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अब केदारनाथ की हेलीकॉप्टर यात्रा होगी स्मार्ट और सेफ... इसरो के 'डिजिटल कवच' से मिलेगी पल-पल की जानकारी, जानें क्या है अपडेट?

केदारनाथ की यात्रा करने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सुविधा को अब और भी ज्यादा सुरक्षित बनाया जा रहा है. इसके लिए यहां के हेलीकॉप्टर सेवाओं को इसरो की हाई-टेक तकनीक का सहारा मिलेगा. इसमें लाइव लोकेशन ट्रैकिंग से लेकर मौसम और इलाके की रियल-टाइम तक की जानकारी मिल सकेगी.

अब केदारनाथ की हेलीकॉप्टर यात्रा होगी स्मार्ट और सेफ... इसरो के 'डिजिटल कवच' से मिलेगी पल-पल की जानकारी, जानें क्या है अपडेट?

केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रियों के लिए चल रही हेलीकॉप्टर सेवाओं को अब और भी ज्यादा सुरक्षित बनाने की तैयारी है. अब इन सेवाओं को हाई-टेक तकनीक का सहारा मिलने जा रहा है, ताकि बिगड़ते मौसम में किसी भी तरह की तकनीकी खराबी या लोकेशन की ट्रैकिंग की जा सके. इससे रियल टाइम की जानकारी और पल-पल की अपडेट मिल सकेगी. इस बात की जानकारी नागरिक उड्डयन सचिव सचिन कुर्वे ने दी है. 

केदारनाथ में हेली सेवाओं को मिलेगा हाई-टेक तकनीक का सहारा 

बता दें कि केदारनाथ यात्रा करने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सुविधा को अब और भी ज्यादा सुरक्षित बनाया जा रहा है. इसके लिए यहां की हेलीकॉप्टर सेवाओं को  इसरो की हाई-टेक तकनीक का सहारा मिलेगा. इसमें लाइव लोकेशन ट्रैकिंग से लेकर मौसम और इलाके की रियल-टाइम तक की जानकारी मिल सकेगी. इस तकनीक से पायलट और कंट्रोल रूम सेकंड टू सेकेंड अपडेट रहेंगे. इसरो के इस 'डिजिटल कवच' से यात्रियों की सुरक्षा और पायलट की उड़ान दोनों पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और सुरक्षित हो जाएंगी. 

इसरो की टीम करेगी उत्तराखंड का दौरा

केदारनाथ में हेली सेवाओं को सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन-इसरो ने 'डिजिटल कवच' के लिए हामी भर दी है. इसको लेकर नागरिक उड्डयन सचिव सचिन कुर्वे ने बताया कि इसरो के विशेषज्ञों की टीम जल्द उत्तराखंड आएगी. यह टीम उत्तराखंड में अपने उपकरणों का परीक्षण करेगी. हालांकि, उनका यह दौरा अगस्त में ही प्रस्तावित था, लेकिन धराली और उसके बाद आई अन्य आपदाओं की वजह से इस परीक्षण को टाल दिया गया था, लेकिन अब इसकी तारीख तय हो गई है. 

15 जून को हुए हेलीकॉप्टर हादसे के बाद लिया गया फैसला

बता दें कि इसी साल 15 जून को केदारनाथ के हुए हेलीकॉप्टर हादसे के बाद सरकार ने हेली सेवाओं के लिए बेहतर सिस्टम तैयार करने के लिए इसरो की मदद लेने का निर्णय लिया था. इसको लेकर राज्य सरकार ने केदारघाटी के लिए ऐसा माड्यूल तैयार करने का अनुरोध किया, जिससे हेलीकॉप्टर की लाइव लोकेशन ट्रेकिंग होती रहे. यह डिवाइस डिजीटल ऐलीवेशन मॉडल (डीईएम) विकसित करेगा, जो जीपीएस सिस्टम से जुड़ा होगा. 

क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी? 

 इस तकनीक से कंट्रोल रूप में न केवल हेलीकॉप्टर की लाइव लोकेशन की पल पल की खबर मिलती रहेगी, बल्कि हेलीकॉप्टर में बैठे पायलट को भी अपने आसपास के क्षेत्र, मौसम की जानकारी मिलती रहेगी. इससे पायलट के लिए भी हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उड़ाना आसान होगा और सभी यात्री भी खुद को महफूज समझेंगे. 

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