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धधकते नेपाल में बाहर आई कुमारी देवी, क्या पहले ही दी थी अनिष्ट की भविष्यवाणी?

नेपाल के पूरे घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया में वायरल वीडियो के आधार पर ये दावा किया जा रहा है कि नेपाल के इन हालातों की भविष्यवाणी उन्हीं की देवी कुमारी ने की थी, ऐसे में आज आपका ये जानना जरूरू है कि कौन है नेपाल की जिंदा देवी कुमारी?

धधकते नेपाल में बाहर आई कुमारी देवी, क्या पहले ही दी थी अनिष्ट की भविष्यवाणी?

नेपाल धधक रहा है, नेपाल अशांत है, नेपाल परेशान है, नेपाल दर्द में है. भारत-नेपाल के बीच सदैव से रोटी-बेटी का रिश्ता रहा है और इस रिश्ते के ख़ातिर नेपाल को बर्बाद होता देख भारत का खुशियाँ मनाना असंभव है. पड़ोसी मुल्क में शांति की बहाली हो सके, इसकी कोशिशें भारत से भी की जा रही हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं, जिन हालातों में आज का नेपाल है, उनकी भविष्यवाणी उन्हीं की देवी कुमारी के माध्यम से उस वक़्त हुई थी, जब उनके मुस्कराते चेहरे पर दर्द छलका. लेकिन इन दावों में कितनी सच्चाई है? क्या कुमारी देवी ने पहले से ही अनिष्ट के संकेत दे दिए थे? कौन हैं देवी कुमारी, जिनके दर्शन मुल्क में लगे कर्फ़्यू के बीच भी हो रहे हैं? देखिए इस पर हमारी यह ख़ास रिपोर्ट.

नेपाल को नवरात्र से पहले हिंदू राष्ट्र बनाने की तैयारियाँ हो रही हैं। मुल्क में भड़के जेन ज़ी आंदोलन की चिंगारी में केपी ओली शर्मा की कुर्सी पहले ही स्वाहा हो चुकी है, लेकिन शांति अब तक नहीं लौटी. माना जा रहा है कि यह शांति तभी वापस आएगी जब नेपाल दोबारा हिंदू राष्ट्र बनेगा, क्योंकि सेना के आगे Gen-Z का जो प्रस्ताव रखा गया है, उसमें हिंदू राष्ट्र की माँग सबसे ऊपर है. क्या आप जानते हैं कि साल के अंतिम चंद्रग्रहण के अगले ही दिन जैसे ही मुल्क के पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली शर्मा ने सोशल मीडिया साइट्स पर बैन लगाया, उनकी इन दमनकारी नीतियों के खिलाफ नेपाली युवाओं का सब्र टूट गया और एक हफ़्ते के अंदर-अंदर यह आंदोलन हिंसक हो गया. देखते ही देखते ‘जेन ज़ी’ नाम का यह आंदोलन रातों-रात भड़क उठा. इस हिंसा में होटल उद्योग को लगभग 2500 करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ, जबकि पब्लिक प्रॉपर्टी के नाम पर करोड़ों रुपये जलकर खाक हो गए. इस आंदोलन में अब तक 15 ज़िंदगियाँ मौत के घाट उतर चुकी हैं. अब जब नए प्रधानमंत्री के रूप में सुशीला कार्की ने शपथ ली है, तो उम्मीद की जा रही है कि हिंसा की चिंगारी में सुलगता नेपाल शायद शांत हो पाए. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया में वायरल वीडियो के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि नेपाल की मौजूदा स्थिति की भविष्यवाणी पहले ही उनकी जीवित देवी कुमारी ने कर दी थी। ऐसे में आज यह जानना ज़रूरी है कि आखिर कौन हैं नेपाल की ज़िंदा “देवी” कुमारी?

कौन हैं नेपाल की जीवित देवी कुमारी?

नेपाल में कुमारी देवी का पद पूरे मुल्क में आस्था और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है. यह नेपाल की प्राचीन परंपराओं में से एक है, जिसमें दैवीय गुणों से युक्त एक छोटी बच्ची का चयन किया जाता है.  इसे आप दलाई लामा की परंपरा की तरह समझ सकते हैं, जहाँ जनता विशेष मान्यताओं के आधार पर चयन करती है. कुमारी बनने की उम्र सीमा 2 से 5 साल तक होती है. माना जाता है कि यह देवी, दरअसल, तलेजु देवी का प्रतीक होती हैं. चुनी गई बच्ची तब तक इस पद पर रहती है जब तक उसका मासिक धर्म शुरू न हो जाए. चयन प्रक्रिया भी बेहद कठोर होती है. बच्ची को अंधेरे कमरे, जानवरों के कटे सिर और डरावने माहौल में ले जाकर परखा जाता है कि वह भयभीत होती है या नहीं, क्योंकि मान्यता है कि सच्ची कुमारी में डर का भाव नहीं होना चाहिए. इसके अलावा ज्योतिषी उसकी जन्म कुंडली का मिलान भी करते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह धार्मिक दृष्टि से उपयुक्त है. विश्वास है कि कुमारी देवी नेपालवासियों को आपदा और मुश्किलों से बचाती हैं. त्योहारों और विशेष अवसरों पर देवी को उनके आवास से बाहर लाया जाता है और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं. हालाँकि, इस परंपरा पर सवाल भी उठते हैं. आलोचकों का कहना है कि इतनी छोटी बच्ची पर देवी होने का इतना बड़ा बोझ डालना और उसे सामान्य बचपन से दूर करना मानवीय अपराध जैसा है.

बहरहाल, कुमारी देवी से जुड़ा जो वीडियो इस वक़्त वायरल हो रहा है, उसके आधार पर दावा किया जा रहा है कि पिछले साल यात्रा के दौरान कुमारी देवी भावुक नजर आई थीं, जो किसी अनिष्ट का संकेत माना गया. इतना ही नहीं, कुछ लोग कुमारी देवी को 2015 में आए भूकंप से भी जोड़ रहे हैं. उस भूकंप में लगभग 9 हजार लोगों की मौत हुई थी और 10 लाख से अधिक घरों को नुकसान पहुंचा था, और तब कहा गया था कि कुमारी देवी क्रोधित थीं. हालाँकि, इन वायरल वीडियो में कितनी सच्चाई है, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती. लेकिन इतना ज़रूर है कि कुमारी देवी के प्रति नेपालियों की आस्था बेहद गहरी है. यही कारण है कि जेन ज़ी आंदोलन के दौरान मुल्क में लगे कर्फ़्यू के बीच जैसे ही कुमारी देवी जनता के बीच आईं, उनके दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. कर्फ़्यू में कुछ ढील के बाद, काठमांडू में इंद्र जात्रा के चलते जैसे ही कुमारी देवी मंदिर से बाहर आईं, उनकी एक झलक पाने के लिए भक्तों की भारी भीड़ जमा हो गई. यह उत्सव अब 8 दिनों तक चलेगा, जिसके चलते पूरे नेपाल में कुमारी देवी के नाम की गूंज है. नेपालवासियों का विश्वास है कि कुमारी देवी के बाहर आने से मुल्क का अनिष्टकारी समय अब समाप्त हो जाएगा.

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