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मंदिर के लिए PETA ने बनाया नकली हाथी, तो बकरीद पर मचा बवाल

Kerala के Thrissur में PETA ने एक मंदिर को रोबोटिक हाथी दान किया तो बवाल मच गया. लोगों ने सवाल उठाए कि क्या अब मंदिर में पूजा एक खिलौने से होगी. इस दौरान बकरीद का जिक्र कर नई बहस भी छिड़ गई.

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07 Feb 2025
( Updated: 09 Dec 2025
06:43 AM )
मंदिर के लिए PETA ने बनाया नकली हाथी, तो बकरीद पर मचा बवाल
भारतीय संस्कृति तीज त्यौहार की दुनिया भी फैन है. देशभर में करोड़ों मंदिर। उनमें होने वाली पूजा के अलग अलग तरीके।आस्था का अद्भुत और विहंगम रूप भारत को सबसे अलग और खास बनाता है।भारत में कई ऐसे मंदिर भी हैं जहां जानवरों की पूजा भी की जाती है। केरल में तो पूजा के दौरान हाथी का भी इस्तेमाल किया जाता है।हाथी की बकायदा पूजा की जाती है। इसी कड़ी में केरल के त्रिशूर में एक मंदिर को पूजा के लिए हाथी भेंट किया गया। लेकिन ये हाथी आम हाथी जैसा बिल्कुल नहीं है।जो दिखता तो बिल्कुल हाथी जैसा ही है हाथी जैसी सूंड, वैसे ही पैर, वैसी ही पूंछ। सब कुछ। लेकिन इसकी सच्चाई कुछ और है।चलिए जानते हैं।

ये ढोल नगाड़े, मंत्रोच्चार। एक हाथी के आने की खुशी में है।सज धजकर तैयार इस हाथी राजा को देखकर हर कोई काफी उत्साहित है। लेकिन ये व्हील पर क्यों खड़ा है ? दरअसल, ये ऑरिजिनल नहीं बल्कि रोबोटिक हाथी है। सितारवादाक अनुष्का शंकर और पशु अधिकार समूह यानि PETA की ओर से ये हाथी मंदिर को दान किया गया है। ताकि मंदिर में पूजा के लिए असली हाथी का इस्तेमाल ना कर इस रोबोटिक हाथी की पूजा की जाए। इसी के साथ मंदिर समिति और स्थानीय लोगों ने ये शपथ भी ली है कि, मंदिर में असली हाथियों का इस्तेमाल नहीं होगा।


क्या है रोबोटित हाथी की खासियत ? 

तीन मीटर ऊंचा है ये हाथी । 800 किलो है वजन । पहिए पर चलता है ये हाथी। आम हाथी जैसे सारे काम कर सकता है ये हाथी।
 
मंदिर के पुजारी रवि नंबूथिरी ने मंदिर में इस रोबोटिक हाथी का स्वागत किया। उन्होंने इस मशीनी हाथी को कोम्बारा कन्नन नाम दिया है। कोम्बारा कन्नन के आने से उन्होंने बेहद खुशी जताई। रवि नंबूथिरी ने कहा, हमें पूरा विश्वास है कि त्योहारों के दौरान असली हाथियों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। हमें एक यांत्रिक हाथी देने के लिए पेटा का धन्यवाद।

रोबोटिक हाथी को लेकर PETA का कहना है कि मंदिर में असली हाथियों की जगह इस मशीनी हाथी का इस्तेमाल होना चाहिए। उन्हें कैद, जंजीरों और दुर्व्यवहार से बचाया जा सकता है।रस्मों और जुलूस में भी इस हाथी का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि पेटा के इस मशीनी हाथी पर लोगों ने सख्त ऐतराज जताया। लोगों सवाल उठाए कि पेटा हिंदुओं के त्यौहारों में ही जानवरों के इस्तेमाल पर सवाल क्यों उठाता है। कभी इस संस्था ने बकरीद के लिए भी कोई रोबोटिक हाथी तैयार किया है? इस रोबोटिक हाथी ने सोशल मीडिया पर नई बहस को जन्म दे दिया।

किसी ने लिखा, मंदिरों में PETA की ऐसी घुसपैठ बंद होनी चाहिए। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है कि अब वे हमारी सदियों पुरानी परंपराओं में हस्तक्षेप कर रहे हैं। PETA भारत की संस्था भी नहीं है। इसे रोकना चाहिए. हिेंदुओं को यह समझने की जरूरत है कि ये गलत है।

PETA इस मशीनी हाथी से हिंदुओं के धर्म को खत्म करना चाह रहा है क्या अब खिलौने से मंदिर में पूजा होगी ? 

किसी ने PETA को टैग करते हुए लिखा, क्या बकरीद पर मुस्लिमों को रोबोटिक बकरा गिफ्ट करेंगे। 

किसी ने तो PETA पर एक्शन की ही मांग कर डाली। तो किसी ने कहा, PETA को इंडिया में बैन करो।

किसी ने तो सोशल मीडिया पर रोबोटिक बकरे की फोटो शेयर कर PETA को इशारा किया। कि बकरीद में भी रोबोटिक बकरे के इस्तेमाल पर जोर दिया जाए।

इससे पहले दिवाली पर पटाखा जलाने को लेकर भी PETA ने चिंता जताई थी। PETA का मानना है कि दिवाली में पटाखों के शोर से जानवरों को परेशानी होती है।बहरहाल PETA के ऐसे दावों से लोगों ने ऐतराज जताया और उसके कदम को एक तरफा और सनातन विरोधी करार दे दिया।

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