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एक साइंस जो लोगों को बनाती है जवान, लाखों लोग है इसके दिवाने… पर अब यही बन रही मौत का कारण! जानिए एंटी-एजिंग दवाओं के बारे में सबकुछ

शेफाली जरीवाला की मौत की वजह क्या एंटी-एजिंग दवाएं हैं? आखिर क्या होती हैं ये एंटी-एजिंग दवाएं, और कैसे करती हैं ये काम कि मौत जैसी गंभीर आशंका तक की बात कही जा रही है? जानिए पूरी जानकारी.

एक साइंस जो लोगों को बनाती है जवान, लाखों लोग है इसके दिवाने… पर अब यही बन रही मौत का कारण! जानिए एंटी-एजिंग दवाओं के बारे में सबकुछ

शेफाली जरीवाला का शुक्रवार को 42 साल की उम्र में निधन हो गया. शुरुआती रिपोर्ट्स में कार्डियक अरेस्ट को प्रमुख कारण बताया गया. लेकिन अब सवाल एंटी एजिंग दवाओं पर उठने लगा है. सवाल ये कि क्या ये इतनी खतरनाक हैं? सवाल ये कि क्या ये जानलेवा हो सकती हैं?

बता दें कि अभिनेत्री और मॉडल शेफाली जरीवाला का शुक्रवार को 42 साल की उम्र में निधन हो गया. मुंबई स्थित कूपर हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने शव का परीक्षण किया. रिपोर्ट्स को सार्वजनिक नहीं किया गया है. शेफाली जरीवाला की अचानक हुई मौत की जांच में कुछ अहम बातें सामने आई हैं. कहा जा रहा है कि शेफाली कई वर्षों से एंटी-एजिंग दवाइयां ले रही थीं. खबर आई है कि 27 जून को परिवार ने घर में धार्मिक पूजा रखी थी, इसे लेकर शेफाली ने पूरे दिन व्रत रखा था. फिर उन्होंने दोपहर में कथित तौर पर एंटी-एजिंग दवा का इंजेक्शन ले लिया, शायद इसी वजह से ऐसा गंभीर असर हुआ की उनकी जान चली गई. 

छानबीन में पता चाल है कि करीब 8 साल से वह इस तरह के इंजेक्शन और दवाएं ले रही थीं. अधिकारियों को संदेह है कि उपवास के दौरान लिए गए इंजेक्शन की वजह से ही कार्डियक अरेस्ट आया होगा. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की सही वजह पता चल पाएगी. ऐसे में अब सवाल उठने लगा है कि एंटी-एजिंग दवाएं क्या इतनी खतरनाक हैं? क्या ये जानलेवा हो सकती हैं?

क्या है एंटी-एजिंग दवाएं?
एंटी-एजिंग दवाएं (Anti-Aging Medicines) वे दवाएं, सप्लिमेंट्स या उपचार हैं जिन्हें उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने, उम्र से जुड़ी बीमारियों को रोकने या शरीर को अधिक युवा बनाए रखने के लिए उपयोग किया जाता है. ये दवाएं अक्सर त्वचा, मस्तिष्क, मांसपेशियों, और हॉर्मोनल हेल्थ पर असर डालने का दावा करती हैं. 

कैसे काम करती है एंटी-एजिंग दवाएं?
मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, एंटी-एजिंग उत्पादों में आमतौर पर रेटिनॉल और पेप्टाइड्स जैसे सक्रिय यौगिक (active compounds) शामिल होते हैं, जो झुर्रियों को कम करने, त्वचा की बनावट में सुधार लाने और त्वचा को अधिक युवा दिखाने में सहायक माने जाते हैं.
हालांकि, कई शोधों में यह भी पाया गया है कि रेटिनॉल के उपयोग से त्वचा में सूखापन, जलन, लालिमा, और सूर्य के प्रति संवेदनशीलता जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
इसके अतिरिक्त, कुछ एंटी-एजिंग उत्पादों में प्रयुक्त रसायन शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे दीर्घकालिक और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.

क्या है विशेषज्ञों की राय?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एंटी-एजिंग से जुड़े उत्पादों का सेवन प्राकृतिक स्रोतों से ही किया जाना चाहिए. उनका कहना है कि दवाओं या इंजेक्शन के रूप में इनका इस्तेमाल करने से शरीर पर कई प्रकार के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं. इसलिए उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और प्राकृतिक तरीकों को अपनाना ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि एंटी-एजिंग उत्पादों का दिल (हृदय) पर असर होना बहुत ही दुर्लभ होता है और आमतौर पर ऐसा कोई मामला देखने को नहीं मिलता. लेकिन अगर कोई व्यक्ति हॉर्मोनल थेरेपी ले रहा है, तो उसके कुछ दुष्प्रभाव हृदय की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे मामलों में सावधानी बरतना और डॉक्टर की निगरानी में इलाज कराना ज़रूरी होता है.

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कुछ मामलों में एंटी-एजिंग दवाएं शरीर के प्राकृतिक कामकाज को प्रभावित कर सकती हैं. हो सकता है कि आपकी त्वचा तो जवान और चमकदार दिखे, लेकिन अंदरूनी अंगों की उम्र बढ़ती रहती है. ऐसे में अगर आप सिर्फ बाहरी लुक पर ध्यान दें और शरीर की अंदरूनी समस्याओं को नजरअंदाज करें, तो आगे चलकर गंभीर दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं. इसलिए एंटी-एजिंग का इस्तेमाल सोच-समझकर और पूरे शरीर के संतुलन को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए.

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