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'आकर साबित करें कि कैसे धांधली हुई है...', महाराष्ट्र चुनाव में 'हेराफेरी' के आरोपों पर चुनाव आयोग ने राहुल गांधी को दी चुनौती

महाराष्ट्र चुनाव में धांधली के राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने संज्ञान लेते हुए उन्हें चुनौती दी है कि आकर साबित करें कि कहां धांधली हुई है. वो उनसे व्यक्तिगत चर्चा के लिए तैयार हैं. अब बड़ा सवाल ये है कि राहुल महज आरोप लगाएंगे या फिर आयोग के समक्ष सबूतों सहित साबित भी करेंगे

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24 Jun 2025
( Updated: 09 Dec 2025
03:23 AM )
'आकर साबित करें कि कैसे धांधली हुई है...', महाराष्ट्र चुनाव में 'हेराफेरी' के आरोपों पर चुनाव आयोग ने राहुल गांधी को दी चुनौती

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल द्वारा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में धांधली या फिक्सिंग को लेकर लगाए गए आरोपों को निर्वाचन आयोग ने गंभीरता से लिया है. उन्होंन राहुल को चुनाव आयोग के साथ बातचीत के लिए निमंत्रित किया है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग आपसे व्यक्तिगत रूप से मिलने और सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए भी तैयार है.

भारत निर्वाचन आयोग सचिवालय ने कहा, "पिछले साल हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों पर एक अखबार में प्रकाशित आपके लेख के मद्देनजर मुझे यह बताने का निर्देश दिया गया है कि नवंबर 2024 में विधानसभा चुनावों के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) की ओर से इसी तरह के मुद्दे उठाए गए थे. आयोग ने 24 दिसंबर 2024 को आईएनसी को एक विस्तृत जवाब दिया था, जिसकी प्रति ECI की वेबसाइट पर उपलब्ध है."

इसमें आगे कहा गया, "सभी चुनाव भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा संसद द्वारा पारित निर्वाचन कानूनों, उनमें बनाए गए नियमों और समय-समय पर जारी किए गए आयोग के निर्देशों के अनुसार सख्ती से आयोजित किए जाते हैं. जैसा कि आप जानते हैं कि पूरी चुनाव प्रक्रिया विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर विकेंद्रीकृत तरीके से आयोजित की जाती है, जिसमें महाराष्ट्र भर में 1,00,186 से अधिक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ), 288 निर्वाचक रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ), 139 सामान्य पर्यवेक्षक, 41 पुलिस पर्यवेक्षक, 71 व्यय पर्यवेक्षक, 288 रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) जो आयोग द्वारा नियुक्त किए गए थे और राष्ट्रीय एवं राज्य राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 1,08,026 बूथ लेवल एजेंट (बीएलए), जिनमें आईएनसी के 28,421 एजेंट शामिल थे- ने इसमें भाग लिया था."

‘व्यक्तिगत रूप से चर्चा कर सकते हैं’

उन्होंने कहा, "हम मानते हैं कि चुनाव के संचालन से संबंधित कोई भी मुद्दा आईएनसी के उम्मीदवारों की ओर से सक्षम न्यायालय में चुनाव याचिकाओं के माध्यम से पहले ही उठाया गया होगा. फिर भी अगर आपके पास अभी भी कोई मुद्दे हैं, तो आप हमें लिख सकते हैं. आयोग आपसे व्यक्तिगत रूप से मिलने और सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए भी तैयार है. इसके लिए आप सुविधाजनक तारीख और समय चुनाव आयोग के ईमेल के माध्यम से सूचित कर सकते हैं."


‘मैच हारने के बाद रेफरी को दोष देना नई आदत…’

इससे पहले 7 जून को भी चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों पर तंज कसते हुए कहा था कि मैच हारने के बाद रेफरी को दोष देना नई आदत है

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में धांधली का आरोप लगातार राहुल गांधी के द्वारा लगाया जा रहा है. चुनाव आयोग की तरफ से राहुल गांधी के इस आरोप का एक बार पहले भी सिलसिलेवार तरीके से जवाब दिया जा चुका है. इसके बाद एक बार फिर से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को महाराष्ट्र चुनाव में 'हेराफेरी' का बड़ा आरोप लगाया और एक-एक कर बताया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों में कैसे धांधली की गई और बीजेपी को फायदा पहुंचाया गया. 

'चुनाव कैसे चुराया जाए?'

दरअसल, अंग्रेजी अखबार में छपे 'मैच-फिक्सिंग महाराष्ट्र' शीर्षक वाले लेख को राहुल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया. इसमें उन्होंने 'चुनाव कैसे चुराया जाता है?' के नाम से चरणबद्ध तरीके से बताया कि उनके अनुसार इस चुनाव में कैसे यह गड़बड़ी की गई. राहुल गांधी ने एक्स पोस्ट में पर लिखा, 2024 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की एक सुनियोजित योजना थी. उन्होंने ट्वीट में इसके साथ ही आगे यह भी दावा कर दिया कि बीजेपी की नजर अब बिहार विधानसभा चुनाव पर है, जो इस साल के अंत में होने वाला है. राहुल गांधी ने लिखा, महाराष्ट्र में जो मैच-फिक्सिंग हुई, वही अब बिहार में होगी और फिर यह हर उस जगह पहुंचेगी, जहां बीजेपी हार रही है. 

इससे पहले भी राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया गया औऱ कहा गया कि ''मैच हारने के बाद रेफरी को दोष देना अब एक नई और बेतुकी आदत बन चुकी है.'' आयोग ने राहुल गांधी के आरोप को पूरी तरह बेबुनियाद और कानून का अपमान बताया. 

