PCOS सिर्फ शरीर नहीं, दिमाग को भी करता है प्रभावित: अध्ययन

PCOS में हार्मोन का असंतुलन होता है, जो हमारे दिमाग की सतर्कता को कम कर प्रतिक्रिया देने का समय बढ़ा सकता है. PCOS पीड़ित महिलाओं में एंड्रोजन का स्तर बढ़ जाता है, और वो इंसुलिन रेसिस्टेंस भी होती हैं. यह इंसुलिन रेसिस्टेंस भी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है.

PCOS सिर्फ शरीर नहीं, दिमाग को भी करता है प्रभावित: अध्ययन
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) एक हार्मोनल विकार है जो महिलाओं को प्रभावित करता है. PCOS में आमतौर पर अनियमित पीरियड्स, ओवरी में छोटी-छोटी रसौलियों व गांठों के बनने, पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) के बढ़ने की शिकायत की जाती है. इसके शारीरिक लक्षणों, जैसे वजन बढ़ना, मुंहासे और अत्यधिक बाल उगना, इनपर अक्सर चर्चा होती है, लेकिन हाल के अध्ययनों ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि PCOS महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क कार्यप्रणाली पर भी गहरा असर डाल सकता है. यह एक ऐसा पहलू है जिस पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है.

पहले हुए कुछ शोध में पाया गया कि PCOS पीड़ित महिलाएं तनावग्रस्त रहती हैं, वहीं इस नए अध्ययन ने 'ध्यान केंद्रित' करने की जरूरी मानसिक अवस्था का पता लगाया है. अध्ययन में देखा गया कि PCOS से जूझ रही महिलाएं ध्यान केंद्रित करने में काफी संघर्ष करती हैं. ध्यान की कमी से उनकी सोचने, समझने और किसी भी जानकारी को याद रखने की क्षमता पर असर पड़ सकता है. 

महिलाओं के दो समूहों का किया गया अध्ययन


आईआईटी बॉम्बे के साइकोफिजियोलॉजी प्रयोगशाला में काम करने वाली मैत्रेयी रेडकर और प्रोफेसर अजीज़ुद्दीन खान ने महिलाओं के दो समूहों का अध्ययन किया. इसमें PCOS से पीड़ित 101 महिलाओं और पूरी तरह से स्वस्थ 72 महिलाओं को शामिल किया गया. 

टीम ने अध्ययन शुरू करने से पहले दोनों समूहों की महिलाओं के हॉर्मोन की जांच की. इसके बाद उन्होंने सभी महिलाओं से 'ध्यान केंद्रित करने से जुड़ी कुछ गतिविधियां' करवाईं. इस दौरान उन्होंने पाया कि PCOS पीड़ित महिलाएं स्वस्थ महिलाओं की तुलना में देर से रिएक्ट कर रही थीं. उनका ध्यान जल्दी भटक जाता था.

अध्ययन में यह पाया गया कि जब PCOS वाली महिलाओं को ध्यान केंद्रित करने वाला टेस्ट दिया गया, तो उन्होंने जवाब देने में 50 प्रतिशत ज्यादा समय लिया और करीब 10 प्रतिशत ज्यादा गलतियां कीं.

अध्ययन का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर खान ने कहा, ''यह प्रयोग ऐसे टेस्ट पर आधारित है जो बहुत ही छोटे-छोटे समय यानी मिलिसेकंड्स को भी मापते हैं कि कोई व्यक्ति किसी खास संकेत पर कैसे और कितनी जल्दी प्रतिक्रिया देता है. ये छोटे-छोटे फर्क जो हम आमतौर पर नोटिस नहीं कर पाते, बड़ी कमी को दिखाते हैं. यह कमी हमारे दैनिक जीवन में काम करने की क्षमता पर भी असर डाल सकती है."

शोधकर्ताओं ने बताया कि PCOS में हार्मोन का असंतुलन होता है, जो हमारे दिमाग की सतर्कता को कम कर प्रतिक्रिया देने का समय बढ़ा सकता है. PCOS पीड़ित महिलाओं में एंड्रोजन का स्तर बढ़ जाता है, और वो इंसुलिन रेसिस्टेंस भी होती हैं. यह इंसुलिन रेसिस्टेंस भी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. 

क्या है इंसुलिन रेसिस्टेंस?


इंसुलिन रेसिस्टेंस होने का मतलब है कि शरीर ग्लूकोज को ठीक से नहीं पचा पाता, तो दिमाग के सेल्स को भी कम ऊर्जा मिलती है. दिमाग के सेल्स जब ठीक से काम नहीं करते, तो हमारी ध्यान लगाने और सोचने की क्षमता कमजोर हो जाती है. 

PCOS केवल शारीरिक लक्षणों से कहीं अधिक है; यह एक ऐसी स्थिति है जो महिला के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है. मस्तिष्क पर इसके प्रभावों को समझना और उनका समाधान करना बेहतर जीवन गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण है.

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