लग्जरी लाइफ, मनचाहा साथी और सुकून पाने के लिए जरुर रखें शुक्रवार का व्रत, जानें पूजा विधि और महत्व

अगर आप धन-संपत्ति, सुख-शांति और लग्जरी लाइफ पाना चाहते हैं तो शुक्रवार का व्रत आपको जरूर करना चाहिए. क्योंकि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्रवार का व्रत शुक्र ग्रह को मजबूत करता है. जो आपको लाइफ में सफलता दिलाने में मदद करता है. इसके अलावा अगर आपके वैवाहिक जीवन में परेशानियां आ रही हैं तो भी आप इस व्रत को रख सकते हैं. व्रत से जुड़ी हर जानकारी जानिए.

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30 Oct 2025
( Updated: 10 Dec 2025
11:27 AM )
लग्जरी लाइफ, मनचाहा साथी और सुकून पाने के लिए जरुर रखें शुक्रवार का व्रत, जानें पूजा विधि और महत्व

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि शुक्रवार सुबह 10 बजकर 3 मिनट तक रहेगी. इसके बाद दशमी तिथि शुरू हो जाएगी. इस दिन सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा मकर राशि में सुबह 6 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. इसके बाद कुंभ राशि में गोचर करेंगे. द्रिक पंचांग के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 42 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय सुबह 10 बजकर 41 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 4 मिनट तक रहेगा. इस तिथि पर कोई विशेष त्योहार नहीं है, लेकिन वार के हिसाब से आप शुक्रवार का व्रत रख सकते हैं.

क्यों जरुरी होता है शुक्रवार का व्रत? 

ब्रह्मवैवर्त पुराण और मत्स्य पुराण में शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी, संतोषी और शुक्र ग्रह की अराधना करने के लिए बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से सुख, समृद्धि, धन-धान्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर सभी कष्ट दूर होते हैं और माता रानी भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं.

कब और कैसे शुरु करें शुक्रवार का व्रत?

ज्योतिष शास्त्र में यह व्रत शुक्र ग्रह को मजबूत करने और उससे जुड़े दोषों को दूर करने के लिए भी रखा जाता है. अगर कोई भी जातक व्रत को शुरू करना चाहता है, तो किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले शुक्रवार से कर सकता है. आमतौर पर 16 शुक्रवार तक व्रत रखने के बाद उद्यापन किया जाता है.

किस तरह करें शुक्रवार को माता लक्ष्मी की पूजा?

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सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें. लाल कपड़े पर माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. दीप जलाएं और फूल, चंदन, अक्षत, कुमकुम और मिठाई का भोग लगाएं. ‘श्री सूक्त’ और ‘कनकधारा स्तोत्र’ का पाठ करें. मंत्र जप करें, 'ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' और 'विष्णुप्रियाय नमः' का जप भी लाभकारी है. पूजा के अंत में कमल पुष्प अर्पित करें, लक्ष्मी चालीसा पढ़ें. प्रसाद में खीर, मिश्री और बर्फी बांटें. इस दिन गरीबों को भोजन, वस्त्र या धन दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.

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