मुस्लिम संगठन ने RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को बताया महान राष्ट्रभक्त, की भारत रत्न देने की मांग

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' दिए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है. इस बार बीजेपी या कोई संघ का स्वयंसेवक नहीं बल्कि एक मुस्लिम संगठन जमीअत हिमायतुल इस्लाम ने इस संबंध में पीएम मोदी के नाम चिट्ठी लिखकर ये मांग की है. अपनी चिट्ठी में इसके पीछे उन्होंने जो दलील दी है वो काफी मजेदार है.

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05 Oct 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:49 AM )
मुस्लिम संगठन ने RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को बताया महान राष्ट्रभक्त, की भारत रत्न देने की मांग
Image: RSS Founder Dr. Keshav Baliram Hedgewar

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है. उसकी स्थापना के 100 साल हो चुके हैं. RSS 2025 को अपने शताब्दी वर्ष के तौर पर मना रहा है. उसके स्वयंसेवक शाखा से निकलकर देश के सर्वोच्च पदों पर पहुंच चुके हैं. आज भारत का प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, कई राज्यों के सीएम सीधे उसी की शाखा, वर्ग और दीक्षा लेकर सत्ता के शिखर पर पहुंचे हैं. ऐसे में इस सबसे बड़ी सांस्कृतिक और समाजसेवी संस्था के संस्थापक के लिए अगर देश के सर्वोच्च सम्मान की मांग की जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. 

मुस्लिम संगठन ने की RSS के संस्थापक को भारत रत्न देने की मांग

आपको बता दें कि RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' दिए जाने की मांग होने लगी है. बीजेपी, विद्यार्थी परिषद, कार्यकर्ता और स्वयंसेवकों की तरफ से तो ये मांग उठ ही रही थी, लेकिन अब एक मुस्लिम संगठन की ओर से यही कुछ मांग की गई है, जिसकी खूब चर्चा हो रही है. इसी कड़ी में जमीअत हिमायतुल इस्लाम ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना करने वाले डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को 'भारत रत्न' प्रदान करने की मांग की है.

जमीअत हिमायतुल इस्लाम ने लिखी पीएम मोदी को चिट्ठी

जमीअत के राष्ट्रीय अध्यक्ष क़ारी अबरार जमाल ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक चिंट्ठी लिखी है. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को एक औपचारिक पत्र लिखकर यह मांग की है. 4 अक्टूबर 2025 को लिखे अपने इस पत्र में जमाल ने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है.

कारी ने डॉ. हेडगेवार के बारे कहा कि उन्होंने अपने विचारों और कार्यों से समाज में एकता, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रबल किया. पत्र में कारी ने आगे कहा कि आज लाखों कार्यकर्ता डॉ. हेडगेवार के दिखाए मार्ग पर चलकर समाज और राष्ट्र की सेवा में जुटे हैं.

डॉ हेडगेवार महान राष्ट्रभक्त: क़ारी अबरार जमाल

क़ारी अबरार जमाल ने अपनी मांग के पीछे दलील देते हुए कहा कि ऐसे महान राष्ट्रभक्त और समाजसेवी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना न केवल उनके योगदान का गौरव बढ़ाएगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देगा. इतना ही नहीं उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया है कि भारत सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार करे और डॉ. हेडगेवार को भारत रत्न देने का निर्णय ले. उन्होंने प्रधानमंत्री से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद जताई है.

उन्होंने लिखा: जमीअत हिमायतुल इस्लाम, डॉ हेडगेवार जी को भारत रत्न देने की मांग करती है. ऐसे महान राष्ट्रभक्त एवं समाजसेवी को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया जाना न केवल उनके योगदान का गौरव बढ़ाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देगा. अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि भारत सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर डॉ. हेडगेवार जी को भारत रत्न देने की कृपा करे. आपके सकारात्मक निर्णय की प्रतीक्षा रहेगी.

100 साल पहले हुई थी संघ की स्थापना

आपको बता दें कि महाराष्ट्र के एक डॉक्टर, डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 27 सितंबर 1925 को दशहरा के दिन नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना की थी. इसलिए आप देखते होंगे कि हर साल विजयादशमी के दिन को संघ बड़े जोर-शोर से मनाता है. डॉ. हेडगेवार ने संघ की शुरुआत एक शाखा से की थी, जो बीते 100 वर्षों की अपनी यात्रा में एक विशाल संगठन के रूप में बदल चुका है. यहां आपको ये भी बता दें कि वैसे तो हेडगेवार ने 1925 में आरएसएस की स्थापना की थी, लेकिन सरसंघचालक के रूप में उनके नाम की घोषणा चार साल बाद 10 नवंबर, 1929 को हुई थी.

नागपुर में रखी गई थी संघ की नींव

डॉ. हेडगेवार ने 17 अन्य लोगों के साथ मिलकर आरएसएस की स्थापना की. उन्होंने इसकी शुरुआत नागपुर के महाल में न्यू शुक्रवारी इलाके में स्थित अपने निवास 'हेडगेवार वाड़ा' से की थी. कहा जाता है कि संगठन का औपचारिक नाम इसकी स्थापना के कुछ महीने बाद 26 सदस्यों की मौजूदगी में हुई एक बैठक में तय किया गया.

कांग्रेस का हिस्सा भी रहे थे डॉ. हेडगेवार

डॉ. हेडगेवार की जर्नी आजादी की लड़ाई या स्वतंत्रता संग्राम के जमाने की कांग्रेस से शुरू हुई थी. वो कांग्रेस अनुशिलन समिति के अध्यक्ष तक रहे थे. उन्होंने 1920 में नागपुर में आयोजित कांग्रेस के सम्मेलन में भाग लिया था.

संघ के तीन सरसंघचालक

इतना ही नहीं ‘जंगल सत्याग्रह’ में भाग लेने के कारण डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को 1930 में जेल में डाला गया था. डॉ. हेडगेवार का निधन 21 जून 1940 को हुआ था. उन्होंने अपनी मृत्यु से पहले माधवराव सदाशिव गोलवलकर (34) ‘गुरुजी’ को दूसरे सरसंघचालक के रूप में नियुक्त कर दिया था. जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अगते दो दशक में संध की वैचिरिक दिशा, दशा, नीति, नियति और नेतृत्व तय किया.

लेखक सुधीर पाठक के अनुसार माधवराव सदाशिव गोलवलकर का निधन 1973 में हुआ. उन्होंने भी अपनी मृत्यु से पहले अपने उत्तराधिकारी के रूप में बालासाहेब देवरस का नाम घोषित कर दिया था. तो इस लिहाज से संघ में निर्विरोध सरसंघचालक चुने जाने की परंपरा रही है जो मोहन भागवत के चुने जाने तक अनवरत रूप से जारी है.

अब देखने वाली बात है कि बीजेपी इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और मोदी सरकार इस पर क्या फैसला लेती है. ज्ञात हो कि उसके ही दो स्वयंसेवक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व डिप्टी पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न दिया जा चुका है. 

अगर मोदी सरकार आने वाले दिनों में ऐसा ही कोई फैसला कर भी लेती है तो आश्चर्य नहीं होगा. इतना ही नहीं बीते दिनों हमने ये भी देख लिया कि आजाद भारत के इतिहास में पहली बार सिक्के पर भारत माता की तस्वीर दिखाई दी, जिसे देश के प्रधानमंत्री ने संघ के ही एक कार्यक्रम में जारी किया था.

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