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बेंगलुरु भगदड़ के बाद कर्नाटक सरकार ला रही 'क्राउड कंट्रोल बिल', उल्लंघन पर होगी 3 साल की सजा और 5 हजार का जुर्माना

बेंगलुरु भगदड़ मामले के बाद कर्नाटक सरकार सख्त मूड में दिखाई दे रही है, घटना को ध्यान में रखते हुए सिद्धारमैया सरकार अब किसी भी तरह के बड़े और प्राइवेट आयोजन के लिए 'क्राउड कंट्रोल बिल 2025' ला रही है. इस बिल को 19 जून को कैबिनेट के बीच पेश किया गया. उम्मीद है कि अगले हफ्ते यह बिल पास हो जाएगा. आखिर कैसे काम करेगा यह बिल और क्या है जेल, जुर्माने का नियम?

बेंगलुरु भगदड़ के बाद कर्नाटक सरकार ला रही 'क्राउड कंट्रोल बिल', उल्लंघन पर होगी 3 साल की सजा और 5 हजार का जुर्माना

4 जून को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की विक्ट्री परेड में हुई भगदड़ के बाद कर्नाटक सरकार एक के बाद एक कई बड़े सख्त फैसले ले रही है. ऐसे में अब किसी भी इवेंट या बड़े कार्यक्रम में भीड़ को कंट्रोल करने में नाकाम होने या किसी तरह की घटना होने पर 3 साल की जेल और 5 हजार का जुर्माना भरना पड़ सकता है. कर्नाटक सरकार जल्द ही 'क्राउड कंट्रोल बिल 2025' ला रही है. यह बिल 19 जून को कैबिनेट में पेश कर दिया गया है. सरकार को उम्मीद है कि अगली बैठक में यह पास भी हो जाएगा. 

क्या है 'क्राउंड कंट्रोल बिल 2025'

कर्नाटक सरकार आरसीबी विक्ट्री परेड के दौरान हुए हादसे के बाद काफी ज्यादा अलर्ट मोड में नजर आ रही है. ऐसे में 'क्राउड कंट्रोल बिल 2025' के जरिए सरकार का उद्देश्य किसी भी बड़े सार्वजनिक आयोजनों को नियंत्रित करना और भविष्य में किसी भी तरह की अव्यवस्था या भगदड़ होने पर उसे रोकना है. हालांकि, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह नियम धार्मिक और पारंपरिक आयोजनों पर लागू नहीं होगा. इनमें प्रदेश में लगने वाले मेले रथ यात्राओं, पालकी उत्सव, नौका महोत्सव और कई अन्य कार्यक्रमों को इस नियम से बाहर रखा गया है. 

इवेंट प्लानर के ऊपर सख्त सजा का प्रावधान 

सरकार के इस बिल के नियमानुसार, इवेंट प्लानर कंपनी या किसी भी आयोजनकर्ता के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान है. जो भी व्यक्ति या कंपनी इसके नियम के विरुद्ध काम करेगा या कानून का उल्लंघन करते पाया जाता है, तो उसे जेल और जुर्माना दोनों की सजा मिल सकती है. मानकों का उल्लंघन करने पर कम से कम 3 साल की जेल और 5000 का जुर्माना लगाया जा सकता है. 

जानें किन कार्यक्रमों में लागू होगा यह नियम

यह नियम खासतौर से इवेंट प्लानर, खेल, सर्कस या कोई अन्य कार्यक्रम आयोजित करने पर लागू होगा. इस तरह का कार्यक्रम बिना पुलिस अनुमति के आयोजित नहीं होगा. भीड़ न संभाल पाने की स्थिति में किसी भी तरह की घटना होने पर आयोजनकर्ता को सजा होगी और उसे किसी की मौत या घायल होने की स्थिति में मुआवजा भी देना होगा. ऐसे हालातों में आयोजकों की भारी लापरवाही मानी जाएगी और इसे गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा. इसकी सुनवाई प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की अदालत में होगी. अगर इस दौरान वह इसकी भरपाई नहीं कर पाते हैं, तो 3 साल की जेल और 5 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. 

कौन होता है इवेंट प्लानर?

इस विधेयक के अनुसार, इवेंट प्लानर उसे माना जाएगा, जो व्यक्तियों का एक समूह होता है. जिनके द्वारा राजनीतिक रैलियों, सम्मेलनों या खेल का आयोजन किया जाता है. ऐसे आयोजनों में लाखों की भीड़ मौजूद होती है. जिसे कई बार अनियंत्रित होते हुए देखा जाता है. सबसे ज्यादा घटना के मौके भी इसी तरह के आयोजन पर बने रहते हैं. 

RCB विक्ट्री परेड के दौरान हुई थी भगदड़

बता दें कि इंडियन प्रीमियर लीग के 18वें सीजन में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम पहली बार चैंपियन बनी थी. उसने 3 जून को हुए फाइनल मुकाबले में पंजाब किंग्स को 6 रनों से हराया था. अपनी पहली आईपीएल ट्रॉफी की जीत के बाद RCB की टीम ने 4 जून को बेंगलुरु में विक्ट्री परेड का प्लान तैयार किया था. यह आयोजन ओपन बस में होना था, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया था. विक्ट्री परेड से पहले ही एक भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई थी. इसमें कई अन्य लोग घायल भी हुए थे. इसके बाद RCB मैनेजमेंट, कर्नाटक क्रिकेट संघ और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अपना पल्ला झाड़ लिया था, लेकिन 5 जून को हाई कोर्ट ने इस मामले में एंट्री मारी और 10 जून तक हादसे की रिपोर्ट मांगी. वहीं इस मामले में RCB के कई अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया गया था. इस हादसे में जान गंवाने वाले परिवार के सदस्यों को कर्नाटक सरकार ने 25 लाख और विनर टीम आरसीबी की तरफ से 10 लाख रुपए बतौर मदद पहुंचाई गई.

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