 7 वर्ष के बच्चों के लिए 18 मंडलीय जनपदों में बचपन डे-केयर सेंटर चलाए जा रहे हैं और इन्हें और बढ़ाने की आवश्यकता है.

राज्य में शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों, बधिर बच्चों, मानसिक चुनौती वाले बच्चों और दृष्टिबाधित बच्चों के लिए कुल 21 विशेष विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 1488 बच्चे पूरी सुविधा के साथ रहकर अध्ययन कर रहे हैं.

उत्तर प्रदेश देश का एकमात्र राज्य है जहाँ दिव्यांगजनों की उच्च शिक्षा के लिए दो विश्वविद्यालय पूरी तरह राज्य सरकार द्वारा संचालित हैं—

1. डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (लखनऊ)
2. जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय (चित्रकूट)

दिव्यांगजन, अनुसूचित जाति/जनजाति और पिछड़ा वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए भी अभूतपूर्व कार्य हुए हैं. छात्रवृत्ति का दायरा और राशि कई गुना बढ़ाई गई है. कंप्यूटर प्रशिक्षण, विवाह अनुदान, स्वरोजगार सबमें व्यापक विस्तार किया गया है.

'सरकार और समाज दोनों दिव्यांगो के साथ मजबूती से खड़ी है'

अंत में देश और समाज से बड़ी अपील करते हुए सीएम योगी ने कहा कि आज विश्व दिव्यांग दिवस पर मैं आप सभी से कहना चाहता हूं कि हर छोटा प्रयास एक बड़ा बदलाव ला सकता है. हम सभी संवेदनशील बनें, सहायक बनें, और दिव्यांगजन के लिए बैरियर-फ्री इंडिया के निर्माण में अपनी ईमानदार भूमिका निभाएं. दिव्यांगजन भी किसी से कम नहीं हैं. आपकी हिम्मत, आपकी प्रतिभा और आपकी सफलता ही नए भारत की शक्ति है. सरकार और समाज दोनों आपके साथ खड़े हैं.

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