करवा चौथ व्रत: धर्म निभाते हुए रखें बच्चे की सेहत का ख्याल, डॉ. मीरा पाठक ने बताया सही तरीका

हिंदू धर्म में करवा चौथ का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. इस दौरान सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत करती हैं. लेकिन कई बार प्रेग्नेंट महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि क्या प्रेग्नेंट महिलाओं को ये कठिन व्रत करना चाहिए? व्रत के दौरान किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए? तो डॉ. मीरा पाठक से जानें…

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10 Oct 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:44 AM )
करवा चौथ व्रत: धर्म निभाते हुए रखें बच्चे की सेहत का ख्याल, डॉ. मीरा पाठक ने बताया सही तरीका

करवा चौथ हिंदू महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक खास त्योहार है, जिसमें वे पति की लंबी आयु और सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं. यह काफी कठिन व्रत माना जाता है, क्योंकि व्रती महिलाएं चांद न दिखने तक निर्जला यानी बिना पानी पिए रहती हैं. ऐसे में इस दौरान प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए निर्जला रहना और मुश्किल हो जाता है. ऐसे में क्या प्रेग्नेंट महिलाओं को व्रत रखना चाहिए या नहीं? अगर रख रही हैं तो किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, आइए जानते हैं सीनियर मेडिकल ऑफिसर और गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक से…

डॉ. मीरा पाठक ने बुधवार को मीडिया से खास बात की और बताया कि प्रेग्नेंट महिलाएं करवा चौथ व्रत के दौरान कुछ बातों की सावधानी बरतें. उन्होंने प्रेग्नेंट महिलाओं को निर्जला व्रत नहीं रखने की हिदायत देते हुए कहा कि निर्जला व्रत करना बच्चे और मां दोनों के लिए सुरक्षित नहीं है. पूरे दिन व्रत में थोड़ा-थोड़ा फलाहार लेते रहना चाहिए. फलों में भी केला और सेब फायदेमंद साबित होंगे. इसके अलावा दूध, नारियल पानी, लस्सी, छाछ और थोड़ी-थोड़ी देर में पानी का सेवन करते रहना चाहिए. प्रेग्नेंट महिलाओं को शरीर को हाइड्रेटेड रखना बहुत जरूरी है. उन्हें पूरी तरह से निर्जला व्रत से बचना चाहिए.

व्रत के दौरान करें फलाहार का सेवन!

उन्होंने बताया, जब सुबह सरगी दी जाती है तो उसमें प्रेग्नेंट महिलाओं को पोषण से भरी चीजें खानी चाहिए और तली-भुनी चीजें नहीं खानी चाहिए. कार्बोहाइड्रेट रिच फूड में चपाती और पोहा हैं, और प्रोटीन रिच फूड में पनीर और दही हैं, जबकि फलों में केला और सेब हैं.

ज्यादा देर तक खड़े या बैठे न रहें

डॉ. पाठक ने बताया कि पूजा के वक्त ज्यादा समय तक खड़े या बैठे नहीं रहना चाहिए. अगर थकान या चक्कर महसूस होता है, पेट में बच्चा कम घूमता है, धड़कन तेज महसूस होती है, पेट या सिर में दर्द होता है, तो ऐसी कंडीशन में डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए.

व्रत रखने से पहले लें डॉक्टर की सलाह

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उन्होंने यह भी बताया कि हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में विशेष ख्याल रखने की जरूरत है. अगर मां को एनीमिया या हाई ब्लड प्रेशर है, तो डॉक्टर के परामर्श से ही व्रत रखें, वरना व्रत न करें. क्योंकि इस दौरान व्रत रखना आपके लिए भारी पड़ सकता है. वहीं, चांद दिखने के बाद जब खाना खाएं तो उसे हल्का रखें ताकि पचाने में परेशानी न हो.

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