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इंदौर में पार्षद का लैंड जिहाद, खुद ही बदल दिया दो रोड का नाम, मिश्रा वाला रोड बना 'ख्वाजा रोड' और लोहा गेट हुआ 'रजा गेट' एफआईआर दर्ज

मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम ने एक मुस्लिम बहुल इलाके में सड़कों के नए नामों वाले साइनबोर्ड हटा दिए हैं. बीजेपी का आरोप है कि ये साइनबोर्ड एक 'विशेष धर्म' से जुड़े हैं.

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22 Aug 2025
( Updated: 08 Dec 2025
08:29 AM )
इंदौर में पार्षद का लैंड जिहाद, खुद ही बदल दिया दो रोड का नाम, मिश्रा वाला रोड बना 'ख्वाजा रोड' और लोहा गेट हुआ 'रजा गेट' एफआईआर दर्ज

मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि सड़कों का नाम अवैध रूप से बदलने के आरोप में एक वार्ड पार्षद के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. मध्य प्रदेश के शहरी विकास और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र और पूर्व भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय ने आईएमसी आयुक्त शिवम वर्मा को पत्र लिखकर दावा किया कि चंदन नगर की कुछ सड़कों का नाम 'विशेष धर्म' के आधार पर बदला गया है.

बोर्ड नहीं हटा तो होगा आंदोलन - आकाश विजयवर्गीय

आकाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि नगर निगम के कर्मचारियों ने बदले हुए नामों वाले साइनबोर्ड लगाए हैं और चेतावनी दी है कि अगर बोर्ड तुरंत नहीं हटाए गए तो आंदोलन किया जाएगा. मेयर भार्गव ने कहा कि वार्ड पार्षद फातमा रफीक खान ने चंदन नगर के वार्ड नंबर 2 में पांच सड़कों का नाम अवैध रूप से बदल दिया और निगम कर्मचारियों के माध्यम से साइनबोर्ड लगवाए. भार्गव ने कहा कि बाद में बोर्ड हटा दिए गए और पार्षद के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.

पार्षद के पति ने आरोपों को किया खारिज, कहा 40 साल से हो रहा इस्तेमाल 

पार्षद के पति रफीक खान ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने दो साल पहले निगम से घनी आबादी वाले इलाके में जनसुविधा के लिए साइनबोर्ड लगाने का अनुरोध किया था. रफीक खान ने दावा किया कि नगर निगम ने ये बोर्ड ऐसे नामों से लगाए हैं जो लगभग 40 सालों से इस्तेमाल हो रहे थे. खान ने कहा कि हालांकि उन्होंने और उनकी पत्नी ने विवादित साइनबोर्ड हटाने पर कोई आपत्ति नहीं जताई है, लेकिन वे अपना पक्ष रखने के लिए महापौर से मिलेंगे. 

हटाए गए साइनबोर्ड में से एक पर 'सकीना मंज़िल रोड' के साथ-साथ 'चंदन नगर सेक्टर-बी वार्ड नंबर 2' भी लिखा था, जबकि दूसरी गली पर 'रज़ा गेट' और 'लोहा गेट रोड' दोनों ही लिखे थे. स्थानीय निवासी अब्दुल वाहिद खान ने बताया, एक बोर्ड पर 'गौसिया रोड' के साथ 'चंदू वाला रोड' भी लिखा था, क्योंकि दोनों नाम आम तौर पर इस्तेमाल किए जाते थे. उन्होंने आगे कहा कि इन बोर्ड को हटाने से पते ढूंढने में जरूर दिक्कत होगी."

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