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अडानी विवाद पर गरमा गई संसद, बीजेपी-कांग्रेस के बीच बढ़ा टकराव

संसद में अडानी विवाद को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच टकराव तेज हो गया है। बीजेपी ने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें 'देशद्रोही' करार दिया और कहा कि वह भारत की एकता और संप्रभुता को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। संबित पात्रा ने दावा किया कि राहुल गांधी का जॉर्ज सोरोस के साथ संबंध है, जो भारत विरोधी प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं।

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05 Dec 2024
( Updated: 05 Dec 2024
04:39 PM )
अडानी विवाद पर गरमा गई संसद, बीजेपी-कांग्रेस के बीच बढ़ा टकराव
भारतीय राजनीति का मंच इन दिनों गरमा गया है। केंद्र और विपक्ष के बीच बढ़ती खींचतान ने संसद को संघर्ष का अखाड़ा बना दिया है। कांग्रेस पार्टी लगातार अडानी मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। इस विवाद का केंद्र बिंदु हैं राहुल गांधी, जिन पर बीजेपी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी को 'देशद्रोही' करार देते हुए कहा कि यह केवल राजनीति का नहीं, बल्कि देश की एकता और संप्रभुता का मुद्दा है।

संबित पात्रा ने अपने बयान में कहा कि राहुल गांधी और कुछ ताकतें भारत को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत के उद्योगपतियों और शेयर बाजार को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। पात्रा ने जॉर्ज सोरोस और उनकी ओपेन सोसाइटी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संगठन भारत के खिलाफ षड्यंत्र रच रहा है और राहुल गांधी का इससे सीधा संबंध है। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी देश की संसद के सदस्य हैं, लेकिन उनके विचार और कार्य भारत विरोधी हैं। फ्रेंच मीडिया द्वारा किए गए खुलासे यह साबित करते हैं कि राहुल गांधी और जॉर्ज सोरोस के बीच गहरे संबंध हैं। यह केवल राजनीति नहीं, बल्कि भारत की एकता और संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा है।"

कांग्रेस का पलटवार

बीजेपी के आरोपों पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा, "सरकार अडानी मुद्दे पर चर्चा से भाग रही है। हम केवल एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार न केवल इसपर चुप्पी साधे हुए है, बल्कि अडानी का नाम सुनने के लिए भी तैयार नहीं है।" उन्होंने कहा कि विपक्ष देश के सबसे बड़े भ्रष्टाचार को उजागर करना चाहता है, लेकिन सरकार इसपर चर्चा को टालने की हरसंभव कोशिश कर रही है।

संसद में अडानी समूह पर लगे आरोपों ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह से गरमा दिया है। विपक्ष का आरोप है कि अडानी समूह को केंद्र सरकार का संरक्षण प्राप्त है, और इसके कारण देश के संसाधनों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया, जहां कांग्रेस सांसदों ने 'मोदी-अडानी एक हैं' लिखी जैकेट पहनकर विरोध जताया। कांग्रेस का कहना है कि यह भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा मामला है और सरकार इसे छिपाने की कोशिश कर रही है।
राजनीति या साजिश?
राहुल गांधी पर लगने वाले 'देशद्रोह' के आरोप ने राजनीति को एक नई दिशा दी है। जॉर्ज सोरोस के नाम को जोड़कर बीजेपी ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की कोशिश की है। हालांकि, कांग्रेस ने इसे साजिश करार देते हुए स्पष्ट किया कि यह सरकार की विफलताओं से ध्यान भटकाने का प्रयास है। राजनीति का यह खेल कहां तक जाएगा, यह देखना बाकी है। लेकिन यह साफ है कि अडानी विवाद केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि अब यह देश की राजनीति में ध्रुवीकरण का बड़ा कारण बन गया है।

संसद में हो रही यह खींचतान केवल राजनीतिक दलों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक और लोकतांत्रिक स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या राहुल गांधी पर लगाए गए आरोप सच हैं? क्या अडानी समूह पर लगे आरोपों की जांच होगी? और सबसे अहम, क्या यह विवाद देश की जनता के लिए कोई ठोस समाधान लेकर आएगा? यह सब समय के गर्भ में छिपा है।

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