भागवत पर अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान, ‘राजनीतिक सुविधा’ के अनुसार बयान देते है...'

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर राजनीतिक सुविधानुसार बयान बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने भागवत के 'मंदिर ढूंढने' वाले बयान की आलोचना की साथ ही, बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार और तोड़े गए मंदिरों के पुनर्निर्माण की मांग की।

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23 Dec 2024
( Updated: 09 Dec 2025
09:26 PM )
भागवत पर अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान, ‘राजनीतिक सुविधा’ के अनुसार बयान देते है...'
कुछ दिनों पहले RSS प्रमुख ने मंदिर-मस्जिद विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने योगी आदित्यनाथ को बिना नाम लिए नसीहत दी तो सियासत गरमा गई, इंटरनेट पर बवाल मच गया। दरअसल मोहन भागवत यूपी में चल रहे मंदिर-मस्जिद विवाद को लेकर कहा था कि कुछ लोग खुद को 'हिंदूओं का नेता' साबित करने की कोशिश में लगे हैं। उन्होंने कहा कि नई जगहों पर मंदिर-मस्जिद विवाद उठाया जाना स्वीकार्य नहीं है। अपने बयान से भागवत ने योगी पर निशाना साधा तो ये बात ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को बर्दाश्त नहीं हुआ, उन्होंने भागवत को घेरे में लिया और उनपर ‘राजनीतिक सुविधा’ के अनुसार बयान देने का आरोप लगा दिया। 


योगी के बचाव में खड़े हुए अविमुक्तेश्वरानंद 


19 दिसंबर को पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान RSS चीफ मोहन भागवत ने मंदिर-मस्जिद विवाद बड़ा बयान दिया था। जिसके बाद अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उन्हें आड़े हाथ लिया है। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जब उन्हें सत्ता प्राप्त करनी थी, तब वह मंदिर-मंदिर करते थे। अब सत्ता मिल गई तो मंदिर नहीं ढूंढने की नसीहत दे रहे हैं। शंकराचार्य ने भागवत के उस बयान पर उनकी आलोचना की है जिसमें उन्होंने कहा था कि हर जगह मंदिर ढूंढ़ने की इजाजत नहीं दी सकती।शंकराचार्य ने आक्रांताओं द्वारा कथित रूप से तोड़े गए मंदिरों की सूची बनाकर उनका पुरातत्व सर्वेक्षण किए जाने और हिंदू समाज के गौरव को फिर से स्थापित किए जाने की भी मांग की। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अतीत में हिंदू समाज के साथ बहुत अत्याचर हुआ है और हिंदुओं के धर्मस्थलों को तहस नहस किया गया है। उन्होंने कहा, “अगर अब हिंदू समाज अपने मंदिरों का पुनरूद्धार कर उन्हें पुनः संरक्षित करना चाहता है तो इसमें गलत क्या है?”
 

मोदी-योगी के खिलाफ भागवत करते रहें है आलोचना!


हाल के दिनों में मोहन भागवत जिस तरह से बयानबाजी कर रहें है उससे ये कहा जाने लगा है कि RSS चीफ को मोदी-योगी और उनके काम करने के तरीको को पसंद नहीं कर रहे है। कभी वो पीएम मोदी को निशाने पर लेते है तो कभी सीएम योगी को। इस बयान से दो दिन पहले ही भागवत ने पुणे से संदेश भेजा कि भगवान बनने की कोशिश ना की जाए। हर इंशान के अंदर ईश्वर होता है। ये बनारस में दिए मोदी के ईश्वरी बयान पर टिप्पणी थी। इससे पहले कई बार भागवत कह चुके है कि लोग अपने आप को भगवान ना माने। इसके अलावा 3 जून 2022 को नागपुर में इतिहास में हुई गलतियों को भुलाकर हिंदुओं को हर मस्जिद के नीचे शिवलिंग नहीं ढूंढना चाहिए।" 

मोहन भागवत के बयान पर भड़कने वाले अविमुक्तेश्वरानंद हिंदुओं और उनकी सुरक्षा को लेकर सजग रहें है। उन्होंने बांग्लादेश में हो रहें हुंदुओं के नरसंहार की भी आलोचना की थी और मोदी सरकार से इसपर कोठर कदम उठाने की मांग की थी। केंद्र की तरफ से कार्रवाई न होने पर सरकार की आलोचना भी कि थी। उन्होंने कहा थि कि भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को वापस भेज देना चाहिए। कुल मिलाकर देखे तो अविमुक्तेश्वरानंद हमेशा से हिंदुओं और सनातन के लिए आवाज उठाते रहें है। एक बर फिर उन्होंने मंदिर-मस्जिद विवाद पर बड़ा बयान दिया है और मोहन भागवत ‘राजनीतिक सुविधा’ के अनुसार बयान देने का आरोप लगाया है। इसपर आपकी क्या राय है कमेंट कर जरूर बताएं। 

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