Advertisement

रेल नेटवर्क से जुड़ी मिजोरम की राजधानी आइजोल, PM मोदी जल्द करेंगे बइरबी-सैरांग लाइन का उद्घाटन, जानें प्रोजेक्ट की खास बातें

देश की आज़ादी के करीब 78 साल बाद मिजोरम पहली बार राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से पूरी तरह जुड़ गया है. बैराबी से सैरांग तक 51.38 किमी लंबी ब्रॉड गेज लाइन के निर्माण ने राज्य को सीधी रेल सेवा से जोड़ दिया है. जो भारी वर्षा और सीमित कार्य अवधि जैसी चुनौतियों के बावजूद भारतीय रेलवे ने इस परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है.

रेल नेटवर्क से जुड़ी मिजोरम की राजधानी आइजोल, PM मोदी जल्द करेंगे बइरबी-सैरांग लाइन का उद्घाटन, जानें प्रोजेक्ट की खास बातें

देश की आजादी के करीब 78 साल बाद मिजोरम आखिरकार राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से पूरी तरह जुड़ गया है. यह सिर्फ एक नई रेल लाइन का निर्माण नहीं है, बल्कि उन कठिनाइयों पर जीत है, जो दशकों से इस राज्य के लोगों और विकास के रास्ते में बाधा बनकर खड़ी थीं. बैराबी से सैरांग तक 51.38 किलोमीटर लंबी नई ब्रॉड गेज रेल लाइन का सपना अब साकार हो चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही इस ऐतिहासिक परियोजना का उद्घाटन करेंगे, जिससे मिजोरम की राजधानी आइज़ोल को पहली बार देश के बाकी हिस्सों से सीधी रेल सेवा मिल सकेगी.

भौगोलिक चुनौतियों पर जीत
मिजोरम का भूगोल बेहद जटिल है. लहराते पहाड़, गहरी घाटियां और भारी वर्षा जैसे प्राकृतिक अवरोधों के कारण यहां रेलवे लाइन बिछाना किसी चुनौती से कम नहीं था. परियोजना के मुख्य अभियंता विनोद कुमार ने बताया कि इस क्षेत्र में काम का मौसम साल भर में महज चार महीने ही होता है. लेकिन इन तमाम मुश्किलों को पार करते हुए भारतीय रेलवे ने जिस तरह से इस सपने को साकार किया, वह इंजीनियरिंग कौशल और संकल्पशक्ति का प्रतीक है.

बैराबी से आइज़ोल तक अब रेल का रास्ता
इससे पहले मिजोरम में रेलवे सेवा केवल बैराबी तक ही सीमित थी. आइज़ोल तक की यात्रा केवल सड़क मार्ग से ही संभव थी, जो कि अक्सर भूस्खलन और खराब मौसम के कारण बाधित हो जाती थी. लेकिन अब सिलचर और गुवाहाटी जैसे शहरों से आइज़ोल तक रेल सेवा संभव हो जाएगी, जिससे न केवल यात्रा समय घटेगा, बल्कि लॉजिस्टिक लागत भी कम होगी. इस लाइन पर चार नए स्टेशन विकसित किए गए हैं. होर्टोकी, कावनपुई, मुअलखांग और सायरांग. इससे न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि पर्यटन और व्यापार को भी नया आयाम मिलेगा.

सांस्कृतिक और पर्यटक दृष्टिकोण से मिजोरम का महत्व 
मिजोरम को "पहाड़ियों के लोगों की भूमि" कहा जाता है. यह राज्य अपनी जैव विविधता, लहराते जंगलों और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है. यहां अनेक जातीय समुदाय रहते हैं, जो इसकी सांस्कृतिक विविधता को और भी समृद्ध बनाते हैं. मिज़ोरम की प्राकृतिक सुंदरता, जीवंत संस्कृति और अतुलनीय मेहमाननवाज़ी इसे एक आदर्श पर्यटन स्थल बनाते हैं. रेल सेवा की उपलब्धता इस राज्य को बाहरी दुनिया से बेहतर ढंग से जोड़ देगी और पर्यटकों के लिए यहाँ आना और भी आसान हो जाएगा.

रेलवे मानचित्र में मिजोरम की एंट्री
29 नवंबर 2014 को प्रधानमंत्री मोदी ने बैराबी-सायरांग रेल लाइन की आधारशिला वर्चुअली रखी थी. इसके बाद 21 मार्च 2016 को पहली ब्रॉड गेज मालगाड़ी बैराबी पहुँची, जिसमें 42 वैगनों में चावल लदा हुआ था. 27 मई 2016 को पीएम मोदी ने बैराबी और सिलचर के बीच पहली यात्री ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. ये सभी घटनाएं मिजोरम को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में अहम मील के पत्थर साबित हुईं.

परियोजना का तकनीकी खाका

  • इस परियोजना की कुल लंबाई 51.38 किलोमीटर है और इसकी लागत लगभग ₹5021.45 करोड़ है. इसे चार चरणों में पूरा किया गया.
  • बैराबी - होर्टोकी (16.72 किमी) — चालू: जुलाई 2024
  • होर्टोकी - कावनपुई (9.71 किमी) — चालू: जून 2025
  • कावनपुई - मुअलखांग (12.11 किमी) — चालू: जून 2025
  • मुअलखांग - सायरांग (12.84 किमी) — चालू: जून 2025

यह रेल मार्ग तकनीकी दृष्टि से भी अद्वितीय है. इसमें 48 सुरंगें, 55 बड़े पुल, 87 छोटे पुल, 5 रोड ओवरब्रिज और 6 अंडरब्रिज बनाए गए हैं. इस रूट पर बना 104 मीटर ऊँचा पुल देश में अब तक का सबसे ऊँचा रेलवे ब्रिज है, जो क़ुतुब मीनार से भी 42 मीटर ऊँचा है.

CRS निरीक्षण और आखिरी हरी झंडी
रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS), उत्तर पूर्व सीमांत मंडल ने 6 से 10 जून 2025 के बीच होर्टोकी से सायरांग तक के अंतिम खंड का गहन निरीक्षण किया. इसके साथ ही पूरी रेल लाइन को संचालन के लिए हरी झंडी मिल गई. इससे पहले 22 अगस्त 2024 को CRS ने बैराबी से होर्टोकी खंड को माल और यात्री ट्रेनों के लिए स्वीकृति दे दी थी.

मिजोरम की नई पहचान
इस परियोजना के पूरा होने के साथ मिज़ोरम पूर्वोत्तर भारत का चौथा राज्य बन गया है, जिसकी राजधानी राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ चुकी है. यह उत्तर-पूर्व के समग्र विकास में एक क्रांतिकारी कदम है. सामाजिक समावेश, आर्थिक प्रगति और पर्यटन के विकास के लिए यह रेल लाइन आने वाले वर्षों में मिज़ोरम की तस्वीर ही बदल देगी. यह सिर्फ एक रेल मार्ग नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत है.

टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें