Advertisement

देव दीपावली पर करें गंगाजल का ये चमत्कारी उपाय, पल में दूर होंगे ग्रह दोष और खत्म होंगे जीवन के सारे कष्ट!

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाने वाली देव दीपावली का सनातन धर्म में खास महत्व है. माना जाता है कि इस दिन देवता दीपावली मनाने के लिए धरती पर आते हैं. ऐसे में आप भी इस दिन अपने जीवन से कई दुखों के निवारण के लिए गंगाजल से जुड़ा एक ऐसा उपाय कर सकते हैं जो आपके लिए वरदान साबित हो सकता है.

Author
04 Nov 2025
( Updated: 11 Dec 2025
12:36 AM )
देव दीपावली पर करें गंगाजल का ये चमत्कारी उपाय, पल में दूर होंगे ग्रह दोष और खत्म होंगे जीवन के सारे कष्ट!

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 5 नवंबर शाम 6 बजकर 48 मिनट तक रहेगी. इसके बाद अगहन महीने की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी. इस दिन देव दीपावली, गुरु नानक जयंती, पुष्कर स्नान और कार्तिक पूर्णिमा व्रत हैं. द्रिक पंचांग के अनुसार, बुधवार को अभिजीत मुहूर्त कोई नहीं है और राहुकाल का समय दोपहर 12 बजकर 4 मिनट से शुरू होकर 1 बजकर 27 मिनट तक रहेगा.

शिव पुराण में मिलता है देव दीपावली का जिक्र!

देव दीपावली का उल्लेख शिव पुराण और पद्म पुराण में मिलता है. शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था, जिसके बाद देवताओं ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन काशी में दीप जलाकर देव दीपावली मनाई थी. इस दिन भोलेनाथ की स्तुति और राम भक्त हनुमान की पूजा करने का विशेष महत्व है. मान्यता है कि सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने से हनुमान भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं.

देव दीपावली पर इन उपायो से दूर होगी ग्रह संबंधी बाधा! 

ज्योतिष के अनुसार, देव दीपावली पर राहु-केतु, मंगल, गुरु, बुध और शनि ग्रहों से दोषों को दूर करने के लिए विशेष उपाय भी किए जाते हैं. इसके अलावा, घर में वास्तु दोष दूर करने और सुख समृद्धि पाने के लिए घर के हर कोने में गंगाजल का छिड़काव करना लाभकारी होता है.

देव दीपावली के दिन गंगा स्नान करना क्यों जरुरी है?

कार्तिक माह को दामोदर मास भी कहते हैं. इस दिन गंगा स्नान, व्रत, दान और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है. मान्यता है कि भगवान विष्णु मत्स्य रूप में जल में विराजमान रहते हैं, इसलिए दीपदान किया जाता है. इसके अलावा वैकुंठ चतुर्दशी के पूजन का भी विशेष महत्व है, जब भगवान विष्णु ने भगवान शिव का पूजन किया था.

हिंदुओं के अलावा सिख लोगों के लिए भी खास है ये दिन!

यह भी पढ़ें

सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म भी 1469 में कार्तिक पूर्णिमा को हुआ था. इसे गुरु पर्व या प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है. सिख समुदाय सुबह अमृत वेला में गुरुद्वारों में एकत्रित होकर कीर्तन, लंगर और नगर कीर्तन निकालते हैं. साथ ही स्वर्ण मंदिर, अमृतसर में विशेष आतिशबाजी और प्रकाश व्यवस्था होती है.

टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें