कर्ज लेकर बनवाया घर स्कूल को दिया, खुद झोपड़ी में रहने लगे, झालावाड़ हादसे के बाद कैसे गांव के हीरो बने मोर सिंह

सियासी शोर के बीच इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया कि अब बच्चे कहां पढ़ेंगे. तभी गांव के ही साधारण से किसान ने कुछ ऐसा कर दिया जो बड़े बड़े सियासतदान नहीं कर पाए. आदिवासी किसान मोर सिंह ने बच्चों की पढ़ाई के लिए अपना घर दे दिया और खुद अपने परिवार के साथ खेत की मेड़ पर झोपड़ी बनाकर रहने लगे.

Author
06 Sep 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:34 AM )
कर्ज लेकर बनवाया घर स्कूल को दिया, खुद झोपड़ी में रहने लगे, झालावाड़ हादसे के बाद कैसे गांव के हीरो बने मोर सिंह

25 जुलाई 2025 का दिन. राजस्थान का झालावाड़ जिला, पिपलोदी गांव की एक सरकारी स्कूल जो अचानक भरभराकर गिर गई. हादसा उस वक़्त हुआ जब स्कूल में बच्चे पढ़ाई कर रहे थे. इस हादसे में 7 बच्चों की मौत हो गई थी जबकि 21 बच्चे घायल हुए. हादसे के बाद सियासत जारी रही. मौजूदा भजनलाल सरकार ने इमारत की इस हालत के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया. सियासी शोर के बीच इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया कि अब बच्चे कहां पढ़ेंगे. तभी गांव के ही साधारण से किसान ने कुछ ऐसा कर दिया जो बड़े बड़े सियासतदान नहीं कर पाए. आदिवासी किसान मोर सिंह ने बच्चों की पढ़ाई के लिए अपना घर दे दिया और खुद अपने परिवार के साथ खेत की मेड़ पर झोपड़ी बनाकर रहने लगे. 

पिपलोदी गांव के किसान मोर सिंह के दो कमरों का मकान अब बच्चों का स्कूल है. मोर सिंह स्कूल को अपना भवन सौंपकर तिरपाल की झोपड़ी बनाकर खेत में रहने लगे. मोर सिंह के परिवार में 8 लोग है इसके बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई के लिए ख़ुशी-खुशी घर त्याग दिया. 

सबसे बड़ा सवाल था- कहां पढ़ेंगे बच्चे? 

स्कूल ढहने की घटना से पूरा गांव सदमें में था बच्चों को खोने के गम से कई परिवार आज तक नहीं उबर पाए. इस बीच बड़ा सवाल ये उठने लगा कि बच्चे अब कहां पढ़ेंगे? पढ़ाई फिर से शुरू हो सके इसके लिए नया भवन चाहिए था लेकिन गांव में कोई भी अपना घर देने को तैयार नहीं था ऐसे में आदिवासी किसान इस पहल के लिए आगे आए और बिना ज़्यादा सोचे मकान स्कूल को सौंप दिया. 

स्कूल को मकान देने के बाद मोर सिंह ने क्या कहा? 

स्कूल को मकान देने के बाद मोर सिंह ने कहा कि, उस वक्त मुझे लगा कि भगवान का आशीर्वाद मिला है. अगर मेरे घर में बच्चे पढ़ लेंगे तो इससे बड़ी सेवा और क्या होगी. बारिश हो या गर्मी, मैं अपने परिवार के साथ खेत में रह लूंगा, लेकिन बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए.

खेत पर बनाई झोपड़ी, रिश्तेदार के पास रखा सामान 

मोर सिंह के परिवार में 8 लोग हैं. स्कूल को अपने दो कमरों का मकान सौंपकर मोर सिंह अब खेत में झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं. तिरपाल और प्लास्टिक से बनी इस झोपड़ी में कुछ बर्तन, चूल्हा, जरूरी सामान और दो चारपाई हैं. मोर सिंह ने बताया कि, घर का कुछ सामान रिश्तेदार के पास रखा है. 

