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जम्मू-कश्मीर राज्यसभा चुनाव: 10 साल बाद वोटिंग, कांग्रेस-PDP ने किया नेशनल कांफ्रेंस का समर्थन

दरअसल, जम्मू-कश्मीर की चार राज्यसभा सीटें खाली थीं. फरवरी 2021 में गुलाम नबी आजाद और नजीर अहमद कार्यकाल खत्म हो गया था. इसके बाद फरवरी साल 2025 में फैयाज अहमद मीर और शमशेर सिंह मनहास का कार्यकाल भी पूरा हो गया था.

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24 Oct 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:33 AM )
जम्मू-कश्मीर राज्यसभा चुनाव: 10 साल बाद वोटिंग, कांग्रेस-PDP ने किया नेशनल कांफ्रेंस का समर्थन

आर्टिकल 370 के निरस्त होने के बाद से जम्मू-कश्मीर में पहली बार राज्यसभा चुनाव हुए. श्रीनगर विधानसभा परिसर में वोटिंग प्रक्रिया हुई. इस दौरान 88 में से 86 विधायकों ने वोट के अधिकार का इस्तेमाल किया. मतदान से पहले कांग्रेस ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को समर्थन देने का ऐलान किया था. 

दरअसल, जम्मू-कश्मीर की चार राज्यसभा सीटें खाली थीं. फरवरी 2021 में गुलाम नबी आजाद और नजीर अहमद कार्यकाल खत्म हो गया था. इसके बाद फरवरी साल 2025 में फैयाज अहमद मीर और शमशेर सिंह मनहास का कार्यकाल भी पूरा हो गया था. जिसके बाद 24 अक्टूबर को राज्यसभा के लिए वोटिंग हुई. 

जम्मू कश्मीर में राज्यसभा के लिए कौन हैं उम्मीदवार? 

नेशनल कांफ्रेंस के उम्मीदवार- मोहम्मद रमजान, शम्मी ओबेरॉय, सज्जाद किचलू, इमरान नबी डार हैं.

वहीं, BJP के सत शर्मा, केश महाजन, डॉ अली मोहम्मद मीर मैदान में हैं. 

कांग्रेस ने NC का समर्थन करते हुए क्या कहा? 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और JKPCC अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने घोषणा की कि सभी 6 कांग्रेस विधायक एनसी उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करेंगे. इससे पहले कांग्रेस की एक बैठक हुई थी. जिसमें यह फैसला लिया गया. तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि, BJP को हराना कांग्रेस-एनसी गठबंधन की पहली प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ हमारा गठबंधन मजबूत और सैद्धांतिक है. हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि इन चुनावों में BJP को हार का सामना करना पड़े. कांग्रेस के अलावा PDP ने भी नेशनल कांफ्रेस को समर्थन देने का ऐलान किया था. 

राज्यसभा चुनाव गठबंधनों की ताकत की परीक्षा लेगा और पार्टियों में किसी भी दरार को उजागर कर सकता है. जैसा की उपराष्ट्रपति चुनावों में देखा गया था. दोनों पक्षों ने मतदान कर दिया है अब नजर नतीजों पर हैं. आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर में राज्यसभा चुनाव लगभग 10 साल बाद हो रहे हैं. फरवरी 2021 के बाद जम्मू-कश्मीर में कोई सक्रिय विधानसभा नहीं होने के कारण ये चुनाव नहीं हो पाए थे. BJP और NC दोनों ही पार्टियों की प्रतिष्ठा दांव पर है और जीत के लिए दोनों ने ही एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है. दोनों ने अपने अपने विधायकों को व्हिप जारी कर मौजूद रहने को कहा था. 

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