Wikipedia की कार्यशैली पर हाईकोर्ट की सख्ती, जानें पूरा मामला और क्यों उठ रहे हैं सवाल?

Wikipedia का ओपन-सोर्स मॉडल, जहाँ हर कोई संपादन कर सकता है, जो इसकी सटीकता पर सवाल खड़े करता है। ऐसे में हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की लापरवाही से न्याय और सत्य की अवधारणाएँ प्रभावित हो सकती हैं। अदालत ने Wikipedia के कार्यशैली को लेकर चिंता जताई है।

Author
25 Oct 2024
( Updated: 26 Oct 2024
09:00 AM )
Wikipedia की कार्यशैली पर हाईकोर्ट की सख्ती, जानें पूरा मामला और क्यों उठ रहे हैं सवाल?
इंटरनेट के इस युग में जानकारी की आसान पहुँच के लिए Wikipedia एक बेहद लोकप्रिय स्रोत बन चुका है। लेकिन हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले ने इसकी कार्यशैली और कंटेंट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाईकोर्ट की एक सुनवाई के दौरान Wikipedia द्वारा उपलब्ध कराए गए कंटेंट की जाँच में असत्यापन और संभावित गलत जानकारी देने का आरोप लगाया गया है। आइए, इस विवाद पर विस्तार से चर्चा करें कि आखिर हाईकोर्ट ने ऐसा कड़ा रुख क्यों अपनाया है।
Wikipedia को लेकर मामला क्या है?
हाल में एक केस के दौरान देखा गया कि Wikipedia के कुछ आर्टिकल्स में भारतीय कानून से जुड़ी जानकारी गलत ढंग से पेश की गई थी। याचिका में कहा गया कि Wikipedia पर सामग्री को बिना पुष्टि किए डालने की प्रवृत्ति के कारण न्यायिक प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका बढ़ती है। कोर्ट का मानना था कि Wikipedia की संपादन प्रक्रिया पर कोई ठोस सत्यापन प्रणाली न होने से इसकी सटीकता पर संदेह बढ़ता है।
Wikipedia का कार्यशैली और संपादन प्रक्रिया
Wikipedia एक ओपन-सोर्स प्लेटफार्म है, जहाँ कोई भी व्यक्ति संपादन कर सकता है। हालांकि संपादन की प्रक्रिया में मॉडरेशन होता है, लेकिन सामग्री का सत्यापन विशेषज्ञों द्वारा नहीं किया जाता। कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि किसी भी व्यक्ति द्वारा की गई संपादन बिना ठोस प्रमाण के प्रकाशित हो सकती है। इस खुली संपादन प्रक्रिया के कारण किसी भी जानकारी को विकृत करना संभव है, जो समाज और न्याय प्रणाली के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी 
हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की लापरवाही से न्याय और सत्य की अवधारणाएँ प्रभावित हो सकती हैं। अदालत ने Wikipedia के कार्यशैली को लेकर चिंता जताते हुए यह सवाल उठाया कि कैसे इस पर प्रकाशित जानकारी को सत्यापित किया जा सकता है, और इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। Wikipedia पर अदालती मामलों से संबंधित जानकारी प्रकाशित करने पर भी कुछ सख्त निर्देश देने की बात कही गई है।

हाईकोर्ट का निर्णय Wikipedia के लिए एक चेतावनी साबित हो सकता है। यह संभव है कि Wikipedia भविष्य में अपनी संपादन प्रक्रिया में अधिक सख्ती और सटीकता लाने के लिए नई तकनीकों और विशेषज्ञों की मदद ले। संभावित बदलावों में कंटेंट एडिट करने से पहले विशेषज्ञों का सत्यापन, उपयोगकर्ताओं के लिए कठोर संपादन नियम, और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी प्राप्त करने पर जोर दिया जा सकता है। Wikipedia का उपयोग करते समय, उपयोगकर्ताओं को यह समझना चाहिए कि यह एक ओपन-सोर्स प्लेटफार्म है और इसके किसी भी लेख की सटीकता पर पूरी तरह से भरोसा नहीं करना चाहिए। विशेषकर न्यायिक मामलों, चिकित्सा, विज्ञान और कानून से जुड़े विषयों पर, प्राथमिक स्रोतों या विशेषज्ञों की राय पर आधारित जानकारी का ही प्रयोग करना बेहतर होता है।

Wikipedia की कार्यशैली पर उच्च न्यायालय की टिप्पणियाँ न केवल Wikipedia के लिए, बल्कि उन सभी प्लेटफार्म्स के लिए एक संदेश है जो जानकारी को सत्यापित किए बिना उसे प्रकाशित करते हैं। यह मामला दर्शाता है कि इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी का सत्यापन कितना महत्वपूर्ण है, और न्यायिक व्यवस्था में इसे कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है। अगर Wikipedia अपनी कार्यशैली में सुधार लाता है तो यह जनता और ज्ञान के प्रसार के लिए एक सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें