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सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, CGHS की जगह आएगी CGEPHIS स्कीम?

जनवरी 2025 में केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग का गठन किया, जिससे न केवल सैलरी और पेंशन बढ़ने की उम्मीदें जगीं, बल्कि CGHS (केंद्रीय स्वास्थ्य योजना) को लेकर भी बड़े बदलाव की चर्चाएं शुरू हो गईं। CGHS की सीमित पहुंच और कमजोर इन्फ्रास्ट्रक्चर को देखते हुए सरकार एक नई हेल्थ इंश्योरेंस योजना CGEPHIS लाने पर विचार कर रही है।

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14 Apr 2025
( Updated: 10 Dec 2025
09:51 PM )
सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, CGHS की जगह आएगी CGEPHIS स्कीम?
जनवरी 2025 की सुबह थी, जब केंद्र सरकार ने एक ऐसा ऐलान किया, जिसने लाखों सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके परिवारों के बीच एक नई उम्मीद जगा दी। सरकार ने आधिकारिक रूप से 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन की घोषणा की। ज़ाहिर है, हर बार की तरह चर्चा फिर शुरू हुई—क्या इस बार सैलरी बढ़ेगी, क्या DA में कोई बड़ा बदलाव आएगा, लेकिन इस बार एक और सवाल बड़ी तेज़ी से सामने आया—क्या CGHS की जगह अब एक नई हेल्थकेयर स्कीम लाई जाएगी?

दरअसल, यह सवाल सिर्फ एक अफवाह या आकांक्षा नहीं है, बल्कि एक ठोस संभावना बन चुकी है। और इसकी जड़ें 6वें और 7वें वेतन आयोग की रिपोर्टों में छिपी हैं, जिन्होंने समय-समय पर CGHS (Central Government Health Scheme) की खामियों की ओर इशारा किया और एक वैकल्पिक हेल्थकेयर मॉडल का सुझाव भी दिया।

CGHS बीते युग की स्वास्थ्य सेवा?

CGHS, यानी केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना, एक पुरानी और भरोसेमंद व्यवस्था रही है, जिसमें केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके परिवारों को सस्ती दरों पर मेडिकल सेवाएं दी जाती हैं। दवा वितरण से लेकर, अस्पतालों में कैशलेस इलाज तक—CGHS एक व्यापक हेल्थ सिस्टम था, लेकिन वक्त के साथ इसकी भौगोलिक सीमाएं, इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी, और धीमी सेवाओं ने इसे एक कमज़ोर सिस्टम बना दिया। आज भी कई कर्मचारी और पेंशनर ऐसे शहरों या कस्बों में रहते हैं, जहां CGHS की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्हें निजी अस्पतालों या डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ता है, और फिर रिइंबर्समेंट की लंबी प्रक्रिया में फंसना पड़ता है। सवाल ये है क्या ये सिस्टम आज की ज़रूरतों को पूरा कर पा रहा है?

6वें वेतन आयोग ने ही सबसे पहले एक वैकल्पिक स्वास्थ्य बीमा योजना (Optional Health Insurance Scheme) का सुझाव दिया था, जिसमें सरकारी कर्मचारी स्वेच्छा से शामिल हो सकते थे। यह स्कीम सरकारी मदद से प्राइवेट हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के जरिए लागू होनी थी। इस सुझाव को व्यापक सराहना तो मिली, लेकिन लागू नहीं किया गया।

7वां वेतन आयोग इस दिशा में और आगे गया। उसने साफ कहा कि CGHS अब पर्याप्त नहीं है और स्वास्थ्य बीमा ही एक लॉन्ग-टर्म समाधान हो सकता है। आयोग ने CGHS, ECHS और CS(MA) जैसी योजनाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर काम करने की बात की और एक ऐसा सिस्टम बनाने की सिफारिश की, जहां हर पेंशनर को देशभर में कैशलेस इलाज मिल सके।

8वां वेतन आयोग, क्या लाएगा नया हेल्थकेयर मॉडल?

2025 में जब 8वें वेतन आयोग का गठन हुआ, तो यह साफ हो गया कि अब केवल सैलरी या पेंशन बढ़ाने की बात नहीं होगी। इस बार सरकार का फोकस ज्यादा व्यापक और दीर्घकालिक है। सूत्रों की मानें तो आयोग के एजेंडे में CGHS को एक नई स्कीम – CGEPHIS (Central Government Employees and Pensioners Health Insurance Scheme) से बदलने पर गंभीरता से विचार हो रहा है।

CGEPHIS एक ऐसा बीमा आधारित मॉडल हो सकता है जो निजी और सरकारी दोनों अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा देगा, और इसमें IRDAI-रजिस्टर्ड इंश्योरेंस कंपनियां जुड़ी होंगी। इसका सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि कर्मचारी किसी भी शहर, गांव या राज्य में हो—उसे इलाज की सुविधाएं उपलब्ध होंगी, और CGHS की सीमाएं खत्म हो जाएंगी।

सरकार की चुप्पी और कर्मचारियों की उम्मीदें

हालांकि अभी तक सरकार ने आधिकारिक रूप से इस नई स्कीम की घोषणा नहीं की है, लेकिन वित्त मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के स्तर पर बैठकों का दौर तेज़ हो गया है। अफसरों का मानना है कि CGHS को 60 सालों बाद रिटायर कर देना चाहिए, और एक ऐसा सिस्टम लाना चाहिए जो तकनीक आधारित, तेज़, पारदर्शी और व्यापक हो।

सरकारी कर्मचारी यूनियनों ने भी इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया है। उनका कहना है कि सरकार अगर नई स्कीम लाती है, तो उसमें कर्मचारियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ न हो, और सभी पेंशनरों को भी समान सुविधा मिले।

क्या बदल जाएगा इलाज का तरीका?

यदि CGEPHIS स्कीम लागू होती है, तो ये कुछ बड़े बदलाव लेकर आएगी। ऑनलाइन क्लेम प्रोसेसिंग, जिससे पेपरवर्क कम होगा। कैशलेस ट्रीटमेंट, जिससे मरीजों को राहत मिलेगी। देशभर के अस्पतालों में कवरेज, जिससे CGHS की सीमाएं खत्म होंगी। रिमोट इलाकों में भी सुविधा, जिससे हर वर्ग को समान लाभ मिलेगा। यह एक ऐसा बदलाव होगा, जो केवल मेडिकल सेवा नहीं बदलेगा, बल्कि सरकारी नौकरी के प्रति लोगों की सोच को भी प्रभावित करेगा।

जब हम आज की हेल्थकेयर ज़रूरतों को देखते हैं डिजिटल इंडिया, टेक्नोलॉजी, और बदलती लाइफस्टाइल के बीच तो साफ समझ आता है कि CGHS अब पुराना मॉडल बन चुका है। इसे बदलने का वक्त आ चुका है। 8वां वेतन आयोग यदि CGEPHIS जैसी स्कीम को हरी झंडी देता है, तो यह सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की हेल्थकेयर को नई दिशा देगा। यह न सिर्फ इलाज की प्रक्रिया को सरल बनाएगा, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर करेगा।
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