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देश के चर्चित मौलाना साजिद रशीदी को भारत माता की जय बोलने आख़िर परहेज़ क्यों ?

भारत माता की जय से मौलाना का परहेज़ क्यों ? भारत माता की जय से मौलाना को ऐतराज क्यों ? भारत माता की जय से मज़हबी कनेक्शन क्यों ? 53 सैकेंड के वीडियो का सच क्या है ?

देश के चर्चित  मौलाना साजिद रशीदी को भारत माता की जय बोलने आख़िर परहेज़ क्यों ?

भारत में रहना तो है, लेकिन भारत माता की जय से ऐतराज है ? क्यों ? क्योंकि ये मज़हबी नारा है ? इसी सोच के साथ ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन’ के मौलाना साजिद रशीदी का एक वीडियो पिछले दिनों सोशल मीडिया पर आया, और पलक झपकते वायरल हो गया।53 सैकेंड के इस वीडियो में मौलाना रशीदी ने भारत माता की जय को संघी सोच बताया बच्चों से इसके ख़िलाफ़ मुखालफत करने को कहा…टीचरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की माँग की। भारत माता की जय को मज़हबी रंग दे दिया। मौलाना रशीदी को भारत माता की जय से किस बात की चिढ़ है ? क्या है ये पूरा मामला, ये समझने से पहले उनका 53 सैकेंड का ये पूरा वीडियो देख लीजिये। 

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ये वहीं मौलाना रशीदी हैं, जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के विरोध में ये तक बयान दे दिया था कि मंदिर तोड़ कर भविष्य की मुस्लिम पीढ़ियाँ मस्जिद बना देंगी। वक़्फ़ बोर्ड की असीमित ताक़त को कंट्रोल करने के लिए सरकार जब बिल लाई, इसका इन्होंने पुरज़ोर विरोध किया। योगी सरकार में मदरसा सर्वे का इन्होंने विरोध किया। विवादित बयान दिया कि सर्वे के लिए आने वाले कर्मचारियों का स्वागत चप्पल से किया जाएगा। सोमनाथ मंदिर के ख़िलाफ़ जहर उगला था। खुलकर कहा था कि गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को तोड़कर सही किया था, क्योंकि मंदिर में आस्था के नाम पर गलत काम हो रहे हैं और लड़कियों को गायब किया जा रहा है।हालाँकि उनके इसी बयान के ख़िलाफ़ जब FIR दर्ज हुई, फिर माफ़ी माँगने लगे। कई दफ़ा कई मौक़ों पर मौलाना रशीदी कुछ इसी तरह के विवादित बयान दे चुके हैं। अपनी कट्टरपंथी सोच का परिचय दे चुके हैं और अब भारत माता की जय को मज़हबी नारा बता रहे हैं। तर्क दे रहे हैं कि अल्लाह के अलावा किसी की इबादत नहीं करते हैं, लेकिन यहाँ किसी की पूजा या फिर इबादत करने की बात नहीं है। सनातन धर्म ग्रंथों में भारत माता की जय कहीं नहीं है। इस्लाम में माँ के क़दमों में जन्नत बताई गई है, और आज जब इसी माँ की जय-जय कार हो रही है, तो उसे ये हराम बता रहे हैं। आप और हम , जिस नये भारत की नई तस्वीर की कल्पना करते हैं, उसमें मौलाना रशीदी की सोच कहीं तक सही है ?

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