फैसले में परिवार ने दिया पूरा साथ 

पक्का घर छोड़कर झोपड़ी में रहने वाले मोर सिंह के लिए झोपड़ी में रहना आसान नहीं है. बारिश में परेशानी और बढ़ जाती है. छत टपकने का डर साथ-साथ कीड़े और सांप का खौफ सताता है, लेकिन परिवार मोर सिंह के फ़ैसले में उनके साथ मज़बूती के साथ खड़ा है. सभी को उनके फैसले पर गर्व है. 

कर्ज लेकर बनवाया था मकान

मोर सिंह ने साल 2011 में घर बनवाया था. मोर सिंह ने मज़दूरी करके थोड़े-थोड़े पैसे जमा किया था. घर के लिए कुछ क़र्ज़ भी लेना पड़ा था. कुल मिलाकर 4 लाख में दो कमरों वाला घर तैयार हुआ. 

दरअसल, प्रशासन ने स्कूल के लिए मोर सिंह का घर अस्थायी तौर पर लिया है. स्कूल के नए भवन का निर्माण होने तक बच्चे यही पढ़ाई करेंगे. मोर सिंह के घर की मरम्मत करवाकर उसे स्कूल की शक्ल दी गई है. गुलाबी दीवारों वाले दो कमरे बच्चों का क्लासरूम बन गए. मोर सिंह का कहना है कि मुश्किल होती है लेकिन गांव के बच्चों की पढ़ाई फिर से शुरू हो गई ये देख वह भी खुश हैं. मोर सिंह ने भवन के बदले प्रशासन से कोई किराया नहीं लिया. हालांकि भवन की मरम्मत के लिए प्रशासन ने दो लाख रुपए लगाए थे. 

मोर सिंह के कायल हुए झालावाड़ के कलेक्टर 

मोर सिंह की पहल को प्रशासन ने भी सराहा है. झालावाड़ के DM अजय सिंह राठौड़ मोर सिंह के क़ायल हो गए. उन्होंने कहा, अगर मोर सिंह ने मदद नहीं की होती तो बच्चों को 2-3 किलोमीटर दूर के सरकारी स्कूल में भेजना पड़ता. राज्य सरकार ने नए स्कूल भवन के लिए 10 बीघा जमीन आवंटित की है और 1.8 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दे दी है. 

(Photo- हादसे के बाद की तस्वीर, मलबे में तब्दील स्कूल) 

ग़ौरतलब है कि 25 जुलाई को भारी बारिश के कारण पिपलोदी में प्राथमिक विद्यालय की इमारत गिर गई थी. इमारत पहले से काफ़ी जर्जर हालत में थी. इस घटना ने पूरे राजस्थान को झकझोर दिया था मामले में जमकर सियासत भी हुई. 

स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि, बच्चे स्कूल ढहने के बाद डर गए थे. मोर सिंह ने घर दे दिया तो पढ़ाई फिर शुरू हो सकी. पहले 72 बच्चे थे, 7 बच्चों की मौत के बाद 65 बच्चे बचे थे. अब स्कूल फिर से शुरू हुआ तो तीन नए दाख़िले भी हुए हैं.

गांव के हीरो बने मोर सिंह 

जब स्कूल को भवन देने से सबने मना कर दिया था ऐसे समय में मोर सिंह ने अपना मकान दिया तो वह मिसाल बन गए. पिपलोदी के लोगों के लिए मोर सिंह किसी हीरो से कम नहीं है. मोर सिंह पढ़े लिखे नहीं है लेकिन शिक्षा की क़ीमत उन्हें अच्छे से मालूम है. 

भले ही मोर सिंह दो कमरों के घर में रहते हों लेकिन उनकी उदारता ने उनका कद महलों में रहने वालों से भी ऊंचा कर दिया. अपना घर स्कूल को सौंपकर मोर सिंह ने इंसानियत की नई मिसाल क़ायम कर दी. एक साधारण से आदिवासी किसान ने वो कर दिखाया जो बड़े-बड़े संसाधनों वाले लोग भी नहीं कर पाए. 

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें