हरियाणा: माहौल बनाम मैनेजमेंट का चुनाव

हर बूथ पर अपने कौन-कौन से कार्यकर्ता हैं, उनको बूथ मैनेजमेंट में क्या दिक्कतें आ रही हैं, संघ की मदद से इसे दूर किया गया। हर दिन प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान या सह-प्रभारी विप्लव देव फ़ोन से जानकारी ले रहे थे।

Author
09 Oct 2024
( Updated: 07 Dec 2025
11:42 PM )
हरियाणा: माहौल बनाम मैनेजमेंट का चुनाव
नई दिल्ली: बहुत सारे लोग भाजपा की हरियाणा में जीत को अपने तरीके से विश्लेषण कर रहे हैं। लेकिन मैं इस जीत का सबसे अधिक श्रेय नायब सैनी और RSS को दूंगा। 

संघ ने चुनाव के दौरान पूरे हरियाणा में 16,000 बैठकें की। जिसने कभी न कभी भाजपा को वोट दिया हो, उसके घर संघ के स्वयंसेवक पहुंचे, उनकी नाराज़गी समझी और दूर करने की कोशिश की।

जिस वक्त सोशल मीडिया पर और टेलीविजन चैनल्स कांग्रेस की जीत का दावा कर रहे थे, संघ पूरी ख़ामोशी से ज़मीन पर अपने काम में जुटा था। नाराज़ नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाना, बीजेपी में जिसका टिकट कटा है, उसे बागी उम्मीदवार के रुप में चुनाव में न उतरने के लिए तैयार करना आसान नहीं था। 

लेकिन तारीफ़ करनी होगी नायब सिंह सैनी का। उन्होने संघ के साथ गज़ब के तालमेल के साथ काम किया। जब लगा कि संघ किसी नेता या कार्यकर्ता को नहीं मना पा रहा, तो सैनी साहब खुद उस नेता और कार्यकर्ता के घर गए। एक एक दिन में 16-16 लोगों को मनाना, उनकी बातें धैर्य से सुनना आसान नहीं था। 

हाल के दिनों में भाजपा ने चुनाव लड़ने की अपनी रणनीति  में बदलाव किया है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और अब हरियाणा। यहां TV और सोशल मीडिया से दूर, micro management पर ध्यान दिया गया। 

हर बूथ पर अपने कौन-कौन से कार्यकर्ता हैं, उनको बूथ मैनेजमेंट में क्या दिक्कतें आ रही हैं, संघ की मदद से इसे दूर किया गया। हर दिन प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान या सह-प्रभारी विप्लव देव फ़ोन से जानकारी ले रहे थे। 

कुल मिलाकर कहें तो हरियाणा का चुनाव माहौल बनाम मैनेजमेंट का चुनाव था। धन्य है भाजपा कि उसके पास RSS जैसा संगठन है, जहां स्वार्थ को परे रखकर स्वयंसेवक दिलोजान से जुटे रहते हैं।

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें