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मोदी की काशी में ख़ास होगी देव-दिवाली, 12 लाख से अधिक दीप जलाने का लक्ष्य में जुटा प्रशासन

काशी में गंगा किनारे के 84 घाटों पर 12 लाख से अधिक दीपों को प्रज्वलित करने की योजना बनाई गई है, इसके साथ ही लेजर शो भी आयोजित होगा। देव दीपावली की तैयारियों को लेकर वाराणसी पर्यटन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर आरके रावत ने आईएएनएस को बताया कि काशी के देव दीपावली का इंतजार बनारस ही नहीं बल्कि पूरे देश को रहता है। देश के हर जगह से लोग इसमें शामिल होते हैं।

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25 Sep 2024
( Updated: 10 Dec 2025
06:56 PM )
मोदी की काशी में ख़ास होगी देव-दिवाली, 12 लाख से अधिक दीप जलाने का लक्ष्य में जुटा प्रशासन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में देव दीपावली को लेकर प्रशासन द्वारा खास तैयारी की जा रही है। इस बार 12 लाख से अधिक दीपों से बनारस के घाटों को जगमग करने की योजना है। काशी में देव दीपावली को भव्य और दिव्य बनाने के लिए लगातार प्रशासनिक स्तर पर बैठक की जा रही है। इस बार गंगा किनारे के 84 घाटों पर 12 लाख से अधिक दीपों को प्रज्वलित करने की योजना बनाई गई है, इसके साथ ही लेजर शो भी आयोजित होगा। देव दीपावली की तैयारियों को लेकर वाराणसी पर्यटन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर आरके रावत ने आईएएनएस को बताया कि काशी के देव दीपावली का इंतजार बनारस ही नहीं बल्कि पूरे देश को रहता है। देश के हर जगह से लोग इसमें शामिल होते हैं।

उन्होंने बताया कि देव दीपावली के आयोजन में पिछली बार काफी विदेशी पर्यटक शामिल हुए थे। इस बार देव दीपावली और भव्य तरीके से मनाने की तैयारी की जा रही है। पर्यटन विभाग की तरफ से कई बैठक की जा रही हैं। कमिश्नर की अध्यक्षता में एक मीटिंग की जा चुकी है, जिसमें सभी जरूरी दिशानिर्देश दिए गए हैं।

आरके रावत ने बताया कि इस बार देव दीपावली को बड़े स्तर पर मनाने की पूरी तैयारी की जा रही है। देव दीपावली पर फायर क्रैकर का शो भी किया जाएगा। दीयों की संख्या को लेकर अभी एक बैठक की जानी है। जनसहभागिता के रूप में मनाया जाने वाला यह त्योहार है, इसी को ध्यान में रखकर उसमें अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जा रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रम में बनारस के लोकल कलाकारों को जोड़ा जाएगा। इस बार आयोजन का समय 13, 14 और 15 नवंबर का है। 15 नवंबर को देव दीपावली मनेगी।

देव दीपावली के दिन दीपों की संख्या का रिकॉर्ड बनाने के सवाल पर वाराणसी पर्यटन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि यह जनसहभागिता के माध्यम से मनाया जाने वाला त्योहार है। ऐसे में इसमें अधिक से अधिक लोगों को जोड़ते हुए गंगा घाट के दोनों तरफ दीपकों को जलाया जाता है। कोशिश की जाएगी कि पिछले साल हमने जितने दीपकों को जलाया इस बार उससे ज्यादा दीपकों को प्रज्वलित करें।

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