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अनिल विज और भाजपा के बीच बढ़ा विवाद, नोटिस के बाद क्या होगा अगला कदम?

हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल विज को भाजपा ने पार्टी के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आलोचना करने के कारण कारण बताओ नोटिस भेजा है। अनिल विज ने इस नोटिस के बारे में मीडिया के जरिए जानकारी मिलने की बात कही और जवाब देने के लिए तीन दिन का समय मांगा।

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11 Feb 2025
( Updated: 11 Dec 2025
04:01 AM )
अनिल विज और भाजपा के बीच बढ़ा विवाद, नोटिस के बाद क्या होगा अगला कदम?
हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल विज को हाल ही में भारतीय जनता पार्टी ने प्रादेशिक नेतृत्व की सार्वजनिक रूप से आलोचना करने पर कारण बताओ नोटिस भेजा है। यह घटना हरियाणा की राजनीति में एक बड़े विवाद का कारण बन चुकी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बडोली की तरफ से भेजे गए इस नोटिस में अनिल विज से तीन दिन के भीतर जवाब देने की अपेक्षा की गई थी।
अनिल विज ने इस नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस नोटिस के बारे में मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस नोटिस का जवाब मीडिया के जरिए नहीं देंगे। विज ने कहा, "मैं बेंगलुरु से हाल ही में वापस आया हूं और मुझे घर पर इस नोटिस की समीक्षा करनी है। इसके बाद मैं पार्टी आलाकमान को लिखित रूप में अपना जवाब भेजूंगा।" अनिल विज ने इस पूरे मामले को लेकर कोई भी जल्दबाजी करने से इंकार किया और कहा कि वह इसकी गहन समीक्षा करेंगे।
नोटिस में क्या था?
हरियाणा भाजपा अध्यक्ष मोहनलाल बडोली की ओर से भेजे गए नोटिस में आरोप लगाया गया था कि अनिल विज ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से पार्टी के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के खिलाफ बयान दिए हैं, जो पार्टी की नीति और अनुशासन के खिलाफ हैं। इस गंभीर आरोप के कारण भाजपा ने उन्हें तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। नोटिस में कहा गया, "आपने हाल ही में पार्टी के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयान दिए हैं। यह पार्टी के आंतरिक अनुशासन और नीति के खिलाफ है, इस लिए आपको कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।"
अनिल विज के बयान से पार्टी में हड़कंप
इस नोटिस से पहले, अनिल विज ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बडोली से इस्तीफा देने की मांग की थी। विज ने आरोप लगाया था कि हिमाचल प्रदेश में बडोली के खिलाफ एक कथित दुष्कर्म मामले में एफआईआर दर्ज हुई है, और ऐसे में उन्हें तुरंत अपना इस्तीफा दे देना चाहिए था। इस बयान ने भाजपा के भीतर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। अनिल विज का कहना था कि जब किसी पार्टी के नेता के खिलाफ इतने गंभीर आरोप लगते हैं, तो उन्हें पार्टी की प्रतिष्ठा और नैतिकता के मद्देनजर पद छोड़ देना चाहिए।
इसके अलावा, अनिल विज ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के खिलाफ भी नकारात्मक टिप्पणियां की थीं। इस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर गहरे विवाद को जन्म दिया है, जिससे प्रदेश भाजपा में तनाव का माहौल बन गया है।
आपको बता दें कि अनिल विज हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा नाम हैं और भाजपा के महत्वपूर्ण नेताओं में शुमार हैं। वह एक अनुभवी नेता हैं और लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए हैं। विज की छवि एक मजबूत और कभी न झुकने वाले नेता की है, जो अपनी बात खुलकर रखने से नहीं डरते। उनका मानना है कि यदि पार्टी के भीतर कोई गड़बड़ी हो रही है या किसी नेता के खिलाफ गंभीर आरोप हो, तो उसे सार्वजनिक रूप से उजागर करना जरूरी है।
यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हरियाणा में भाजपा की सरकार में अनिल विज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में पार्टी के भीतर उनके बयान और उन पर लगाए गए आरोप, पार्टी के नेतृत्व को चुनौती देने के रूप में देखे जा रहे हैं। पार्टी के भीतर चल रहे इस विवाद से यह सवाल उठ रहा है कि क्या अनिल विज भाजपा की नीति और विचारधारा से असहमत हो गए हैं, या फिर यह सब एक रणनीति का हिस्सा है?
भविष्य में इस विवाद का क्या परिणाम निकलेगा, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन यह स्पष्ट है कि हरियाणा भाजपा में इस समय भारी उथल-पुथल मच चुकी है। प्रदेश अध्यक्ष और अन्य पार्टी नेताओं के बीच विवाद ने पार्टी के भीतर आंतरिक कलह को जन्म दिया है। अनिल विज की टिप्पणी और भाजपा के नेतृत्व की प्रतिक्रिया से यह सवाल उठने लगा है कि क्या पार्टी में अंदरूनी कलह से आलाकमान सच में निपट पाएगा, और क्या यह विवाद हरियाणा के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करेगा? क्या अनिल विज के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया जाएगा या वह अपनी बात रखने में सफल होंगे?
Source- IANS
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