पहलगाम आतंकी हमले की जांच करेगी NIA, आतंक का पर्दाफाश करने निकली राष्ट्रीय जांच एजेंसी

पहलगाम में हमले के तुरंत बाद ही एनआईए की फॉरेंसिक और इन्वेस्टिगेटिंग टीम मौके पर पहुंच गई थी. सबूत इकट्ठा करने का काम बिना समय गंवाए शुरू हो गया था. लेकिन अब जबकि जांच पूरी तरह एनआईए के हवाले कर दी गई है, इस केस की दिशा और गहराई दोनों बदलने वाली हैं. एनआईए न सिर्फ आतंकियों की पहचान करने में लगी है, बल्कि यह भी पता लगाने में जुटी है कि आखिर इस हमले की साजिश कहां और कैसे रची गई थी.

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27 Apr 2025
( Updated: 09 Dec 2025
08:47 PM )
पहलगाम आतंकी हमले की जांच करेगी NIA, आतंक का पर्दाफाश करने निकली राष्ट्रीय जांच एजेंसी
22 अप्रैल 2025 की वह भयावह शाम, जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अचानक गोलियों की आवाज से सन्नाटा टूट गया. एक के बाद एक गोलियों की बौछार ने सबको हिला कर रख दिया. इस आतंकी हमले ने 26 निर्दोष जिंदगियों को छीन लिया और पूरे देश को गहरे शोक और आक्रोश में डुबो दिया. अब इस वीभत्स हमले की जांच की जिम्मेदारी भारत सरकार ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है. गृह मंत्रालय के निर्देश पर एनआईए ने केस दर्ज कर लिया है और अब हर छोटे से छोटे सुराग की तलाश में पूरे जोर-शोर से जुट गई है.

पहलगाम हमले की जांच करेगा NIA 

पहलगाम में हमले के तुरंत बाद ही एनआईए की फॉरेंसिक और इन्वेस्टिगेटिंग टीम मौके पर पहुंच गई थी. सबूत इकट्ठा करने का काम बिना समय गंवाए शुरू हो गया था. लेकिन अब जबकि जांच पूरी तरह एनआईए के हवाले कर दी गई है, इस केस की दिशा और गहराई दोनों बदलने वाली हैं. एनआईए न सिर्फ आतंकियों की पहचान करने में लगी है, बल्कि यह भी पता लगाने में जुटी है कि आखिर इस हमले की साजिश कहां और कैसे रची गई थी.

एनआईए के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियां भी इस जांच में सहयोग कर रही हैं. वहीं सुरक्षाबलों ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए आतंकियों की तलाश के लिए पीर पंजाल रेंज के घने जंगलों में व्यापक अभियान छेड़ दिया है. ड्रोन और यूएवी जैसे उपकरण आसमान से निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ा जा सके. आतंकवादियों की खोज में सेना और अर्धसैनिक बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है. एक-एक पत्थर के नीचे नजर डाली जा रही है.

एनआईए की टीमें अब तक हमले के प्रत्यक्षदर्शियों से भी लगातार संपर्क कर रही हैं. जो पर्यटक उस दिन बचे, जो स्थानीय लोग मौके पर मौजूद थे, उनसे पूछताछ की जा रही है. उनके बयानों के जरिए हमले की मिनट दर मिनट की तस्वीर खींचने की कोशिश हो रही है. यही चश्मदीद गवाह वो कड़ी बन सकते हैं, जिनके जरिए असली गुनहगारों तक पहुंचा जा सकता है. सूत्रों के अनुसार, एनआईए की टीमों ने अब तक कई अहम सुराग जुटाए हैं जो हमलावरों के ठिकानों और उनकी मददगार नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं.

प्रारंभिक जांच में क्या आया सामने?

पहलगाम हमले की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस आतंकी घटना को पांच से सात आतंकवादियों ने मिलकर अंजाम दिया. इनमें से दो स्थानीय आतंकी थे, जिन्हें पाकिस्तान से प्रशिक्षण मिला था. यह जानकारी एक बार फिर इस सच्चाई को उजागर करती है कि पाकिस्तान किस तरह सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है. अधिकारियों के अनुसार, उपलब्ध सबूतों के आधार पर दो मुख्य नाम उभर कर सामने आए हैं. पहला है बिजबेहरा निवासी आदिल ठोकर उर्फ आदिल गुरी और दूसरा त्राल निवासी आसिफ शेख.

आदिल ठोकर की कहानी खुद में एक गहरी साजिश को बयां करती है. 2018 में वह पाकिस्तान चला गया था, जहां उसने लश्कर-ए-तैयबा जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठन से सशस्त्र प्रशिक्षण लिया. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वह भारत लौटा और अपने पुराने जीवन की आड़ में आतंक की साजिशें बुनता रहा. आदिल ने अपने साथियों के साथ मिलकर इस हमले को अंजाम देने की योजना बनाई और उसे क्रूरता से लागू भी किया.

जांच एजेंसियों का मानना है कि हमले में शामिल आतंकियों को स्थानीय स्तर पर भी मदद मिली थी. इलाके की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर आतंकियों ने हमला किया और बाद में जंगलों में छिप गए. इस बात की पुष्टि हाल की कुछ मुठभेड़ों से भी होती है. पिछले कुछ दिनों में दक्षिण और उत्तरी कश्मीर में सुरक्षा बलों के साथ कई मुठभेड़ें हुईं, जिनमें कुछ आतंकियों को मार गिराया गया. सबसे बड़ी सफलता तब मिली जब बांदीपुरा जिले में लश्कर के टॉप कमांडर अल्ताफ लाली को सुरक्षा बलों ने ढेर कर दिया. माना जा रहा है कि अल्ताफ लाली का भी इस हमले में परोक्ष या अपरोक्ष तौर पर हाथ था.

फिलहाल, एनआईए सबूतों की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी है. फॉरेंसिक विशेषज्ञ हमले के स्थान से बरामद बुलेट शेल्स, विस्फोटकों के अवशेष और अन्य तकनीकी सबूतों का विश्लेषण कर रहे हैं. मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान को मिलाकर एक मजबूत केस तैयार किया जा रहा है ताकि दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके.
पहलगाम हमले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आतंकवाद अब भी हमारे सामने एक बड़ी चुनौती है. लेकिन इस बार फर्क यह है कि देश की जांच एजेंसियां, सुरक्षाबल और सरकार एकजुट होकर आतंकवाद की इस जड़ को उखाड़ फेंकने का संकल्प लेकर काम कर रहे हैं. पूरे देश की नजरें अब एनआईए पर हैं. हर कोई जानना चाहता है कि आखिर इस हमले की साजिशकार कौन थे, उनकी मदद किसने की, और क्या इस पूरी साजिश के पीछे कोई बड़ा मास्टरमाइंड भी छुपा है. आने वाले दिनों में जैसे-जैसे एनआईए की जांच आगे बढ़ेगी, कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है.
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