Advertisement

'वो मुझे मिलेंगे तो उन्हें गले लगा लूंगा…', प्रेमानंद महाराज को लेकर दिए अपने बयान पर रामभद्राचार्य ने दी सफाई, कहा- वो मेरे पुत्र के समान हैं

कई संतों ने तो इसे सनातन धर्म की एकता के लिए ही हानिकारक बता दिया है. वहीं कुछ संतों का मानना है कि इस तरह की टिप्पणी समाज में बिना वजह का विवाद उत्पन्न करती है और इसका हमारी युवा पीढ़ी पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा

Author
26 Aug 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:23 AM )
'वो मुझे मिलेंगे तो उन्हें गले लगा लूंगा…', प्रेमानंद महाराज को लेकर दिए अपने बयान पर रामभद्राचार्य ने दी सफाई, कहा- वो मेरे पुत्र के समान हैं

जगद्गुरु रामभद्राचार्य प्रेमानंद महाराज पर की गई टिप्पणी को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं. दरअसल उन्होंने एक पॉडकास्ट में कहा कि वो प्रेमानंद महाराज को चमत्कारी नहीं मानते हैं. वो एक बार संस्कृत बोलकर दिखा दें या फिर मेरे द्वारा दिए गए संस्कृत श्लोक का अर्थ समझा कर दिखा दें. इसके बाद प्रेमानंद महाराज के भक्तों के साथ कई संत भी भड़के हुए नज़र आए, लेकिन अब जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपने उस बयान पर सफाई देते हुए क्या कुछ कहा है आइए जानते है. लेकिन उससे पहले ये जान लीजिए कि प्रेमानंद महाराज के समर्थन में आए संतों ने किस तरह उनके बयान पर आपत्ति जताई.

रामभद्राचार्य पर फूटा संतों का गुस्सा
कई संतों ने तो इसे सनातन धर्म की एकता के लिए ही हानिकारक बता दिया है. वहीं कुछ संतों का मानना है कि इस तरह की टिप्पणी समाज में बिना वजह का विवाद उत्पन्न करती है और इसका हमारी युवा पीढ़ी पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. उन्हें इस तरह की बात करना शोभा नहीं देता है. भक्ति का भाषा से कोई लेना-देना नहीं है. वृंदावन में लोग राधा नाम जप रहे हैं, काशी में लोग हर हर महादेव कह रहे हैं. सब अपनी तरह से ईश्वर को याद कर रहे हैं. लेकिन अब रामभद्राचार्य महाराज ने अपनी बात एक नए सिरे से रखी है.

रामभद्राचार्य का नया बयान हुआ वायरल
जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने अब एक नया वीडियो जारी करते हुए कहा कि 'सभी हिंदुओं को पारस्परिक मतभेद छोड़ देना चाहिए और एक साथ खड़ा रहना चाहिए. मैंने प्रेमानंद महाराज पर कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की है, वो तो मेरे पुत्र के समान हैं. मेरी अवस्था भी बड़ी है. मैं एक आचार्य होने के नाते सबको कहता हूँ कि संस्कृत का अध्ययन ज़रूर करना चाहिए. मैं खुद 18 घंटे पढ़ता हूँ और पढ़ता रहूँगा. इतना ही नहीं रामभद्राचार्य महाराज ने आगे कहा कि हां, मैं चमत्कार को नमस्कार नहीं करता, ये सत्य है. मैं सभी को कहता हूँ कि बेटा संस्कृत पढ़ो. ये जो मेरे लिए भ्रम फैलाया जा रहा है वो ग़लत है. मैंने किसी संत को लेकर कोई भी ग़लत टिप्पणी नहीं की है और न ही करूँगा.
इतना ही नहीं आगे उन्होंने प्रेमानंद महाराज के लिए कहा कि मैंने कोई गलत टिप्पणी नहीं की है. अगर वो मुझे मिलेंगे तो मैं उन्हें गले से लगाऊंगा और आशीर्वाद भी दूंगा. साथ ही उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए मैं श्रीराधे से कामना भी करूंगा. लेकिन अभी भी उनके पहले बयान के कारण कुछ लोगों में गुस्सा देखा जा रहा है. 

यह भी पढ़ें

जगद्गुरु को सरेआम झूठ बोलना शोभा नहीं देता
रामभद्राचार्य महाराज के इस बयान के बाद प्रेमानंद महाराज के भक्तों में भी काफ़ी गुस्सा देखने को मिल रहा है. एक यूज़र रामभद्राचार्य महाराज पर कमेंट करते हुए कहा कि ‘जगद्गुरु को सरेआम झूठ बोलना शोभा नहीं देता है. कायदे से तो इन्हें प्रेमानंद महाराज से माफ़ी माँगनी चाहिए थी लेकिन ये बोल रहे हैं कि वो इनके पास आएंगे तो आशीर्वाद देंगे. अरे भाई प्रेमानंद महाराज क्यों जाएंगे इनके पास आशीर्वाद लेने? इन्हें जाना चाहिए’. तो वहीं दूसरे यूज़र ने कहा कि ‘क्रोध में मनुष्य अपने मन की बात नहीं कहता, बल्कि वह केवल दूसरों का दिल दुखाना चाहता है’.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें