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हरिद्वार धर्म संसद में CM Dhami का ऐलान, अगले 25 सालों का प्लान तैयार कर दिया !

हरिद्वार में चल रहे धर्म संसद के शुभारंभ कार्यक्रम में उत्तराखंड ने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी का भव्य स्वागत किया गया, सीएम धामी ने धर्म संसद मे पहुंच कर साधु-संतो का आशीर्वाद लिया, और मंच से बताया कि कैसे भारत विश्वगुरु बनने के रास्ते पर अग्रसर है।

हरिद्वार धर्म संसद में CM Dhami का ऐलान, अगले 25 सालों का प्लान तैयार कर दिया !
धर्मनगरी में मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami और देवभूमि एक दुसरे का प्रयार्य बन चुके है। धामी उत्तराखंड को विकास के जिस नए आयाम पर लेकर जा रहे है, जिस तरीके से इंटरनेशनल लेवल पर उत्तराखंड की चमक को बिखेर रहे है। वैसा शायद आज तक के इतिहास में उत्तराखंड का कोई मुख्यमंत्री नहीं कर पाया, और पुष्कर सिंह धामी की जो सबसे खास बात है, जो उन्हे बाकियों से अगल बनाती है विकास के साथ साथ धर्म की पुनर्स्थापना, जिस तरीके से कुछ जिहादी तत्वों ने उत्तराखंड को अपने आगोश में लेने की कोशिश की थी, सीएम धामी उसे पूरी तरीके से खत्म करने की दिशा में कदम बढाए है। उसी की एक झलक हरिद्वार में देखने को मिली, जब मुख्यमत्री धामी हरिद्वार में चल रही धर्म संसद में पहंचे, युवा धर्म संसद, धर्म- संस्कृति और राष्ट्र के भारतीय विचार को युवाओं के भीतर भरने का काम किया। युवाओं को अध्यातम के वास्तविक रुप से अवगत कराने के लिए इस धर्म संसद का आयोजन किया गया।आपको अगर याद हो तो स्वामी विवेकानंद ने शिकागो के घर्म संसद में हिंदुस्तान और सनातन का परचम लहराया था, और ये धर्म संसद भी उसी लक्ष्य को पूरा करता है। कार्यक्रम में पहुंचे सीएम धामी का स्वागत भव्य तरीके से खुद योग गुरु बाबा रामदेव ने किया।


हरिद्वार में जो धर्म संसद चल रही है उसमें 24 राज्यों के बच्चे, शिक्षक, शिक्षाविद, साधू-संत, सामाजिक सुधारक पहुंचे है। कार्यक्रम दो दिन तक चलने वाला है।और इस कार्यक्रम में विस्तृत भारत का स्वरुप दुनिया के सामने रखा जाएगा। इस स्वरुप को रखने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, RSS के सुनील आम्बेकर, स्वामी रामदेव , चंपत राय मौजूद रहेंगे।

यहां एक और बात गौर करने वाली है, कि 2021 में जिस धर्म संसद का आयोजन किया गया था, वो काफी विवादो में रहा था,  हरिद्वार के वेद निकेतन में आयोजित उस धर्म संसद में नफरत भरे भाषण दिए गए थे। उस दौरान वक्ताओं पर ऐसे आरोप लगे थे कि उन्होने हिंदू धर्म की रक्षा के नाम पर मुसलमानों के ख़िलाफ़ नरसंहार का आह्वान किया था। इस कार्यक्रम में जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद, यूपी शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ़ वसीम रिज़वी, स्वामी प्रबोधानंद गिरि, धर्मदास, साध्वी अन्नपूर्णा समेत कई संत शामिल हुए थे। 

इस मामले में पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की थी। लेकिन अगर मुस्लिम समुदाय गजवा ए हिंद की बात करता है तो वो इस देश में विवादित नहीं होता, इस्लाम के नाम पर , नबी के नाम पर अगर वो किसी का गला रेत देता है तो भी विवादित नहीं होता, लेकिन अगर हिंदू अपने बचाव की भी बात करता है तो वो सामप्रदायिक हो जाता है। लेकिन सीएम धामी एक मुख्यमंत्री के साथ साथ सनातनी भी है, और शायद यही कारण है कि धामी अपने कर्तव्यों के साथ साथ अपने धर्म का पालन भी कर रहे है। धामी एक धर्म रक्षक है और यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग सीएम धामी को सुनने के लिए पहुंचे है। लेकिन 2021 में धर्मसंसद पर जो आरोप लगे थे, उसकी चिंता ना करते हुए जिस तरीके से सीएम धामी हरिद्वार में चल रहे धर्म संसद में पहुंचे है।

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