Advertisement

दक्षिण भारत से लेकर हिमाचल प्रदेश तक ये हैं मां स्कंदमाता के पौराणिक मंदिर, यहां पूजा करने से मिलता है मनचाहा फल

नवरात्रि का यह पर्व मां दुर्गा के भक्तों के लिए बेहद ही खास होता है. इस दौरान मां दुर्गा के भक्त माता के मंदिर जाकर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं माता का ही रूप यानि मां स्कंदमाता के मंदिर भारत के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हैं. मान्यता है कि यहां भक्तों को मनचाहा फल मिलता है… पूरी जानकारी के लिए आगे पढ़ें

Author
26 Sep 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:34 AM )
दक्षिण भारत से लेकर हिमाचल प्रदेश तक ये हैं मां स्कंदमाता के पौराणिक मंदिर, यहां पूजा करने से मिलता है मनचाहा फल
AI Image

नवरात्रि का पर्व देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करने का पावन अवसर होता है. नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की विधिवत पूजा-अर्चना होती है. इन्हें मोक्ष प्रदान करने वाली और समस्त इच्छाओं की पूर्ति करने वाली देवी माना जाता है. देश के कई राज्यों में मां स्कंदमाता को समर्पित भव्य और प्राचीन मंदिर स्थापित हैं, जिनका ऐतिहासिक, पौराणिक और धार्मिक महत्व आज इस आर्टिकल में आपको जानने को मिलेगा…

देवी पुराण में उल्लेखित हैं ये मंदिर
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जगतपुरा क्षेत्र स्थित बागेश्वरी देवी मंदिर परिसर में मां स्कंदमाता का मंदिर है. इसका उल्लेख काशी खंड और देवी पुराण में मिलता है. मान्यता है कि प्राचीन समय में देवासुर नामक राक्षस ने काशी में संतों और आम लोगों पर अत्याचार करना शुरू किया था, तब मां स्कंदमाता ने उस दानव का वध कर धर्म की रक्षा की. उसी समय से यहां माता की पूजा होती है. कहा जाता है कि माता यहां विराजमान होकर काशी की रक्षा करती हैं और अपने भक्तों को हर बुरी शक्ति से बचाती हैं.

10वीं शताब्दी पुराना है गुजरात में स्थित ये मंदिर
गुजरात के वडोदरा शहर में स्थित स्कंदमाता मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी में हुआ था. यह मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला और उत्कृष्ट मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध है. मान्यता है कि नवरात्रि में यहां स्कंदमाता का दर्शन करने से भक्तों पर माता की कृपा बनी रहती है और उनके घर में खुशहाली आती है.

हिमाचल प्रदेश में स्थित क्या है इस मंदिर की खासियत?
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में 8वीं शताब्दी में निर्मित स्कंदमाता मंदिर अपनी अनूठी काष्ठ कला के लिए प्रसिद्ध है. लकड़ी की नक्काशी और मंदिर की संरचना देखने योग्य है. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से जीवन की सारी परेशानियों से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख-शांति आती है.

उत्तराखंड में स्थित ये मंदिर विद्यार्थियों के लिए क्यों है खास?
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित स्कंदमाता मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में हुआ था. यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां दर्शन करने से बुद्धि का विकास होता है. छात्र-छात्राएं यदि यहां विधि-विधान से पूजा करें तो उन्हें पढ़ाई में सफलता मिलती है.

नवरात्रि में बढ़ जाती है ग्वालियर के इस मंदिर की भव्यता
मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में 18वीं शताब्दी में निर्मित स्कंदमाता मंदिर अपनी भव्यता और दिव्यता के लिए जाना जाता है. नवरात्रि के समय यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. कहा जाता है कि इस मंदिर में पूजा करने से मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है. इसी तरह, विदिशा में पुराने बस स्टैंड के पास सांकल कुएं के निकट स्कंदमाता मंदिर 1998 में स्थापित किया गया. इससे पहले यहां दशकों तक झांकी सजाई जाती थी. भक्तों की आस्था और मां की ज्योति के कारण मंदिर का निर्माण हुआ. पंचमी के दिन यहां विशेष आरती का आयोजन होता है.

यह भी पढ़ें

तमिलनाडु में स्थित ये मंदिर क्यों है भक्तों के लिए विशेष?
दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में मदुरै स्थित स्कंदमाता मंदिर 7वीं शताब्दी का है. यह मंदिर अपनी भव्यता और धार्मिक महत्व के कारण प्रसिद्ध है. यहां हमेशा भक्तों की भीड़ लगी रहती है. मान्यता है कि विधिवत पूजा करने से भक्तों को जीवन की सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है और माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें