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उमर अंसारी की जमानत याचिका पर सुनवाई टली, हाईकोर्ट में अब 8 सितंबर को होगी सुनवाई

धोखाधड़ी के मामले में पिछले महीने उमर अंसारी की गिरफ्तारी की हुई थी. मां अफशां अंसारी के फर्जी हस्ताक्षर कर जालसाजी के मामले में गाजीपुर पुलिस ने उमर को गिरफ्तार किया था. करीब दो हफ्ते पहले उमर को गाजीपुर जेल से कासगंज भेजा गया. कासगंज जेल में उमर का भाई अब्बास अंसारी पहले से बंद है.

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02 Sep 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:47 AM )
उमर अंसारी की जमानत याचिका पर सुनवाई टली, हाईकोर्ट में अब 8 सितंबर को होगी सुनवाई

माफिया मुख्तार अंसारी के छोटे बेटे उमर अंसारी की जमानत को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अगले हफ्ते के लिए सुनवाई टल गई है. मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से समय मांगे जाने के बाद हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 8 सितंबर तय की.

उमर की जमानत याचिका पर सुनवाई टली

कासगंज जेल में बंद उमर अंसारी ने जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है. गाजीपुर कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद उमर अंसारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। जस्टिस समीर जैन की सिंगल बेंच उमर अंसारी की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही है.

धोखाधड़ी के मामले में जेल में बंद उमर अंसारी 

धोखाधड़ी के मामले में पिछले महीने उमर अंसारी की गिरफ्तारी की हुई थी. मां अफशां अंसारी के फर्जी हस्ताक्षर कर जालसाजी के मामले में गाजीपुर पुलिस ने उमर को गिरफ्तार किया था. करीब दो हफ्ते पहले उमर को गाजीपुर जेल से कासगंज भेजा गया. कासगंज जेल में उमर का भाई अब्बास अंसारी पहले से बंद है.

भड़काऊ भाषण मामले में बरी हो चुके उमर

गौरतलब है कि भड़काऊ भाषण मामले में उमर को पहले ही बरी किया जा चुका है. यह मामला 3 मार्च, 2022 का है, जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मऊ सदर से उम्मीदवार अब्बास अंसारी ने एक सार्वजनिक सभा में कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भड़काऊ बयान दिया था. इस मामले में उमर का भी नाम आया, जिसे मऊ कोर्ट ने बरी किया था.

हालांकि, 20 अगस्त को अब्बास अंसारी को भी बड़ी राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भड़काऊ भाषण मामले में मऊ कोर्ट के दोषसिद्धि के फैसले को पलटा. 31 मई को, मऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने अब्बास को दो साल की कैद की सजा और जुर्माना लगाया था.  साथ ही, चुनाव एजेंट मंसूर को 6 महीने की कैद की सजा सुनाई गई थी. इस फैसले से अब्बास अंसारी की विधानसभा सदस्यता चली गई थी. हाईकोर्ट के फैसले के बाद विधायकी पद बहाल होने का रास्ता भी साफ हुआ था.

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