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'यमुना मैया तूने क्या किया...', प्रेमानंद महाराज नाव पर सवार होकर बाढ़ का जायजा लेने निकले, वृंदावन का हाल देख हुए भावुक

प्रेमानंद महाराज ने लगभग 2 घंटों तक बाढ़ का जायजा लेते हुए भावुक होकर कहा कि यमुने तूने क्या कर दिया. वहीं बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री भी बांटी.

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09 Sep 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:24 AM )
'यमुना मैया तूने क्या किया...', प्रेमानंद महाराज नाव पर सवार होकर बाढ़ का जायजा लेने निकले, वृंदावन का हाल देख हुए भावुक
Premanand Maharaj

इन दिनों उत्तर प्रदेश के मथुरा और वृंदावन में यमुना नदी का जल स्तर खतरे के निशान से भी ऊपर पहुंच गया है. पूरे शहर में बाढ़ का कहर देखने को मिल रहा है. कुछ इलाकों में तो खेत, घर-मकान और मंदिर तक डूबता हुआ नजर आ रहा है. इस वजह से लोगों को बहुत परेशानियां हो रही हैं यहां तक कि कुछ लोग तो पलायन करने पर भी मजबूर हो गए. हालांकि प्रशासन भी एक्टिव नजर आ रहा है लेकिन लोगों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं. इसी बीच वृंदावन के ही महान संत प्रेमानंद महाराज जी बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे. 

आमतौर पर अपनी कुटिया से बाहर न आने वाले प्रेमानंद महाराज जब इस बाढ़ का जायजा लेने के लिए एक स्टीमर में सवार होकर यहां पहुंचे तो ये खबर सुर्खियों में बन गई. लोग उनके इस कदम की सराहना करने लगे.

वृंदावन वासियों का प्रेमानंद महाराज ने बढ़ाया हौसला

प्रेमानंद महाराज ने लोगों का इस मुश्किल समय में हौसला भी बढ़ाया. महाराज जी ने बाढ़ से जूझ रहे लोगों से कहा कि ‘इस आपदा को वे ईश्वरीय प्रकोप न मानें बल्कि इसे प्रकृति का ही हिस्सा समझें. इस कठिन समय में सभी को धैर्य और साहस के साथ ही काम लेना चाहिए’. इस दौरान उनके शिष्य भी उन्हीं के साथ नाव में उपस्थित रहे.

2 घंटे तक लिया बाढ़ का जायजा

इसके अलावा बता दें कि प्रेमानंद महाराज ने लगभग 2 घंटों तक बाढ़ का जायजा लेते हुए भावुक होकर कहा कि यमुने तूने क्या कर दिया. वहीं बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री भी बांटी और इस दुखद घड़ी में उनका साथ देते हुए कहा कि वृंदावन वासी श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त हैं और हम खुद राधा रानी को मानते हैं. ऐसे भक्तों को दुख देना सही नहीं है.

बाढ़ को देख भावुक हुए प्रेमानंद महाराज ने लोगों से की अपील 

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प्रेमानंद महाराज ने बाढ़ को देखते हुए आगे कहा कि इस समय हमारे देश में विपदा चल रही है. बहुत जगह बाढ़ आ रही है. वृंदावन में हजारों लोग भूखे हैं. न तो साफ पानी है. न खाने का सामान है. न बिजली है. ऐसे में हम लोगों को मिलकर इस विपदा के समय में सहयोग करना चाहिए. मनुष्य जीवन तभी सार्थक है, जब हमारे द्वारा किसी का मंगल हो. इसलिए हमारे संतजन नाव के जरिए राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं.

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