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PM मोदी आवास पर 90 मिनट चली सीक्रेट मीटिंग, CCTV भी बंद, तो क्या अब कुछ बड़ा होने वाला है?

देश में आतंकवादी हमले के बाद पीएम मोदी के आवास पर हुई 90 मिनट की सीक्रेट मीटिंग ने सभी का ध्यान खींचा। सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और NSA अजीत डोभाल की मौजूदगी वाली इस बैठक में “फुल ऑपरेशनल फ्रीडम” दिए जाने का निर्णय लिया गया, जिसका मतलब है कि अब सेना को जवाबी कार्रवाई के लिए पूरी आज़ादी मिल चुकी है।

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01 May 2025
( Updated: 11 Dec 2025
03:37 AM )
PM मोदी आवास पर 90 मिनट चली सीक्रेट मीटिंग, CCTV भी बंद, तो क्या अब कुछ बड़ा होने वाला है?
देश की राजधानी दिल्ली में मंगलवार की सुबह से ही प्रधानमंत्री आवास पर अचानक गतिविधियों के बढ़ने से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है. जिसके बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी पहुंचे. उनके साथ इस अहम बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल भी शामिल हुए.

90 मिनट की गुप्त मीटिंग, CCTV भी ऑफ।

पीएम मोदी के साथ यह हाई लेवल मीटिंग लगभग 90 मिनट तक चली. बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान प्रधानमंत्री आवास के अंदरूनी हिस्से की सीसीटीवी फीड को भी ब्लॉक कर दिया गया था. इस मीटिंग में विदेश मंत्री एस जयशंकर और NSA डोभाल की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि ये केवल सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण बैठक थी.

जनरल द्विवेदी से PM की वन-टू-वन बातचीत।

जनरल द्विवेदी ने इस दौरान पीएम मोदी को जम्मू-कश्मीर में मौजूद सुरक्षा स्थिति की जानकारी दी और साथ ही सेना की तैयारियों का विस्तृत ब्यौरा भी साझा किया. बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सेना को "फुल ऑपरेशनल फ्रीडम" देने की पुष्टि की. आपको बता दें कि यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने एक काफिले पर हमला कर देश को झकझोर दिया. हमले के बाद भारत सरकार एक के बाद एक हाई लेवल मीटिंग कर रही है. इन बैठकों का केंद्रबिंदु पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और उस पर कड़ा जवाब देने की तैयारी है.

क्या है फुल ऑपरेशनल फ्रीडम का मतलब?

इस टर्म का सीधा मतलब है कि अब भारतीय सेना को जवाबी कार्रवाई के लिए समय, स्थान और तरीका चुनने की पूरी स्वतंत्रता मिल चुकी है. सेना को अब सरकार से हर कदम पर अनुमति लेने की जरूरत नहीं है. इसे सरकार का "ब्लाइंड ट्रस्ट" माना जा रहा है एक भरोसा जो केवल बेहद गंभीर परिस्थितियों में दिया जाता है.

गौरतलब है कि मंगलवार को भी प्रधानमंत्री मोदी ने एक अहम सुरक्षा समीक्षा बैठक की थी. उस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी और सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी मौजूद थे। लगातार दो दिनों में दो बड़ी बैठकों से साफ है कि केंद्र सरकार किसी बड़े ऑपरेशन की तैयारी में है.

NSA डोभाल की रणनीति पर सबकी नजर।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की उपस्थिति खुद में एक संदेश देती है. डोभाल, जिन्हें भारत का ‘जेम्स बॉन्ड’ भी कहा जाता है, पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक जैसी कार्रवाइयों की रूपरेखा तय कर चुके हैं. उनकी मौजूदगी इस बात का संकेत है कि सरकार इस बार कोई बड़ा एक्शन प्लान कर सकती है.

इसके अलावा पिछले कुछ हफ्तों में पाकिस्तान की गतिविधियों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है. हाल ही में पाकिस्तान में तुर्की और चीन से हथियारों की खेप पहुंचने की खबरें सामने आई हैं. इसके अलावा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सक्रिय आतंकी संगठनों की गतिविधियों में इज़ाफा हुआ है. भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में है.

फिलहाल यह साफ नहीं है कि भारत कब और कैसे जवाब देगा. लेकिन जिस तरह से सेना को ‘फुल ऑपरेशनल फ्रीडम’ दी गई है और लगातार उच्च स्तरीय बैठकें हो रही हैं, उससे साफ है कि सरकार इस बार सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहेगी. सुरक्षा विशेषज्ञों की मानें तो पहलगाम हमले का बदला जल्द और तीखे अंदाज़ में लिया जाएगा.

प्रधानमंत्री मोदी की यह हाई लेवल मीटिंग केवल एक समीक्षा बैठक नहीं थी, यह एक संदेश था. एक स्पष्ट चेतावनी न केवल आतंकियों को, बल्कि उन्हें पालने-पोसने वालों को भी. देश की जनता अब सिर्फ निंदा नहीं चाहती, वह ठोस कार्रवाई देखना चाहती है. और सरकार की हालिया गतिविधियाँ बता रही हैं कि वह इस बार "करारा जवाब" देने को तैयार है.
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