Advertisement

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2025: भारत और चीन के संबंधों का नया अध्याय

भारत और चीन के बीच लंबे समय से रुकी हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा इस साल गर्मियों में फिर शुरू होने जा रही है। दोनों देशों ने इस यात्रा को बहाल करने के लिए एक बड़ी सहमति बनाई है। हाल ही में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीन के उप विदेश मंत्री सुन वीडोंग के बीच बीजिंग में हुई वार्ता में यह निर्णय लिया गया।

Author
28 Jan 2025
( Updated: 10 Dec 2025
09:21 AM )
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2025: भारत और चीन के संबंधों का नया अध्याय
भारत और चीन के बीच इस साल गर्मियों से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू होने की खबर ने धार्मिक और कूटनीतिक हलकों में नई ऊर्जा का संचार किया है। दोनों देशों ने इस यात्रा को पुनः प्रारंभ करने के लिए सैद्धांतिक सहमति बना ली है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच सीधी हवाई सेवाएं शुरू करने और आपसी संबंधों को बेहतर बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा का महत्व
कैलाश मानसरोवर यात्रा भारत और तिब्बत के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है। यह यात्रा न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत-चीन के संबंधों में सकारात्मक संकेत देती है। 2020 के बाद से इस यात्रा पर रोक लग गई थी, लेकिन अब यह दोबारा शुरू होने जा रही है।

ऐसे में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीन के उप विदेश मंत्री सुन वीडोंग के बीच बीजिंग में हुई द्विपक्षीय वार्ता में इस यात्रा को बहाल करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत और चीन के बीच सीधी हवाई सेवाएं शुरू करने की भी सहमति बनी है। दोनों देशों की तकनीकी प्राधिकरण जल्द ही इस योजना का फ्रेमवर्क तैयार करेंगी। सीधी उड़ानों से न केवल व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क भी मजबूत होगा।
पारस्परिक सहयोग के नए आयाम
ट्रांस बॉर्डर नदियों का डेटा साझा करना: दोनों देशों ने सीमा पार बहने वाली नदियों के डेटा के आदान-प्रदान पर चर्चा को जल्द शुरू करने का निर्णय लिया है।
मीडिया और थिंक टैंक के संवाद: भारत और चीन के बीच थिंक टैंक और मीडिया के विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है।
पीपल टू पीपल कनेक्टिविटी: दोनों देशों ने लोगों के बीच आपसी समझ और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करने का निर्णय लिया।

डिप्लोमैटिक रिश्तों की 75वीं वर्षगांठ

साल 2025 में भारत और चीन अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे। इस अवसर को भव्य रूप से मनाने और दोनों देशों के नागरिकों के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए कई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। यह दोनों देशों के बीच गहरे कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। वार्ता के दौरान व्यापार और आर्थिक मामलों में पारदर्शिता को बढ़ाने और मौजूदा चिंताओं को हल करने पर चर्चा की गई। यह कदम दोनों देशों के बीच लंबे समय तक स्थिर संबंध बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कजान में हुई पिछली वार्ता को दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाला माना गया। इस बातचीत के बाद कई स्तरों पर संवाद तेज हुआ, जिसने भारत-चीन संबंधों को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और अन्य सहमति ने भारत और चीन के बीच बेहतर कूटनीतिक रिश्तों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। हालांकि, दोनों देशों को सीमा विवाद और अन्य मुद्दों पर भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

इस ऐतिहासिक पहल से न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूती मिलेगी, बल्कि दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग का एक नया अध्याय भी शुरू होगा। कैलाश मानसरोवर यात्रा इस बात का प्रतीक बन सकती है कि सकारात्मक संवाद और सहयोग के माध्यम से हर समस्या का समाधान संभव है।
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें