Sakat Chauth 2025: 17 जनवरी को मनाया जाएगा सकट चौथ, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा कि विधि
सकट चौथ 2025 माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाएगी, जो इस बार 17 जनवरी, शुक्रवार को है। यह व्रत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा अपने बच्चों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के लिए रखा जाता है। सकट चौथ व्रत भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित है। व्रती महिलाएं इस दिन उपवास रखती हैं और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं।
16 Jan 2025
(
Updated:
11 Dec 2025
05:17 AM
)
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सकट चौथ, जिसे तिलकुट चौथ या संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। 2025 में यह पर्व 17 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं अपने बच्चों की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। व्रत का पारण रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर किया जाता है।
सकट चौथ का पौराणिक महत्व
सकट चौथ का व्रत भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित है। यह मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से हर संकट का नाश होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सकट चौथ के दिन गणेश भगवान ने अपने भक्तों की रक्षा की और उन्हें संकटों से मुक्त किया। तभी से यह पर्व संकटों से छुटकारा पाने और जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के लिए मनाया जाता है।
इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं भगवान गणेश और सकट माता की पूजा करती हैं। पूजा में दुर्वा, तिलकुट और मोदक का विशेष महत्व होता है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान गणेश तिल और गुड़ से बनी वस्तुओं को अत्यधिक प्रिय मानते हैं।
पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
सकट चौथ की पूजा विधि बेहद सरल है, लेकिन इसे पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ किया जाता है। सबसे पहले सूर्योदय से पहले स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। व्रत का संकल्प लें और भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। पूजा में तिल, गुड़, दुर्वा, लड्डू और मोदक चढ़ाएं। सकट माता की पूजा के दौरान भगवान गणेश की आरती करें। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें। वही इसके शुभ मुहूर्त की बात करें तो इस दिन चतुर्थी तिथि का शुभ मुहूर्त सुबह 10:35 बजे से रात 8:55 बजे तक रहेगा। चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय रात्रि 8:30 बजे के आसपास है।
व्रत के नियम
सकट चौथ व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है। यह व्रत भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है, इसलिए कोई भी चूक न करें। इस दिन भगवान गणेश को तुलसी अर्पित करना वर्जित है। पूजा में केवल दुर्वा का उपयोग करें। इस दिन मूली, प्याज, गाजर और चुकंदर जैसे कंद-मूल खाने से बचें। पूजा के दौरान काले कपड़े धारण करना अशुभ माना जाता है। इसके बजाय सफेद या पीले वस्त्र पहनें। सकट चौथ व्रत तभी पूर्ण होता है जब चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। पूजा करते समय इस बात का ध्यान रखें कि अर्घ्य का जल आपके पैरों या शरीर पर न गिरे।
सकट चौथ की कथा
सकट चौथ की कथा सुनने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन की प्रसिद्ध कथा इस प्रकार है, एक बार एक साहूकार की बेटी ने सकट चौथ का व्रत रखा। उसने पूजा की सारी सामग्री जुटाई, लेकिन चंद्रमा को अर्घ्य देना भूल गई। इस गलती के कारण उसे अनेक कष्ट सहने पड़े। जब उसने अपनी गलती मानी और अगले वर्ष पूरी श्रद्धा से व्रत किया, तो उसके सारे संकट दूर हो गए। तब से यह मान्यता है कि चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
तिल, गुड़ और मोदक जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन सर्दियों में शरीर को ऊर्जा और गर्मी प्रदान करता है। इस व्रत में इन चीजों का प्रयोग न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। इसके अलावा, चंद्रमा को अर्घ्य देने का वैज्ञानिक महत्व यह है कि चंद्रमा की शीतल किरणें मन और शरीर को शांति प्रदान करती हैं।
सकट चौथ केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारे पारिवारिक और सामाजिक जीवन को सुदृढ़ करने का प्रतीक भी है। इस व्रत को रखने से न केवल भगवान गणेश का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि परिवार में सुख-शांति और समृद्धि भी आती है। 2025 में सकट चौथ का व्रत 17 जनवरी को मनाया जाएगा, इसलिए श्रद्धालु इस दिन को विशेष मानकर विधिपूर्वक व्रत करें।
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