‘इस तरह की भाषा जहर जैसी’
चुनाव आयोग ने इसके साथ ही कहा कि इस तरह की भाषा लोकतंत्र के लिए जहर जैसी है. चुनाव आयोग को बदनाम करना, केवल एक संस्थान पर नहीं बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर हमला है.  

इससे पहले भारतीय निर्वाचन आयोग ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर किए गए "आधारहीन" और "अनुचित" दावों का बिंदुवार जवाब दिया था और वास्तविक तथ्यों को सामने रखा था. 

राहुल गांधी ने अमेरिका में क्या बोला था?
तब राहुल गांधी ने अमेरिका में एक कार्यक्रम में आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता के साथ समझौता किया गया है. उन्होंने अपने दावे के समर्थन में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का तब उदाहरण दिया था. इसका जवाब चुनाव आयोग की तरफ से दिया गया था. 

राहुल गांधी ने तब मतदान के आखिरी दो घंटों में 65 लाख वोट डाले जाने के चुनाव आयोग के ''तर्क'' पर सवाल उठाते हुए इसे ''असंभव'' बताया था.

चुनाव आयोग ने इसके बाद जारी बयान में कांग्रेस सांसद के दावों को खारिज करते हुए महाराष्ट्र चुनाव से जुड़े तथ्य और डेटा साझा किए थे.

आयोग ने तब बताया था कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान सुबह 7 से शाम 6 बजे तक कुल 6,40,87,588 मतदाता मतदान केंद्र पहुंचे और अपने वोट डाले. औसतन प्रति घंटे करीब 58 लाख वोट डाले गए. इन औसत रुझानों के हिसाब से अंतिम दो घंटों में लगभग 116 लाख मतदाताओं का वोट डालना संभव था.

निर्वाचन आयोग ने तब कहा था कि इसके अलावा उम्मीदवारों/राजनीतिक दलों द्वारा औपचारिक रूप से नियुक्त किए गए मतदान एजेंटों के सामने मतदान हो रहा था. कांग्रेस के नामित उम्मीदवारों या उनके अधिकृत एजेंटों ने अगले दिन रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) और चुनाव पर्यवेक्षकों के समक्ष जांच के समय भी किसी तरह के असामान्य मतदान के संबंध में कोई पुख्ता आरोप नहीं लगाए थे.

मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम जोड़े जाने के आरोप पर चुनाव आयोग ने कहा कि महाराष्ट्र सहित देश में मतदाता सूची जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के अनुसार तैयार की गई है. 

नियम के अनुसार, या तो चुनाव से ठीक पहले और/या हर साल एक बार, मतदाता सूची का विशेष सारांश संशोधन किया जाता है और मतदाता सूची की अंतिम प्रति भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सहित सभी राष्ट्रीय/राज्य राजनीतिक दलों को सौंप दी जाती है. 

आयोग ने आगे कहा था कि महाराष्ट्र चुनाव के दौरान मतदाता सूची को अंतिम रूप देने के बाद, 9,77,90,752 मतदाताओं के मुकाबले, प्रथम अपीलीय प्राधिकरण (डीएम) के समक्ष केवल 89 अपील दायर की गई और द्वितीय अपीलीय प्राधिकरण (सीईओ) के समक्ष केवल एक अपील दायर की गई.

आयोग ने तब कहा था कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव, 2024 से पहले कांग्रेस या किसी अन्य राजनीतिक दल की ओर से कोई शिकायत नहीं थी.

चुनाव आयोग ने यह भी कहा था कि उसने 24 दिसंबर 2024 को कांग्रेस को दिए अपने जवाब में ये सभी तथ्य सामने रखे थे, जो चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि इस तरह के मुद्दों को बार-बार उठाकर इन सभी तथ्यों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है.

चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा था, "मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान, 1,00,427 मतदान केंद्रों के लिए ईआरओ द्वारा नियुक्त 97,325 बूथ स्तर के अधिकारियों के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों द्वारा 1,03,727 बूथ स्तर के एजेंट भी नियुक्त किए गए थे, जिनमें कांग्रेस द्वारा 27,099 एजेंट नियुक्त किए गए थे. इसलिए, महाराष्ट्र की मतदाता सूची के खिलाफ उठाए गए ये निराधार आरोप कानून के शासन का अपमान हैं."

आयोग ने गलत सूचना फैलाने के लिए कांग्रेस पार्टी की आलोचना भी की थी और इसे कानून के शासन का अपमान बताया था. उसने बयान में कहा था, "किसी के द्वारा फैलाई जा रही कोई भी गलत सूचना न केवल कानून के प्रति अनादर का संकेत है, बल्कि अपने स्वयं के राजनीतिक दल द्वारा नियुक्त हजारों प्रतिनिधियों को भी बदनाम करती है और लाखों चुनाव कर्मचारियों को हतोत्साहित करती है, जो चुनावों के दौरान अथक और पारदर्शी तरीके से काम करते हैं."

‘एकमात्र उद्देश्य चुनाव आयोग को बदनाम करना’

राहुल गांधी की 'चुनाव आयोग की निष्पक्षता से समझौता' वाली टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए आयोग ने कहा था कि ऐसी टिप्पणियों का उद्देश्य चुनाव आयोग को बदनाम करना है, जो पूरी तरह से बेतुका है.

आयोग की तरफ से पूरी बात क्रमवार रख देने के बाद एक बार फिर से राहुल गांधी ने वही किया जो वह पहले कर चुके थे, उन्होंने एक बार फिर लेख लिखकर महाराष्ट्र चुनाव और चुनाव आयोग दोनों पर सवाल उठाया. जिसका जवाब चुनाव आयोग की तरफ से दिया गया. 

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