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नए साल पर बांके बिहारी मंदिर ने लागू किया ड्रेस कोड, जानिए कौन से कपड़े होंगे मान्य

बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन ने नए साल से पहले श्रद्धालुओं के लिए ड्रेस कोड लागू किया है, जिससे मंदिर की गरिमा बनाए रखी जा सके। मंदिर प्रबंधन ने छोटे कपड़े, फटी जींस, मिनी स्कर्ट, और नाइट सूट जैसे अमर्यादित परिधानों में आने पर प्रतिबंध लगाया है। इस संबंध में मंदिर के प्रवेश मार्गों पर बैनर लगाए गए हैं।

नए साल पर बांके बिहारी मंदिर ने लागू किया ड्रेस कोड, जानिए कौन से कपड़े होंगे मान्य
भगवान श्रीकृष्ण की लीला भूमि मथुरा-वृंदावन स्थित प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर ने श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए एक नई व्यवस्था लागू की है। इस नई पहल के तहत, मंदिर प्रबंधन ने ड्रेस कोड की व्यवस्था की है, जिसमें अमर्यादित कपड़ों में आने वाले भक्तों की एंट्री पर रोक लगाई गई है।
ड्रेस कोड की नई व्यवस्था का उद्देश्य
बांके बिहारी मंदिर, जो हर साल लाखों भक्तों और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है, मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं के अनुभव को बनाए रखने के लिए हमेशा से सतर्क रहा है। मंदिर प्रशासन ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए नए साल से पहले ड्रेस कोड लागू किया। यह कदम मंदिर परिसर में अनुशासन, शालीनता और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
कौन से कपड़े नहीं होंगे मान्य?
मंदिर प्रबंधन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि श्रद्धालु छोटे और अमर्यादित कपड़ों जैसे मिनी स्कर्ट, हॉफ पैंट, बरमूडा, कटी-फटी जींस, नाइट सूट और चमड़े से बने परिधान पहनकर मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। इसके साथ ही, मंदिर की सांस्कृतिक गरिमा को देखते हुए चमड़े की बेल्ट और अन्य अनैतिक वस्त्रों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। मंदिर प्रबंधक मुनीष शर्मा और उमेश सारस्वत ने बताया कि इस नई व्यवस्था की जानकारी श्रद्धालुओं तक पहुंचाने के लिए मंदिर के आसपास बड़े-बड़े बैनर और पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि वे शालीन और मर्यादित वस्त्र पहनकर ही दर्शन के लिए आएं।

यह निर्णय मंदिर के धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मंदिर प्रबंधन का मानना है कि श्रद्धालुओं का पहनावा मंदिर की आध्यात्मिकता और वातावरण को प्रभावित करता है। छोटे कपड़े न केवल मंदिर की गरिमा के विपरीत हैं, बल्कि इससे भक्तों का ध्यान भी भंग हो सकता है। यह पहल पहले भी चर्चा में रही थी, जब महिलाओं और लड़कियों से शालीन वस्त्र पहनने की अपील की गई थी। अब इसे नए साल के अवसर पर और अधिक स्पष्ट और सख्त रूप से लागू किया जा रहा है। मंदिर प्रशासन ने यह भी अनुमान लगाया है कि नए साल पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ेगी। इस दौरान बुजुर्गों, बच्चों, दिव्यांगों और बीमार व्यक्तियों को मंदिर न लाने की अपील भी की गई है ताकि भीड़ के बीच किसी तरह की असुविधा न हो।

बांके बिहारी मंदिर न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी अपनी आध्यात्मिकता और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के लिए जाना जाता है। यहां दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह निर्णय एक संदेश है कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान है और यहां की परंपराओं और मर्यादाओं का पालन करना हर भक्त की जिम्मेदारी है। इस प्रकार, ड्रेस कोड लागू करने का उद्देश्य न केवल मंदिर की गरिमा को बनाए रखना है, बल्कि सभी भक्तों के लिए एक शुद्ध और आध्यात्मिक अनुभव सुनिश्चित करना भी है।

इस नई व्यवस्था को लेकर भक्तों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ भक्तों ने इसे मंदिर की गरिमा बनाए रखने की दिशा में एक सराहनीय कदम बताया, जबकि कुछ ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रतिबंध माना। बावजूद इसके, मंदिर प्रशासन का मानना है कि यह निर्णय सभी श्रद्धालुओं के हित में है। बांके बिहारी मंदिर, जो श्रीकृष्ण के अनन्य प्रेम और भक्ति का केंद्र है, हर भक्त के लिए एक आध्यात्मिक स्थल है। यह पहल न केवल इस मंदिर को और अधिक अनुशासित बनाएगी, बल्कि मंदिर आने वाले हर भक्त को अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूक भी करेगी।

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