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अमेरिकी डेयरी उत्पादों के आयात को मंजूरी देने से भारत का इनकार, गाय के 'मांसाहारी' दूध पर अटकी बात

भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की बातचीत गाय के ‘मांसाहारी’ दूध पर आकर अटक गई है. इसके बाद भारत ने अमेरिकी डेयरी उत्पादों के आयात को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है.

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16 Jul 2025
( Updated: 11 Dec 2025
03:41 AM )
अमेरिकी डेयरी उत्पादों के आयात को मंजूरी देने से भारत का इनकार, गाय के 'मांसाहारी' दूध पर अटकी बात

भारत ने अमेरिका को सख्त लहजे में कहा है कि ऐसे दूध या डेयरी उत्पाद को भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती, जो उन गायों से प्राप्त हुआ हो जिन्हें मांस या रक्त जैसे पशु-आधारित उत्पाद खिलाए गए हों. 

अमेरिकी डेयरी उत्पाद के आयात को मंजूरी देने से भारत का इनकार 

भारत ने अमेरिकी डेयरी उत्पादों के आयात को मंजूरी देने से इनकार करते हुए सख्त लहजे में कहा है कि ऐसे दूध या डेयरी उत्पाद को भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती, जो उन गायों से प्राप्त हुआ हो जिन्हें मांस या रक्त जैसे पशु-आधारित उत्पाद खिलाए गए हों. 

इन उत्पादों के साथ इस संबंध में एक प्रमाणपत्र अवश्य होना चाहिए. बता दें कि अमेरिका में आमतौर पर गायों के चारे में सस्ते प्रोटीन के लिए सूअर, मुर्गी, मछली, घोड़े तक की चर्बी और खून का उपयोग होता है. अमेरिका ने भारत की इस शर्त को 'अनावश्यक व्यापार बाधा' बताते हुए विश्व व्यापार संगठन में उठाया है.

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश 

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और इसका डेयरी क्षेत्र अर्थव्यवस्था में 3% तक योगदान देता है, जिसका कुल मूल्य ₹9 लाख करोड़ है. इसमें अधिकांश हिस्सा छोटे, सीमांत किसानों की है. एसबीआई के मुताबिक, अमेरिका से डेयरी उत्पादों का आयात होने पर देश को हर साल ₹1.03 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. भारत ने गाय से जुड़ी सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं का भी हवाला दिया है.

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चल रहा काम - ट्रंप 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक अहम बयान देते हुए कहा कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते पर काम चल रहा है, जिसके तहत भारतीय बाजारों तक अमेरिका को अधिक पहुंच मिलेगी. ट्रंप ने यह टिप्पणी इंडोनेशिया के साथ हुए ताजा व्यापार समझौते के संदर्भ में की है. 

ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ भी वैसा ही समझौता तैयार किया जा रहा है जैसा कि इंडोनेशिया के साथ हुआ. भारत उस दिशा में ही काम कर रहा है. हम एक ऐसा समझौता चाहते हैं जिसमें हमें भारतीय बाजारों तक पूरी पहुंच मिले.

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