Vinayaka Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रमा का दर्शन क्यों नहीं करना चाहिए?
Vinayaka Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन को अशुभ माना जाता है, और इसके पीछे एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा भी सुनने को मिलती है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण पर झूठा आरोप लगाया गया था। अब क्या है गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को न देखने का कारण, आइए जानते है।
06 Sep 2024
(
Updated:
11 Dec 2025
07:16 AM
)
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Vinayaka Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी जिसे विनायक चतुर्थी या गणेशोत्सव भी कहा जाता है, इस साल यह बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ 7 सितंबर को मनाई जाएगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन चन्द्रमा का दर्शन करना बेहद अशुभ माना जाता है? जी हां, अब आप सोच रही होंगे कि यह हम क्या कह रहे हैं लेकिन यह बिल्कुल सत्य है दरअसल इस मान्यता के पीछे कई पौराणिक कथा और धार्मिक कारण जुड़े हुए हैं। जिसकी वजह से इस दिन चंद्रमा का दर्शन करना बेहद अशुभ जाता फल देने वाला होता है। आइए इस लेख के जरिए इस रहस्य को समझने की कोशिश करते हैं।
गणेश जी का चन्द्रमा को श्राप
दरअसल गणेश चतुर्थी पर चन्द्रमा का दर्शन ना करने की मान्यता का आधार पौराणिक कथा है। कहां जाता है कि एक बार भगवान गणेश मोदक खा रहे थे। गणेश जी को मोदक बेहद प्रिय थे, ऐसे में उन्होंने अधिक मात्रा में मोदक खा लिए, जिसके कारण उनका पेट फूल गया। और इसी अवस्था में वह अपने वाहन मूषक पर बैठकर जाने लगे, की तभी रास्ते में अचानक मूषक का संतुलन बिगड़ गया और गणेश जी गिर पड़े। कहते है कि उसे दौरान चन्द्रमा गणेश जी की इस स्थिति को देखकर जोर जोर से हंसने लगे।

चन्द्रमा का इस तरह हंसना गणेश जी को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा और उन्होंने गुस्से में आकर चन्द्रमा को श्राप दे दिया कि जो भी व्यक्ति चन्द्रमा को देखेगा, उस पर झूठा कलंक लगेगा। कहते हैं इस श्राप के बाद, चन्द्रमा ने गणेश जी से माफी मांगी और अपने कृत्य के लिए खेद प्रकट किया। पर कहते हैं कि हमारे गणपति बप्पा का हृदय बेहद कोमल था, और इसीलिए उन्होंने चन्द्रमा को माफ करते हुए श्राप का प्रभाव सिर्फ गणेश चतुर्थी के दिन तक सीमित कर दिया। उन्होंने कहा कि इस दिन जो भी चन्द्रमा को देखेगा, उसे झूठा आरोप और बदनामी सहनी पड़ेगी, और यह कथा केवल कहने भर को नहीं है। दरअसल द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण को भी यह श्राप झेलना पड़ा था। पौराणिक कथा के अनुसार बताया जाता है कि स्यमंतक मणि सूर्य देवता की ओर से उनके भक्त, राजा सत्यभामा के पिता, सत्यजीत को दी गई थी। इस मणि की विशेषता थी कि यह जिसके पास भी रहती, उसे सोने का अपार भंडार मिल जाता था। एक बार यह मणि सत्यजीत से खो गई और इसके गायब होने का आरोप भगवान श्रीकृष्ण पर लगाया गया।
कहते है कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करने के कारण ही श्रीकृष्ण पर चोरी का आरोप लगा। हालांकि जब श्रीकृष्ण पर चोरी का आरोप लगा, तो उन्होंने अपनी सच्चाई साबित करने के लिए मणि की खोज शुरू की, और उसे ढूंढ कर राजा सत्यजीत को वापस लौटकर खुद को निर्दोष साबित किया।
चन्द्र दर्शन के दोष से मुक्ति
गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रमा के दर्शन से बचने का विशेष कारण यही है कि इस दिन चन्द्रमा का दर्शन व्यक्ति को अनचाहे विवादों और आरोपों में फंसा सकता है। इसी मान्यता के अनुसार, लोग इस दिन रात के समय चन्द्रमा के उदय होने से पहले ही अपनी गणेश पूजा समाप्त कर लेते हैं। यह भी माना जाता है कि यदि भूलवश किसी ने चन्द्रमा का दर्शन कर लिया, तो उसे ‘स्यमंतक मणि’ की कथा जरूर सुननी चाहिए। कहते है कि इस कथा को सुनने से चन्द्रमा दर्शन का दोष समाप्त हो जाता है।
आपको बता दें कि इस साल गणेश चतुर्थी 7 सितंबर को मनाई जाएगी। यह त्योहार भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में 10 दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान भक्त बड़ी श्रद्धा से भगवान गणेश की मूर्तियों को अपने घरों में लाते हैं और उनका स्वागत करते हैं।
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