Advertisement

एस जयशंकर की कूटनीति के आगे चीन नतमस्तक, भगवान बुद्ध की बात मानने को हुआ तैयार, कहा- ड्रैगन और हाथी का टैंगो...

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर चीन के दौरे पर है. उनकी इस यात्रा का वहां असर भी दिखने लगा है. सीमा विवाद पर भारत को आंख दिखाने वाला ड्रैगन अब भारत से अपने संबंध सुधारने की कोशिश में लगा है.

Author
15 Jul 2025
( Updated: 10 Dec 2025
06:01 AM )
एस जयशंकर की कूटनीति के आगे चीन नतमस्तक, भगवान बुद्ध की बात मानने को हुआ तैयार, कहा- ड्रैगन और हाथी का टैंगो...

एस जयशंकर आज शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए तिआनजिन जाएंगे और इसी दौरान चीन के शीर्ष नेतृत्व से भी मुलाकात करेंगे.

भारत-चीन विकासशील राष्ट्र - चीनी उपराष्ट्रपति

भारत के साथ सीमा विवाद को लेकर लाल आंख दिखाने वाला ड्रैगन अब भगवान बुद्ध की शांति की बात दोहराने लगा है. चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग ने जयशंकर के साथ मुलाकात में कहा कि चीन और भारत दोनों प्रमुख विकासशील राष्ट्र हैं और ‘ड्रैगन और हाथी का टैंगो’ (तालमेल) दोनों देशों के लिए फायदेमंद रहेगा.  

भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने साफ किया कि भारत-चीन संबंधों में निरंतर सुधार ‘आपसी लाभ’ के रास्ते खोल सकता है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भी बैठक के दौरान कहा कि दोनों देशों को संदेह के बजाय आपसी विश्वास, प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग और विरोध के बजाय एक-दूसरे की सफलता में योगदान देने की भावना अपनानी चाहिए.

जयशंकर की यात्रा द्विपक्षीय संबंधों में दूसरा बड़ा पड़ाव 

चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने भारत चीन संबंधों पर लिखे अपने लेख में लिखा. 'जयशंकर की यह यात्रा अक्टूबर 2024 में कज़ान में हुई पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक के बाद द्विपक्षीय संबंधों में दूसरा बड़ा पड़ाव मानी जा रही है.'

चीनी मुखपत्र ने लिखा, ‘पिछले पांच वर्षों में भारत-चीन कूटनीतिक संपर्क न्यूनतम रहे हैं. गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव चरम पर पहुंच गया था, लेकिन अब बीजिंग में इस उच्चस्तरीय दौरे को एक ‘सकारात्मक संकेत’ के तौर पर देखा जा रहा है.

चीनी मुखपत्र में लिखा है कि सीमा पर भरोसे का स्थायी ढांचा, लोगों के बीच संपर्क, शैक्षणिक और थिंक टैंक संवाद को दोबारा शुरू करना ऐसे व्यावहारिक कदम होंगे जो पारस्परिक विश्वास की नींव को मजबूती देंगे.

गेंद दोनों देशों के पाले में - ग्लोबल टाइम्स

अखबार ने लिखा है कि इस समय जब दुनिया एक बार फिर ध्रुवीकृत हो रही है. भारत और चीन का सतत संवाद और परिपक्व कूटनीतिक संपर्क दोनों देशों को न केवल एक-दूसरे को बेहतर समझने में मदद करेगा, बल्कि यह एशिया की स्थिरता और वैश्विक शक्ति संतुलन को भी मजबूत करेगा. जयशंकर की यह यात्रा दोनों देशों के बीच टूटे संवाद को जोड़ने, विश्वास बहाली की दिशा में सार्थक पहल और द्विपक्षीय संबंधों को ‘असामान्य’ स्थिति से ‘सामान्य’ करने का मौका है.

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि अब गेंद दोनों देशों के पाले में है कि वो सहयोग को प्राथमिकता देते हैं या प्रतिस्पर्धा को लेकिन दुनिया उम्मीद कर रही है कि भारत और चीन दोनों, मिलकर, स्थिरता और समावेशी विकास की मिसाल पेश करें.

टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें