काल भैरव को शराब का भोग कैसे चढ़ेगा? उज्जैन में नई शराब नीति पर मचा बवाल

मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन सहित 19 शहरों में शराबबंदी लागू कर दी है, जिससे महाकाल नगरी में रहने वाले भक्तों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है। काल भैरव को मदिरा का भोग लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, लेकिन अब शहर में शराब की बिक्री पूरी तरह से बंद हो गई है।

काल भैरव को शराब का भोग कैसे चढ़ेगा? उज्जैन में नई शराब नीति पर मचा बवाल
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में लागू की गई नई शराब नीति के तहत उज्जैन समेत 19 शहरों में शराबबंदी लागू कर दी गई है। महाकाल की नगरी उज्जैन, जो अपनी धार्मिकता और आस्था के लिए जानी जाती है, अब पूरी तरह से शराब मुक्त हो गई है। यह फैसला जहां एक ओर स्थानीय जनता को संतोष प्रदान कर रहा है, वहीं दूसरी ओर एक बड़ी चिंता भी खड़ी हो गई है—काल भैरव मंदिर में होने वाली मदिरा भोग की परंपरा का क्या होगा?

काल भैरव और मदिरा भोग की परंपरा

उज्जैन का काल भैरव मंदिर सदियों से आस्था और रहस्य का केंद्र रहा है। मान्यता है कि भगवान शिव के गणों में सबसे प्रमुख काल भैरव को मदिरा का भोग लगाया जाता है। भक्तगण जब भी महाकाल के दर्शन करने आते हैं, वे काल भैरव के दर्शन किए बिना अपनी यात्रा को अधूरा मानते हैं। ऐसे में, सरकार द्वारा लागू शराबबंदी के बाद सवाल उठता है कि अब काल भैरव को मदिरा भोग कैसे चढ़ाया जाएगा? यह परंपरा सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं रखती बल्कि स्थानीय पर्यटन और आस्था से भी गहराई से जुड़ी हुई है।

मंदिर प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया

काल भैरव मंदिर के पुजारी और प्रशासन ने इस मुद्दे पर सरकार से अनुरोध किया कि मंदिर की पूजा-अर्चना के लिए विशेष अनुमति दी जाए। फिलहाल, सरकार ने यह व्यवस्था की है कि मंदिर प्रशासन दो दिन का स्टॉक रख सकता है ताकि नियमित पूजा में कोई बाधा न आए।

मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार, मंदिर की पारंपरिक विधि से पूजा करने के लिए उन्हें सरकार की ओर से विशेष छूट मिली है। हालाँकि, आम श्रद्धालुओं को अब मंदिर में प्रसाद के रूप में शराब चढ़ाने के लिए उज्जैन नगर निगम सीमा के बाहर स्थित दुकानों से मदिरा खरीद कर लानी होगी।

पुलिस और प्रशासन की सख्ती

चूँकि उज्जैन सहित 19 शहरों में शराबबंदी लागू हो चुकी है, इसलिए पुलिस प्रशासन भी कड़ाई से इस नियम का पालन करवा रहा है। सभी शराब विक्रेताओं से स्टांप पेपर पर लिखवा लिया गया है कि वे अब शहर में शराब की बिक्री नहीं करेंगे।

इसके अलावा, शहर के सभी एंट्री प्वाइंट्स पर कड़ी चेकिंग की जा रही है ताकि कोई भी व्यक्ति अवैध रूप से शराब ना ला सके। सरकार के निर्देशानुसार, निर्धारित मात्रा से अधिक शराब लेकर चलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने इस संदर्भ में हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति अवैध शराब की बिक्री की सूचना सीधे पुलिस को दे सके।

महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के बाद श्रद्धालु अक्सर काल भैरव के दर्शन करने जाते हैं और उन्हें मदिरा का भोग लगाते हैं। अब नई शराब नीति के चलते इस परंपरा पर असर पड़ सकता है। हालांकि, प्रशासन द्वारा दी गई अनुमति के चलते मंदिर में पूजा-अर्चना जारी रहेगी, लेकिन आम भक्तों को अब यह सुविधा नहीं मिलेगी।

शराबबंदी से उज्जैन को क्या लाभ?

शराबबंदी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे सामाजिक और पारिवारिक जीवन में सुधार आएगा। सरकार का मानना है कि यह नीति अपराधों में कमी लाएगी और युवाओं को नशे से दूर रखने में मदद करेगी। इसके अलावा, धार्मिक नगरी उज्जैन में शराबबंदी लागू होने से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को अधिक आध्यात्मिक और पवित्र माहौल मिलेगा। कई स्थानीय लोग और धार्मिक संगठन इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। शराबबंदी लागू होने के बावजूद कई लोग मानते हैं कि यह व्यवस्था स्थायी नहीं रह सकती। उज्जैन एक बड़ा पर्यटन स्थल है और कई छोटे-बड़े व्यवसाय इससे जुड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार इस फैसले को लागू रखते हुए धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने के लिए बेहतर विकल्प तलाशे, तो यह संतुलन बना रह सकता है।


महाकाल की नगरी उज्जैन में शराबबंदी लागू होने से एक तरफ लोग खुश हैं, तो दूसरी तरफ काल भैरव मंदिर में मदिरा भोग की परंपरा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार और प्रशासन ने फिलहाल इस पर संतुलन बनाने का प्रयास किया है, लेकिन आम जनता और श्रद्धालुओं के लिए यह एक नई चुनौती बन गई है। भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस नीति को किस तरह और अधिक प्रभावी बनाती है और क्या कोई विशेष प्रावधान इस धार्मिक परंपरा को बनाए रखने के लिए किया जाता है।

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