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सीएम योगी से 3 साल बाद मिले बृजभूषण शरण सिंह, बंद कमरे में हुई मुलाकात, 2027 चुनाव से पहले कुछ बड़ा होने जा रहा?

सोमवार 21 जुलाई को पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने सीएम योगी से मुलाकात की है. दोनों ही नेताओं की यह मुलाकात 3 साल बाद हुई है. 2027 चुनाव से पहले यूपी की सियायत में इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं.

सीएम योगी से 3 साल बाद मिले बृजभूषण शरण सिंह, बंद कमरे में हुई मुलाकात, 2027 चुनाव से पहले कुछ बड़ा होने जा रहा?

बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 3 साल बाद सीएम योगी से मुलाकात की है. दोनों ही नेताओं के बीच बंद कमरे में करीब आधे घंटे तक बातचीत चली. इस मुलाकात को लेकर यूपी के सियासत में चर्चाएं तेज हो गई है. बता दें कि पिछले कई सालों से दोनों के बीच बातचीत बंद थी, वहीं राजनीति के मंच पर बृजभूषण शरण सिंह सीएम योगी का नाम लेकर नहीं, बल्कि इशारों-इशारों में करारा प्रहार कर रहे थे. ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दोनों ही दिग्गज नेताओं की मुलाकात ने यूपी में कुछ बड़ा होने का इशारा किया है. ऐसे में अवध क्षेत्र में बीजेपी को बड़ी मदद मिल सकती है. इस मुलाकात पर बृजभूषण शरण सिंह का भी बयान सामने आया है. उन्होंने इसे एक शिष्टाचार मुलाकात बताया है. 

सीएम योगी से मुलाकात पर क्या बोले बृजभूषण 

बता दें कि सीएम योगी से मुलाकात के बाद बृजभूषण ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ' कोई खास बात तो नहीं थी, अलबत्ता मुलाकात होना ही खास बात है.' यह मुलाकात ने पूर्वांचल की राजनीति और 2027 के चुनावी समीकरणों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है. 

लंबे समय से बनी हुई थी दूरी

अवध क्षेत्र के कद्दावर नेताओं में शामिल बृजभूषण शरण सिंह और सीएम योगी  काफी लंबे समय से एक-दूसरे से बातचीत नहीं कर रहे थे. दोनों की किसी राजनीतिक मंच पर भी मुलाकात नहीं हुई थी. कई बार बृजभूषण के बयानों से इस बात के कयास भी लगाए जा रहे थे कि वह योगी सरकार से नाराज चल रहे हैं. यही नहीं, बृजभूषण कई बार अपने बयानों से प्रदेश सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. वह सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को छोटा भाई भी बताते नजर आए.

यह मुलाकात 2027 विधानसभा चुनाव के लिए काफी अहम

सीएम योगी से बृजभूषण शरण सिंह की मुलाकात पंचायत चुनाव और फिर वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर काफी अहम मानी जा रही है. बता दें कि बृजभूषण शरण सिंह का पूर्वांचल के कैसरगंज, गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती जैसे कई क्षेत्रों में काफी प्रभाव है. यही वजह है कि उन्हें पूर्वांचल के बड़े नेताओं में गिना जाता है. 

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