Advertisement

कलियुग का वैकुंठ वास है द्वारका तिरुमला मंदिर, कड़ी तपस्या के बाद स्वयं प्रकट हुए थे भगवान वेंकटेश्वर!

आंध्र प्रदेश भारत का एक ऐसा राज्य है जहां कई पौराणिक मंदिर हैं. भगवान विष्णु से लेकर भगवान शिव के अलग-अलग अवतारों की पूजा भी यहां की जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं इसी राज्य में बसा एक ऐसा प्राचीन मंदिर भी है जो अपनी वास्तुकला और एरिया को लेकर जाना जाता है. मंदिर में मौजूद भगवान वेंकटेश्वर की अद्भुत मूर्ति भी है जिसे लेकर मान्यता है कि ये घोर तपस्या के बाद स्वयं प्रकट हुई थी.

Author
07 Nov 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:22 AM )
कलियुग का वैकुंठ वास है द्वारका तिरुमला मंदिर, कड़ी तपस्या के बाद स्वयं प्रकट हुए थे भगवान वेंकटेश्वर!

दक्षिण भारत के ज्यादातर मंदिर भगवान मुरुगन और भगवान विष्णु को समर्पित हैं. साथ ही भगवान शिव और पार्वती को भी समर्पित मंदिर हैं, लेकिन सबसे ज्यादा भगवान मुरुगन और भगवान विष्णु के अलग-अलग अवतारों की पूजा की जाती है. आंध्र प्रदेश में ऐसा ही मंदिर है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है और मंदिर की वास्तुकला और एरिया बहुत उत्कृष्ट हैं. 

द्वारका तिरुमला मंदिर आंध्र प्रदेश में कहां स्थित है?

द्वारका तिरुमला मंदिर आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले में एलुरु के पास एक पहाड़ी पर स्थित है. मंदिर तक जाने की बहुत सारी सुविधाएं हैं. मंदिर के पास रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड दोनों मौजूद हैं. एलुरु शहर से 42 किलोमीटर पर रेलवे जंक्शन है. अगर आप भीमाडोलू की तरफ से आते हैं तो 15 किलोमीटर पर ही रेलवे जंक्शन मौजूद है. मंदिर पहाड़ी पर बसा है तो भक्त सीढ़ियों के जरिए मंदिर तक पहुंचते हैं. यह मंदिर भक्तों की आध्यात्मिक शांति का केंद्र है. भक्तों का मानना है कि भगवान विष्णु के दर्शन के बाद मन शांत हो जाता है और आध्यात्मिक शांति मिलती है.

इस मंदिर में होती है भगवान वेंकटेश्वर की पूजा!

अगर मंदिर की स्थापना की बात करें तो माना जाता है कि महान ऋषि 'द्वारका' ने चींटियों के टीले पर बैठकर सालों तक भगवान विष्णु की पूजा की थी और तब वहां स्वयंभू भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा प्रकट हुई थी. प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के बाद 11वीं शताब्दी में म्यावलवरम जमींदारों ने मंदिर का निर्माण कराया था. इस मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर भक्तों को दर्शन देते हैं और उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं. भक्तों के बीच श्री वेंकटेश्वर को कलियुग वैकुंठ वास के नाम से भी जाना जाता है.

भक्तों को सेवा के लिए करना पड़ता है पैसे का भुगतान! 

द्वारका तिरुमला मंदिर बहुत बड़े एरिए में बना है और वहां भगवान विष्णु को प्रिय सभी चीजें रखी जाती हैं. मंदिर में आपको बाग-बगीचे, गौवंश की प्रतिमा और भगवान विष्णु के बाल रूप भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा भी देखने को मिल जाएगी. मंदिर में भक्तों के लिए अलग-अलग सेवाएं भी रखी गई हैं, जिनका शुल्क भी निर्धारित है, जिसमें डेली सुबह की पूजा में सुप्रभात सेवा, अष्टोत्तर शतनामार्चना, और नित्य आर्जित कल्याणोत्सवम शामिल है. सुप्रभात सेवा और अष्टोत्तर शतनामार्चना सेवा करने के लिए भक्तों को 300 रुपए का भुगतान करना होगा, जबकि नित्य आर्जित कल्याणोत्सवम करने के लिए भक्तों को 2000 रुपए देने होंगे.

द्वारका तिरुमला के पास हैं कई दिव्य मंदिर!

यह भी पढ़ें

मंदिर के आसपास कई ऐसी जगहें हैं, जहां पर्यटक घूमने के लिए भी जा सकते हैं. मंदिर के 35 किलोमीटर के दायरे में श्री कुंकुलम्मा वारी मंदिर, श्री संतान वेणुगोपाल जगन्नाथ स्वामी मंदिर, और श्री अंजनेय तथा श्री सुब्रह्मण्येश्वर स्वामी मंदिर मिल जाएंगे.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें