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जगन्नाथ पुरी धाम से मिले किसके अंत का संकेत, जानिए किसका होने वाला हैं सर्वनाश ?

आपका ये जानना बहुत ज़रूरी है कि जंग के इन हालातों का संकेत 38 दिन पहले ही मिल चुके थे, जिसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया. 14 अप्रैल के दिन प्रभु जगन्नाथ के बैकुंठ लोक जगन्नाथ पुरी धाम में अचंभित कर देने वाला कुछ ऐसा दिखा, जिसके बाद से यही चर्चा होने लगी थी कि अब कौन सा तूफ़ान अपने पीछे बर्बादी लेकर आ रहा है? किस प्रकार से चील के उड़ते ही जगन्नाथ पुरी धाम से युद्ध के संकेत मिल चुके थे.

जगन्नाथ पुरी धाम से मिले किसके अंत का संकेत, जानिए किसका होने वाला हैं सर्वनाश ?
जब-जब नाथों के नाथ प्रभु जगन्नाथ की चौखट से अप्रिय घटनाएँ सामने आई, विश्व ने ख़ुद को विपदा में पाया. आज अगर भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे माहौल है. वार-पलटवार के बीच दोनों मुल्क एक दूसरे पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं, ऐसे में आपका ये जानना बहुत ज़रूरी है कि जंग के इन हालातों का संकेत 38 दिन पहले ही मिल चुके थे, जिसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया। 14 अप्रैल के दिन प्रभु जगन्नाथ के बैकुंठ लोक जगन्नाथ पुरी धाम में अचंभित कर देने वाला कुछ ऐसा दिखा, जिसके बाद से यही चर्चा होने लगी थी कि अब कौन सा तूफ़ान अपने पीछे बर्बादी लेकर आ रहा है ?  किस प्रकार से चील के उड़ते ही जगन्नाथ पुरी धाम से युद्ध के संकेत मिल चुके थे. 


अतीत आज भी इस बात की गवाही देता है कि जब-जब प्रभु जगन्नाथ की धरा पर अप्रिय घटनाएँ हुई, तो इसके पीछे के छुपे संकेतों ने आम जनमानस को आने वाले ख़तरे से आगाह किया. प्रभु जगन्नाथ की इसी धरातल पर 600 वर्ष पूर्व लिखा गया भविष्य मालिका आज भी अपने में भविष्य की कई घटनाओं को समेटे हुए है. संत अच्युतानंदन दास महाराज द्वारा भविष्य मालिका में इस बात का ज़िक्र है कि जब मंदिर में रक्त गिरेगा, ध्वज खंडित होगा गुंबद से पत्थर गिरेंगे तब समझना होगा कि अंत निकट है और दुनिया ख़ुद को महायुद्ध के मुहाने पर खड़ी पायेगी. जगन्नाथ पुरी धाम से जुड़ी अतीत की एक-एक घटना को आज याद किया जाएगा, जब प्रभु जगन्नाथ ने ख़ुद से भविष्य में आने वाली तबाही का संकेत दिया. 

मई 2019 इसी समय में चक्रवाती तूफ़ान के चलते मंदिर का शिखर ध्वज समुद्र में जाकर गिरा था, इसके बाद मई 2020 में भी शिखर ध्वज मंदिर के गुंबद से निकल गया और फिर साल 2020 में बिजली गिरने के चलते मंदिर के ध्वज में आग लगी थी. बैक टू बैक, इन अप्रिय घटनाओं ने अशुभता का संकेत दिया, परिणाम वश 2019 के अंत तक कोरोना का प्रकोप फैलने लगा और 2020-21 में कोरोना का प्रचंड रूप पूरी दुनिया ने देखा, एक ऐसी महामारी जो करोड़ों ज़िंदगी निगल गई.

इसी अंतराल में मंदिर के शिखर पर और एकाश्म स्तंभ पर गिद्ध पक्षी बैठा, मान्यता यही कहती आई, कि शिखर के आसपास ना ही कोई पक्षी उड़ता है और ना ही कोई प्लेन यहाँ से होकर उड़ता है, जबकि 2021 में ही गिद्ध, चील और बाज जैसे पक्षी मंदिर के गुंबद पर बैठे हुए कई दफ़ा दिखे, जिसके चलते कोरोना का प्रकोप पूरे देश को झेलना पड़ा. इसके बाद मंदिर के गुंबद से पत्थर गिरने की घटना सामने आई, मंदिर परिसर में खून के धब्बे मिले..और फिर जब मंदिर का नीलचक्र हवा से टेड़ा हुआ, उसके बाद ही समुद्री तूफ़ान फनी ने भारत में आतंक बताया. बीते दिनों 14 अप्रैल में चील रहस्यमय तरीक़े से जगन्नाथ मंदिर के गुंबद  पर लहराता पवित्र घ्वज को उठा ले गई. आसमान में मँदिर ध्वज को चील के माध्यम से समुद्री की ओर जाते हुए देखा गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल भी हुआ था.  इसी तरह चील द्वारा शिखर ध्वज को अपने संग ले जाना अशुभता का संकेत माना गया. लोगों के मन में किसी बड़ी तबाही के होने की चिंता सताने लगी और ठीक इसके एक हफ़्ता बाद 22 अप्रैल के दिन पहलगाम आतंकी हमला हो गया, जिसमें आतंकियों ने धर्म पूछकर 26 पर्यटकों को गोली से भून दिया, हालाँकि ऑपरेशन सिंदूर से बदला लिया जा चुका है लेकिन जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान द्वारा जो अटैक हो रहे हैं, उसे देखते हुए मन में बस यही सवाल है कि क्या अभी भी कुछ और बड़ा भयावह होना बाक़ी है ? 

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