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Navratri 2025: महानवमी के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियाँ, इस शुभ मुहूर्त पर करें कन्या पूजन, जानें इस दिन का खास महत्व

नवरात्रि का आखिरी दिन यानी महानवमी बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है. यह दिन माँ दुर्गा के भक्तों के लिए बहुत ही खास होता है. मान्यता है कि इस दिन कन्या पूजन से जीवन की कठिनाइयों का नाश होता है और माँ की कृपा बनी रहती है.

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01 Oct 2025
( Updated: 10 Dec 2025
01:30 PM )
Navratri 2025: महानवमी के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियाँ, इस शुभ मुहूर्त पर करें कन्या पूजन, जानें इस दिन का खास महत्व

नवरात्रि का त्योहार हर साल भारत में बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. यह पर्व माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का प्रतीक है. इस साल नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू हो चुकी है और 1 अक्टूबर को महानवमी के साथ समापन की ओर बढ़ रही है. ऐसे में आज महानवमी की तिथि का खास धार्मिक महत्व है. इस दौरान सही पूजन और सही तरह से कन्या पूजन करने से माँ दुर्गा के नौ रूपों की कृपा हो सकती है. तो चलिए जानते हैं इस दिन कन्या पूजन का महत्व, शुभ मुहूर्त और विधि…

महानवमी पर कन्या पूजन का महत्व?

महानवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, कन्याओं को आमंत्रित कर उनके पैर धोना, तिलक लगाना और उन्हें भोग लगाना बेहद शुभ होता है. इस दिन कन्याओं को लाल चुनरी, फल, मेहंदी और अन्य उपहार भी दिए जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस पूजा से माता दुर्गा की कृपा बनी रहती है और जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है.

महानवमी पर इस मुहूर्त में करें कन्या पूजन

इस बार महानवमी की तिथि 1 अक्टूबर को शाम 7 बजे तक रहेगी. इसके अनुसार कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त दिन के लगभग दोपहर से शुरू होकर शाम तक माना गया है. इस समय पूजन करना सबसे उत्तम होता है.

कन्या पूजन के दौरान ध्यान रखें ये बातें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मुहूर्त में पूजा-अर्चना करने से माता दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है. कन्या पूजन के दौरान घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. पूजन में हलवा, पूरी और चने का भोग लगाना पुण्यकारी माना जाता है. इस दौरान कोई भी नकारात्मक भावना जैसे गुस्सा, झगड़ा या नकारात्मक सोच नहीं रखनी चाहिए. इस दिन मन को शुद्ध रखकर, पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करनी चाहिए.

महानवमी से जुड़ी पौराणिक मान्यता

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महानवमी न केवल नवरात्रि का अंतिम, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है. यह माँ दुर्गा के महिषासुर वध का भी प्रतीक है. मान्यता है कि इसी दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर नामक दैत्य का वध किया था, जिससे बुराई का अंत और अच्छाई का उदय हुआ. इसलिए इस दिन का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है. देश भर के मंदिरों और घरों में दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन किया जाता है. इसके साथ ही हवन और कन्या पूजन जैसे अनुष्ठान भी होते हैं, जो नवरात्रि व्रत को पूर्णता प्रदान करते हैं.

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