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'असमान पक्षों के बीच मध्यस्थता संभव नहीं है, आप 'ब्रोकर' जैसे...’, ट्रंप के दावे पर थरूर का करारा जवाब

डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बड़ा बयान दिया है. अमेरिका में थरूर ने एक बार फिर कहा कि मध्यस्थता ऐसा शब्द है जिसे हम विशेष रूप से स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. मैं आपको बताता हूं क्यों नहीं. असल बात यह है कि जब आप 'ब्रोकर' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं तो आप एक ऐसी समानता की बात कर रहे होते हैं जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं है.

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07 Jun 2025
( Updated: 10 Dec 2025
12:53 AM )
'असमान पक्षों के बीच मध्यस्थता संभव नहीं है, आप 'ब्रोकर' जैसे...’, ट्रंप के दावे पर थरूर का करारा जवाब

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर प्रतिक्रिया दी है. शशि थरूर ने साफ़ तौर पर कह दिया कि कि दो असमान पक्षों के बीच मध्यस्थता संभव नहीं है. जैसे आतंकवादियों और आतंक से पीड़ितों के बीच कोई तुलना नहीं की जा सकती है. दरअसल थरूर इस समय अमेरिका में 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर भारतीय सांसदों के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं. उन्होंने गुरुवार को काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस में बातचीत के दौरान पूछे गए सवाल के जवाब में यह बड़ी बात कही है. उनका ये बयान इसलिए सुर्खियां बटोर रहा है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव सुलझाने का क्रेडिट ले रहे हैं. 

मध्यस्थता पर थरूर का बयान 
मध्यस्थता पर थरूर ने कहा, मध्यस्थता ऐसा शब्द है जिसे हम विशेष रूप से स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. मैं आपको बताता हूं क्यों नहीं. असल बात यह है कि जब आप 'ब्रोकर' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं तो आप एक ऐसी समानता की बात कर रहे होते हैं जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं है.

उन्होंने कहा कि आतंकवादियों और आतंक से पीड़ितों के बीच कोई समानता नहीं हो सकती. थरूर ने कहा, एक ऐसा देश जो आतंकवाद को सुरक्षित पनाह देता है और एक ऐसा देश जो एक सशक्त बहुदलीय लोकतंत्र है और अपने काम के जरिए आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है... दोनों के बीच कोई तुलना नहीं हो सकती.थरूर का कहना था कि एक ऐसा देश जो सिर्फ अपने हाल में रहने की कोशिश कर रहा है और एक ऐसा पड़ोसी जो जियो पॉलिटिकल व्यवस्था को बदलना चाहता है जो पिछले 75 वर्षों से चली आ रही है... इनके बीच कोई समानता नहीं हो सकती. ऐसे में यह कहना कि इन दो असमानों चीजों के बीच मध्यस्थता संभव है, गलत होगा. 

तनाव को सुलझाने का क्रेडिट ले रहे ट्रंप
गौरतलब है कि 10 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान पर हमले रोकने को लेकर ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बड़ा दावा किया था. उन्होंने कहा था कि भारत और पाकिस्तान ने युद्धविराम पर सहमति बना ली है और इसमें वॉशिंगटन की मध्यस्थता से हुई 'बातचीत' की भूमिका रही. इसके बाद से वो दर्जनों बार कह चुके हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को सुलझाया है.

ट्रंप ने यह भी कहा है कि उन्होंने दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसियों से कहा कि अगर वे लड़ाई बंद कर दें तो अमेरिका उनके साथ व्यापार करेगा.जब थरूर से पूछा गया कि वो इस टकराव में अमेरिकी भूमिका को कैसे देखते हैं? उन्होंने कहा कि कुछ हद तक अनुमान ही लगा सकते हैं कि अमेरिका की भूमिका पहले पक्षों से संवाद में रही होगी.

उन्होंने कहा, हमारी सरकार को अमेरिकी सरकार से हाई लेवल पर कई कॉल्स मिलीं और हम उनके विचार और चिंता की सराहना करते हैं. थरूर ने कहा कि अमेरिका ने शायद पाकिस्तान से भी इसी तरह के हाई लेवल के संवाद किए होंगे और संभवतः वहीं पर अमेरिका की बातों का सबसे ज्यादा असर हुआ होगा.थरूर का कहना था कि हमारा मानना है कि यही वह पक्ष था जिसे इस प्रक्रिया को रोकने के लिए समझाना जरूरी था. लेकिन यह सिर्फ मेरा अनुमान है. मुझे नहीं पता, उन्होंने पाकिस्तानियों से क्या कहा.

फिर दोहराई मध्यस्थता की बात
वहीं, गुरुवार को ही ट्रंप ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ ओवल ऑफिस में हुई बैठक में फिर दोहराया कि वह बहुत गर्व महसूस करते हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोक दिया. उन्होंने कहा, मैंने दोनों पक्षों के कुछ बहुत ही प्रतिभाशाली और अच्छे लोगों से बात की. मैंने उन्हें कहा कि अगर वे एक-दूसरे पर गोली चलाते रहे और परमाणु हथियार दिखाते रहे तो अमेरिका उनके साथ कोई व्यापार नहीं करेगा, क्योंकि इसका असर तेजी से फैलता है और यह हमें भी प्रभावित कर सकता है.

ट्रंप ने एक बात पर ज़ोर देते हुए कहा कि जानते हो, मैंने वह युद्ध रुकवाया... अब क्या मुझे इसका श्रेय मिलेगा? नहीं मिलेगा. वे मुझे किसी चीज़ का श्रेय नहीं देते, लेकिन और कोई यह नहीं कर सकता था. मैंने इसे रोका. मुझे उस पर बहुत गर्व है.

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