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बिहार में 'SIR' पर चुनाव आयोग को कोर्ट में घसीटने चले थे वामपंथी सांसद, खुद फंस गए, पत्नी के नाम से मिले दो वोटर कार्ड!

बिहार के भाकपा (माले) सांसद सुदामा प्रसाद की पत्‍नी का दो अलग-अलग मतदाता पहचान पत्र होने का मामला सामने आया है. चुनाव कार्यालय के सूत्रों ने यह जानकारी रविवार को दी. सांसद ने एसआईआर को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दी थी. याचिकाकर्ता और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के सांसद सुदामा प्रसाद की पत्नी शोभा देवी के पास कथित तौर पर दो मतदाता पहचान पत्र, आरजीएक्‍स 3264140 और डब्‍ल्‍यूवीए 0308544, थे.

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04 Aug 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:29 AM )
बिहार में 'SIR' पर चुनाव आयोग को कोर्ट में घसीटने चले थे वामपंथी सांसद, खुद फंस गए, पत्नी के नाम से मिले दो वोटर कार्ड!
Image: Sudama Prasad (File Photo)

बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है. राज्यभर में चुनाव आयोग द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेटेड और पारदर्शी बनाना है. हालांकि इस प्रक्रिया की शुरुआत से ही लगातार चुनाव आयोग सवालों के घेरे में है. विपक्ष न सिर्फ आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है बल्कि उसे कटघरे में भी खड़े कर रहा है. हालांकि लाख विवाद, विधानसभा से लेकर संसद तक मचे बवाला और विरोध-प्रदर्शन के बीच वोटर्स लिस्ट का पहला मसौदा जारी कर दिया गया है, ड्राफ्ट की कॉपी सभी जिलों के जिलाधिकारी और मान्यता प्राप्त दलों को सौंप दिए गए हैं, सिंतबर के अंत तक अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी जाएगी.

सुदामा प्रसाद की पत्नी के पास दो वोटर कार्ड!

इसी बीच एक के बाद एक विवाद सामने आते जा रहे हैं. पहले पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के पास कथित तौर पर दो वोटर कार्ड या 'ईपिक' नंबर पाए गए, जिस पर चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. वहीं अब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी सीपीआई (एमएल) के सांसद सुदामा प्रसाद भी ऐसे ही एक मामले में फंसते नजर आ रहे हैं. दरअसल उनकी पत्नी के पास भी दो ईपीआईसी (मतदाता पहचान पत्र) पाए गए हैं. हैरानी की बात यह है कि सुदामा प्रसाद की पार्टी CPI(ML) लिबरेशन खुद इस SIR प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता है.

चुनाव कार्यालय के सूत्रों ने यह जानकारी रविवार को दी. सांसद ने एसआईआर को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दी थी. याचिकाकर्ता और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के सांसद सुदामा प्रसाद की पत्नी शोभा देवी के पास कथित तौर पर दो मतदाता पहचान पत्र, आरजीएक्‍स 3264140 और डब्‍ल्‍यूवीए 0308544, थे.

बिहार चुनाव कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि उनकी एक मतदाता पहचान पत्र संख्या आरा विधानसभा क्षेत्र में पंजीकृत थी, जहां लावारिस सेवा केंद्र को मतदान केंद्र बनाया गया था, जबकि दूसरी अगियांव विधानसभा क्षेत्र से संबंधित थी, जहां सामुदायिक भवन अरैल को मतदान केंद्र बनाया गया था.

'दोहरे ईपीआईसी नंबर' विवाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव से जुड़े विवाद के काफी करीब है, जिनके पास भी कथित तौर पर 'दोहरे' मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) नंबर हैं.

विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची संशोधन को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई 12 अगस्त तक टाल दी थी और आश्वासन दिया था कि अगर मतदाता सूची में 'बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से बाहर' किए जाते हैं तो वह तुरंत हस्तक्षेप करेगा.

तेजस्वी यादव ने शनिवार को पटना में दावा करके राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया कि बिहार की मसौदा मतदाता सूची में उनका नाम गायब है. चुनाव आयोग के सूत्रों ने संकेत दिया कि उनके पास 'दो' ईपीआईसी नंबर हो सकते हैं, जिनमें से केवल एक ही एसआईआर में मान्य है. चुनाव कार्यालय ने रविवार को उन्हें पत्र लिखकर उनके 'दूसरे' ईपीआईसी नंबर का विवरण मांगा, जो उनके अनुसार मतदाता सूची से हटा दिया गया था.

दीघा विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक पंजीयन अधिकारी (ईआरओ) ने विपक्ष के नेता से उस मतदाता पहचान पत्र की मूल प्रति प्रस्तुत करने को कहा है, जिसका क्रमांक मसौदा मतदाता सूची से गायब होने का आरोप है. ईआरओ ने लिखा कि आपसे अनुरोध है कि कृपया 2 अगस्त, 2025 को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आपके द्वारा उल्लिखित मतदाता पहचान पत्र (कार्ड की मूल प्रति सहित) का विवरण अधोहस्ताक्षरी को उपलब्ध कराएं, ताकि इसकी गहन जांच की जा सके.

3 अगस्त के पत्र में कहा गया है कि यह पत्र तेजस्वी यादव द्वारा 2 अगस्त, 2025 को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए उस बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने 1 जुलाई की पात्रता तिथि के आधार पर प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में नाम शामिल न करने के संबंध में कहा था.

ऐसे में यह मामला केवल आरोप प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है. कहा जा रहा है कि आयोग इस संबंध में कुछ कड़े कदम उठा सकता है. बिहार में मतदाता सूची सुधार के नाम पर सियासी घमासान तो मचा ही है वहीं, चुनाव आयोग की सख्ती नेताओं के लिए परेशानी का सबब बन रही है.

कौन हैं सुदामा प्रसाद?
सुदामा प्रसाद सीपीआई (एमएल) से के दिग्गज नेता हैं और वर्तमान में आरा लोकसभा सीट से सांसद हैं. उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री आर. के. सिंह को 59,808 मतों से पराजित कर यह सीट जीती थी. पार्टी में वे एक मजबूत और मुखर चेहरा माने जाते हैं, और बिहार की राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका रही है.

क्या है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन?
लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए पारदर्शी और निष्पक्ष चुनावी व्यवस्था आवश्यक होती है. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) अभियान की शुरुआत की है. यह अभियान खास तौर पर आगामी चुनाव से पहले मतदाता सूची की समीक्षा, शुद्धिकरण और अद्यतन करने के लिए चलाया जा रहा है.

इस प्रक्रिया के तहत पुराने मतदाताओं की जानकारी का पुनः सत्यापन किया जाता है, नए मतदाताओं को जोड़ा जाता है, वहीं डुप्लीकेट या फर्जी नामों को सूची से हटाया जाता है. इसके अतिरिक्त, जिन लोगों का नाम अब तक सूची में दर्ज नहीं हो पाया था, उन्हें शामिल होने का एक और अवसर दिया जाता है.

चुनाव आयोग का यह कदम आगामी विधानसभा चुनावों को निष्पक्ष, भरोसेमंद और समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है. हालांकि, दो-दो वोटर कार्ड जैसे मामले इस पारदर्शिता को लेकर सवाल भी खड़े कर रहे हैं, जिनका जवाब अब सियासी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर तलाशा जा रहा है.

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