Advertisement

'भारत के नियम का करना होगा पालन', हाईकोर्ट से सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' को झटका, केंद्र के खिलाफ दायर याचिका खारिज

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X की एक याचिका खारिज कर दी है. याचिका में केंद्र सरकार के कुछ ऐसे आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिसमें सरकार ने X से कुछ अकाउंट्स को ब्लॉक करने का निर्देश दिया था.

Author
24 Sep 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:13 AM )
'भारत के नियम का करना होगा पालन', हाईकोर्ट से सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' को झटका, केंद्र के खिलाफ दायर याचिका खारिज

कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X (एक्स) की याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स यहां मनमर्जी नहीं चला सकते और उन्हें भारतीय कानूनों का पालन करना ही होगा. 

सोशल मीडिया के लिए नियम बनाना समय की जरूरत

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक्स की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि सोशल मीडिया के लिए नियम बनाना समय की जरूरत है. कोर्ट ने कहा कि माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म को भारत में बिना किसी रोक-टोक के चलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती. जस्टिस एम नागप्रसन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सोशल मीडिया को विनियमित करने की जरूरत है. खास तौर से महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में. ऐसा ना होने से नागरिक को संविधान से मिले गरिमा के अधिकार का हनन होता है.

एक्स ने कहा कंपनी अमेरिकी कानूनों के तहत करती है काम 

केंद्र सरकार ने हाल ही में X को कुछ अकाउंट्स और पोस्ट ब्लॉक करने का निर्देश दिया था. इसके खिलाफ X की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि कंपनी अमेरिकी कानूनों के तहत काम करती है और उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है. X ने तर्क दिया कि इसी कारण से उसे भारत में टेकडाउन आदेशों का पालन करने की जरूरत नहीं.

सरकार की तरफ से दिया गया जवाब 

एक्स के जवाब में सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि अनुच्छेद 19(2) केवल भारतीय नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, विदेशी कंपनियों या गैर-नागरिकों के लिए नहीं. सरकार ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारत में संचालित होने के लिए देश के कानूनों का पालन करना ही होगा. कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया पर रेगुलेशन की जरूरत है और किसी भी कंपनी को बिना नियंत्रण के काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की पीठ ने कहा, सूचना और संचार पर हमेशा नियंत्रण और रेगुलेशन लागू होते आए हैं. तकनीक के विकास के साथ नियमों को भी अपनाना जरूरी है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अराजक स्वतंत्रता में नहीं छोड़ा जा सकता

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जो नागरिक न्यायिक संरक्षण चाहता है, उसे राष्ट्र का नागरिक होना चाहिए. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अराजक स्वतंत्रता में नहीं छोड़ा जा सकता. हर संप्रभु राष्ट्र सोशल मीडिया पर नियंत्रण करता है. कोई भी मंच भारतीय बाजार को केवल खेल का मैदान समझकर संचालित नहीं कर सकता. यह फैसला X के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है और भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के नियामक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक संकेत भी माना जा रहा है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें