Congress के एक कदम ने सपा की नाक में किया दम, Yogi से लड़ने चले Akhilesh अब क्या करेंगे ?

लोकसभा चुनाव में तो अखिलेश और राहुल की जोड़ी यूपी की सियासी जमीन पर मोदी को पटखनी दे दी लेकिन बात जब दस सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव में योगी से टक्कर लेने की आई तो उप चुनाव से पहले ही इंडिया गठबंधन में लगता है फूट पड़ गई, जिससे कहीं ना कहीं योगी को फायदा हो सकता है, क्या है पूरा मामला देखिये खास रिपोर्ट

Congress के एक कदम ने सपा की नाक में किया दम, Yogi से लड़ने चले Akhilesh अब क्या करेंगे ?

उत्तर प्रदेश की सियासी जमीन पर एक बार फिर ऐलान ए जंग शुरु हो गया है। इस बार ना लोकसभा चुनाव की लड़ाई है और ना ही विधानसभा चुनाव की लड़ाई है। इस बार दस सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव की लड़ाई है, जिसे जीतना खुद योगी के लिए जहां नाक का सवाल बन गया है, तो वहीं दूसरी तरफ सपा और कांग्रेस को भी ये साबित करना है कि लोकसभा चुनाव में मिली जीत कोई तुक्का नहीं थी, वो इंडिया गठबंधन की जीत थी।

लोकसभा चुनाव में तो अखिलेश और राहुल की जोड़ी यूपी की सियासी जमीन पर मोदी को पटखनी दे दी, लेकिन बात जब दस सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव में योगी से टक्कर लेने की आई तो उप चुनाव से पहले ही इंडिया गठबंधन में लगता है फूट पड़ गई। इसीलिए लोकसभा चुनाव में साथ लड़ने वाली सपा और कांग्रेस में उपचुनाव से पहले ही अलग होती नजर आ रही हैं। तभी तो यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने सभी दस सीटों के लिए प्रभारी और पर्यवेक्षक उतार कर सियासी माहौल गरमा दिया है। पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ चुके अजय राय ने खुद पड़ोसी जिले मिर्जापुर की मंझवा विधानसभा सीट की कमान संभाली है।

10 सीटों पर कांग्रेस ने की नियुक्ति:

  • अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर पूर्व राज्यसभा सांसद पीएल पुनिया को प्रभारी बनाया गया है और अखिलेश प्रसाद सिंह को पर्यवेक्षक बनाया गया है।
  • मिर्जापुर की मझवां सीट पर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय खुद प्रभारी होंगे, बासगांव से उम्मीदवार रहे सदल प्रसाद यहां पर पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएंगे।
  • अंबेडकरनगर की कटेहरी सीट पर सत्य नारायण पटेल को प्रभारी नियुक्त किया गया है, केशव चंद्र यादव यहां के पर्यवेक्षक होंगे।
  • कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर मुरादाबाद की कुंदरकी सीट के प्रभारी नियुक्त किए गए हैं, सीतापुर के सांसद राकेश राठौड़ यहां के पर्यवेक्षक होंगे।
  • कानपुर की सीसामऊ सीट के प्रभारी का जिम्मा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव निलांशु चतुर्वेदी को दिया गया है, अमेठी से सांसद किशोरी लाल शर्मा पर्यवेक्षक होंगे।
  • अखिलेश यादव की सीट करहल पर तौकीर आलम को प्रभारी नियुक्त किया गया है और रामनाथ सिकरवार यहां के पर्यवेक्षक होंगे।
  • प्रयागराज की फूलपुर सीट का जिम्मा राजेश तिवारी को मिला है और प्रयागराज के सांसद उज्जवल रमण सिंह को यहां से पर्यवेक्षक बनाया गया है।
  • मुजफ्फरपुर की मीरापुर सीट पर विधायक वीरेंद्र चौधरी को प्रभारी नियुक्त किया गया है, सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद यहां पर्यवेक्षक की भूमिका में रहेंगे।
  • गाजियाबाद सदर सीट पर विधानसभा में नेता अराधना मिश्रा मोना को प्रभारी नियुक्त किया गया है, बाराबंकी से सांसद तनुज पूनिया यहां के पर्यवेक्षक होंगे।
  • अलीगढ़ की खैर सीट से नसीमुद्दीन सिद्दकी प्रभारी बनाए गए हैं और राज कुमार रावत को यहां पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है।

दस सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने प्रभारी और पर्यवेक्षक तैनात कर एक बात तो साफ कर दिया कि इस बार कांग्रेस सपा साथ-साथ चुनाव नहीं लड़ेगी। यानि इस बार के उपचुनाव में कांग्रेस, सपा और बसपा के बीच त्रिकोणीय लड़ाई देखने को मिलेगी। जिसका मतलब साफ है कि वोटों का ध्रुवीकरण भी होगा। और अगर एकमुश्त हिंदू वोट बीजेपी को मिली तो फिर बीजेपी को दसों सीटें जीतने में ज्यादा मुश्किल नहीं होगी। क्योंकि इससे पहले आपने देखा होगा, साल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में जब सपा, कांग्रेस, बसपा और बीजेपी अलग-अलग चुनाव लड़ी थीं, तो इसका सबसे ज्यादा फायदा बीजेपी को मिला था। और प्रचंड बहुमत के साथ योगी सत्ता में लौटे थे। तो क्या इस बार भी कांग्रेस और सपा के अलग-अलग चुनाव लड़ने से बीजेपी को फायदा होगा?

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें