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बेजान दारुवाला की ज़िंदा हुई भविष्यवाणियों में पीएम मोदी का सुरक्षा कवच क्या है?

क्या आप जानते हैं, विश्व की कोई भी ताक़त पीएम मोदी से टकराने की हिम्मत क्यों नहीं करती है? पीएम मोदी के दुश्मन अपने आप ही मिट्टी में कैसे मिल जाते हैं ? पीएम मोदी की नीयती में साल 2045 तक क्या कुछ होना लिखा है ? इसको लेकर एक बार भारत के नास्त्रेदसम बेजान दारुवाला की भविष्यवाणियों को क्यों खंगाला जा रहा है ?

बेजान दारुवाला की ज़िंदा हुई भविष्यवाणियों में पीएम मोदी का सुरक्षा कवच क्या है?

चार बार युद्ध के मैदान में मुँह की खानी के बाद भी पाकिस्तान ना कभी सुधरा और ना ही अपनी नापाक साज़िशों से बाज आया, तभी तो आतंक की आड़ में पिछले 78 वर्षों से भारत को चोट पहुँचाने की कोशिश करता आया है..ताज़ा उदाहरण पहलगाम आतंकी हमला है, जिसमें आतंकियों ने धर्म पूछकर हिंदू पर्यटकों को अपना निशाना बनाया था. हालाँकि पाकिस्तान में घुसकर ऑपरेशन सिंदूर के रास्ते बदला लिया जा चुका है. सोचने वाली बात ये कि पाकिस्तान ने आतंक के सहरे भारत को ज़ख़्म देकर पीएम मोदी को झुकाने की साज़िशें तो बहुत की,  लेकिन  पीएम मोदी ने ना कभी झुकना सीखा और ना ही रुकना. तभी तो जब-जब पाकिस्तान ने अपनी औक़ात दिखाई है, पीएम मोदी ने ईंट का जवाब पत्थर से दिया है. लेकिन क्या आप जानते हैं, विश्व की कोई भी ताक़त पीएम मोदी से टकराने की हिम्मत क्यों नहीं करती है? पीएम मोदी के दुश्मन अपने आप ही मिट्टी में कैसे मिल जाते हैं? पीएम मोदी की नीयती में साल 2045 तक क्या कुछ होना लिखा है? इसको लेकर एक बार भारत के नास्त्रेदसम बेजान दारुवाला की भविष्यवाणियों को क्यों खंगाला जा रहा है ? 

आज भी अगर आप भारत के नास्त्रेदसम को ढूँढेंगे तो एक ही नाम लोगों की ज़ुबान पर मिलेगा. ज्योतिषी बेजान दरुवाला अहमदाबाद में एक ईसाई परिवार में जन्मे, बेजान दारुवाला ने अंग्रेज़ी में पीएचडी की बतौर प्रोफ़ेसर कॉलेज में पढ़ाया. लेकिन क़िस्मत ने उन्हें ज्योतिष की दुनिया से इस कदर जोड़ा कि आगे चलकर पूरी दुनिया उन्हें भारत का नास्त्रेदमस बुलाने लगी. जो कि बचपन से ही भगवान श्री गणेश में उनकी आस्था, इस कारण ज्योतिष में उनकी दिलचस्पी बढ़ती गई. वैदिक ज्‍योतिष, नयूमेरोलॉजी और हस्‍त रेखा समेत ज्‍योतिष की विभिन्न विधाओं का उन्होंने गहन अध्ययन किया और जैसे-जैसे उन्होंने ज्योतिष के माध्यम से लोगों का भविष्य बताना शुरु किया. उनकी हर एक बता सत्य होने लगी. संजय गांधी की मौत की भविष्यवाणी हो, इंदिरा गांधी की हत्या हो कारगिल युद्ध या फिर गुजरात भूकंप इन घटनाओं का संकेत समय से पहले बेजान दारुवाला ने दिये जो बाद में सत्य हुए और पीएम मोदी के मामले में उनके हाथों की लकीरों को पढ़कर जितनी बातें कही जितनी भविष्यवाणियाँ की वो आज की डेट में सत्य निकल रही हैं. भविष्यवाणियों के सत्य होने की वजह से दारुवाला ज़िंदा हो गये हैं. 

अपनी सटीक भविष्यवाणियों को लेकर बेजान दारुवाला ख़ुद ये बताते थे कि अगर उनके सामने कोई शख्स होता था तो वह पहले उसे अच्छी तरह देखते थे और उससे उन्हें वाइब्रेशन मिलती थी. फिर वह टाइमिंग पर ध्यान देते थे. तीसरा वह देखते थे कि दिन अच्छा, बुरा या उदासीन में से क्या है.  कहते हैं दारुवाला जी का भविष्यवाणी करने का तरीक़ा अन्य ज्योतिषों से बिलकुल अलग होता था. पहले वो ख़ुद हाथ की रेखाओं पर गौर करते थे. इसके बाद भारतीय राशिफल और सबसे अंत में पश्चिमी राशिफल पर नजर डालते थे. ये सारी गणना वह अपने दिमाग में ही करते थे. सारी गणना करने के बाद वह भगवान गणेश की तरफ देखकर भविष्यवाणी कर देते थे. ज्योतिष विद्या में माहिर बेजान दारुवाला को जब पहली दफ़ा पीएम मोदी की हथेली की लकीरों को पढ़ने का मौक़ा मिला. तो उन्होंने अपनी इसी कला के बल पर पीएम मोदी के भविष्य में झांक लिया था. 

ये बात उन दिनों की है जब एक निजी कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए बेजान दारूवाला ने मीडिया को ये बात बताई कि प्रधानमंत्री मोदी ताकतवर हैं, मगर उनकी पार्टी कमजोर है, जिससे आने वाले समय में मोदी को परेशानी हो सकती है. ऐसा दावा किया जाता है कि दारुवाला ने पीएम मोदी का हाथ देखा था और हथेली की लकीरों का विश्लेषण करते हुए ये दावा किया था कि पीएम मोदी के हाथ की लकीरें नहीं है, मगर पर्वत है. यही पर्वत मोदी को ताकतवर बनाती है।और पीएम मोदी का विकास का मुद्दा सुपर-डुपर हिट रहेगा और वह उन्हें ऊंचाई पर ले जाएगा. वर्षों पुरानी बेजान दारुवाला जी की इन्हीं भविष्यवाणियों में पीएम मोदी का सुरक्षा कवच आज की डेट में उनकी सबसे बड़ी ढाल बन चुकी है, जिससे टकराना ख़ुद के लिए मौत बुलाने जैसा है. 

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