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'राजनाथ जी ने दोगलेपन को नकारा...', एस जयशंकर ने SCO जॉइंट स्टेटमेंट मामले पर कहा- एक देश चाहता था बयान में आतंकवाद न आए

विदेश मंत्री एस जयशंकर आज भारतीय जनता पार्टी के यूथ विंग भारतीय जनता युवा मोर्चा के तरफ से आयोजित 'मॉक पार्लियामेंट' कार्यक्रम में बतौर अतिथि पहुंचे. जहां उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा SCO समिट में हस्ताक्षर न करने के फैसले को सही ठहराया. इस दौरान उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और आपातकाल पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए जमकर घेरा.

'राजनाथ जी ने दोगलेपन को नकारा...', एस जयशंकर ने SCO जॉइंट स्टेटमेंट मामले पर कहा- एक देश चाहता था बयान में आतंकवाद न आए

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने SCO यानी शंघाई सहयोग संगठन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा दस्तावेज पर हस्ताक्षर न करने के फैसले को सही ठहराया है. उन्होंने यह बात आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की तरफ से आयोजित 'मॉक पार्लियामेंट' के कार्यकम में बोला है. इस दौरान एस जयशंकर ने बिना नाम लिए पाकिस्तान को भी जमकर लताड़ लगाई है. मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि इस संगठन का गठन आतंकवाद से लड़ने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन अब वह खुद ही इस पर चुप्पी साधे बैठे हुए हैं. विदेश मंत्री ने इसके अलावा आपातकाल और ऑपरेशन सिंदूर पर भी बात की.  

'दस्तावेज पर हस्ताक्षर न करने का फैसला सही'

भारतीय जनता पार्टी के यूथ विंग (भाजयुमो) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान SCO समिट पर कहा, 'SCO का गठन आतंकवाद से लड़ने के उद्देश्य से किया गया था. जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रक्षा मंत्रियों की बैठक में गए और दस्तावेज पर चर्चा हुई, तो एक देश ने कहा कि वह इसमें आतंकवाद का उल्लेख नहीं चाहते. राजनाथ सिंह का सही मत था कि बिना आतंकवाद के उल्लेख के, वह भी तब जब संगठन का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद से लड़ना है. वह इसे ही स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे. यह संगठन सर्वसम्मति से चलता है, इसलिए राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कहा कि अगर बयान में आतंकवाद का उल्लेख नहीं होगा, तो हम उस पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे. उनका यह फैसला बिल्कुल सही है.' 

'हम सभी को इमरजेंसी पर जरूर विचार करना चाहिए'

आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर आयोजित 'मॉक पार्लियामेंट' के कार्यक्रम में अपने विचार साझा करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि 'जब इमरजेंसी की घोषणा हुई थी, तो उस समय मेरी उम्र सिर्फ 20 साल के आसपास थी. इसलिए मैं अपने युवा पीढ़ी को बताना चाहूंगा कि आपातकाल के क्या कुछ नुकसान थे ? उस दौरान किस तरीके से मीडिया पर हमला किया गया था. लोकतंत्र और संविधान की हत्या की गई. इसके माध्यम से हमारे देश के अंतरराष्ट्रीय छवि को भी बिगाड़ने की पूरी कोशिश की गई. मेरा युवाओं को आपातकालीन को लेकर यही कहना है कि इस दौरान एक परिवार को राष्ट्रहित के आगे रखा गया, लेकिन आज राष्ट्रहित को पहली प्राथमिकता दी जाती है.'

एस जयशंकर ने संविधान को लेकर कांग्रेस पर साधा निशाना

एस जयशंकर ने संविधान पर निशाना साधते हुए कांग्रेस को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि 'संविधान को हाथ में रखकर घूमने से कुछ नहीं होता. संविधान आपके मन में होना चाहिए, लेकिन कांग्रेस के डीएनए में आज भी इमरजेंसी है, वह संविधान की बात करने से अच्छे नहीं लगते हैं.'

'ऑपरेशन सिंदूर पर सभी दलों की एकजुटता पर मुझे खुशी मिली'

विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के खिलाफ भारत द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' पर खुशी जताई. इस दौरान उन्होंने कहा कि 'मुझे बहुत ज्यादा गर्व महसूस होता है कि जब मैं शशि थरूर, सुप्रिया सुले, कनिमोझी, संजय झा, जय पांडा, रविशंकर प्रसाद और श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व में संसदीय प्रतिनिधिमंडलों को देखता हूं. मैं सभी दलों को एकजुट होकर विश्व पटल पर भारत की बात कहते और राष्ट्रीय हित में बोलते हुए देखता हूं. हमें आतंकवाद कतई स्वीकार्य नहीं है और जब सब एक सुर में कहते हैं कि हमें आतंक के खिलाफ अपनी रक्षा का अधिकार है, तो यह मेरे लिए गर्व का क्षण होता है. जिस भी देश में यह प्रतिनिधिमंडल गया. वहां सबसे प्रभावशाली बात यह देखने को मिली कि एकजुट होकर देश के सभी लोग प्रतिनिधित्व कर रहे थे. यह हमारे देश के लिए एक महान क्षण था' 

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