केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का बयान, 2014 के बाद रेलवे की सुरक्षा में हुआ बड़ा काम

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे को लेकर कई अहम जानकारी साझा की। उन्होंने कहा साल 2014 में जब देश में पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकारी बनी, तो सबसे पहले ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन टेक्नोलॉजी पर काम किया गया। साल 2016 में इसका पहला वर्जन बना और 2019, 2021, 2022 और 2024 में हम इसके 4.0 वर्जन पर काम कर रहे हैं।

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25 Sep 2024
( Updated: 06 Dec 2025
08:07 PM )
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का बयान, 2014 के बाद रेलवे की सुरक्षा में हुआ बड़ा काम
रेलवे को लेकर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कई अहम जानकारी साझा की। उन्होंने रेलवे में ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई देशों ने 1980 और 90 के दशक में ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन टेक्नोलॉजी को लाया था, मगर हमारे यहां तत्कालीन सरकारों ने इसे लेकर कोई कदम नहीं उठाए। उनका रेलवे पर कोई फोकस नहीं था, वह सिर्फ राजनीत‍ि करते थे। 

रेल मंत्री ने कहा, “साल 2014 में जब देश में पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकारी बनी, तो सबसे पहले ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन टेक्नोलॉजी पर काम किया गया। साल 2016 में इसका पहला वर्जन बना और 2019, 2021, 2022 और 2024 में हम इसके 4.0 वर्जन पर काम कर रहे हैं। ये वर्जन 16 जुलाई 2024 को अप्रूव हुआ था। इसके इंस्टॉलेशन पर देशभर में काम चल रहा है। कोटा से सवाई माधोपुर क्षेत्र के बीच 4.0 वर्जन पर का इंस्पेक्शन किया गया है, जो एक अच्छी सुविधा है।"

उन्होंने कहा, “कवच कई किलोमीटर पहले ही ड्राइवर को सिग्नल दे देता है। मान लें कि 6 किलोमीटर दूर रेड लाइट आने वाली है, तो ड्राइवर को पहले ही रेड लाइट दिखाई दे जाएगी और वह इसी हिसाब से अपनी स्पीड को कम कर सकता है। ड्राइवर अगर अपनी स्पीड कम नहीं करता है, तो कवच खुद ब्रेक लगा सकता है। कवच से ड्राइवर की लाइफ में बहुत बड़ा चेंज आता है, रेलवे की सेफ्टी भी बहुत जरूरी होती है।"

रेलमंत्री वैष्णव ने लगातार हो रहे रेल हादसों पर देशवासियों से अपील करते हुए कहा, “मैं सभी लोगों से निवेदन करूंगा कि कोई भी रेलवे के साथ छेड़खानी न करे। अगर कोई यह हरकत करता है तो उसको कड़ी सजा दी जाएगी।"

उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा, “वह सिर्फ राजनीति करती हैं, रेलवे की सेफ्टी के बारे में कोई उनका विचार नहीं था। उन्होंने अपने समय में ऑटोमेटिक एक एंटी कोलेजन डिवाइस लगाया था, जो डेढ़ हजार किलोमीटर लगाने के बाद हटाना पड़ा। इसमें सेफ्टी का कोई सर्टिफिकेशन नहीं था और ना ही इसकी सही तरीके से टेस्टिंग की गई। उन्होंने सिर्फ मशहूर होने के लिए ऐसा किया था, जबकि पीएम मोदी के समय में रेलवे में परिवर्तन लाया जा रहा है।"

इस बीच, लोको पायलट ने आईएएनएस से बातचीत में ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन टेक्नोलॉजी सिस्टम के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “कवच आने के बाद से रेलवे में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है। हमने सुना था कि एक ऐसी टेक्नोलॉजी आने वाली है, जो उम्मीद से कई गुना बेहतर होगी। आज इसका लाइव डेमो किया और ड्राइविंग के दौरान हमने इसकी गतिविधियों को भी नोट किया। हम इसके बारे में पहले कभी सोच भी नहीं सकते थे, टेस्टिंग के दौरान सभी टेस्ट 100 फीसद सफल हुए हैं, हमारे लिए कवच एक शानदार तोहफा है।"

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