Bada Mangal 2025: कब है? क्यों मनाया जाता है? जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी

हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार ज्येष्ठ महीने में 5 मंगलवार पड़ने जा रहे हैं और इसका मतलब है कि इस साल बड़ा मंगल की महिमा पाँच बार सुनाई देगी। यह परंपरा लखनऊ और पूर्वांचल क्षेत्र में हनुमान जी के भक्तों के लिए न केवल श्रद्धा का विषय है बल्कि एक सामाजिक उत्सव का रूप भी ले चुकी है।

Bada Mangal 2025: कब है? क्यों मनाया जाता है? जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी
लखनऊ की तपती गर्मी में जब ज्येष्ठ का महीना अपने चरम पर होता है, तब हर मंगलवार को सड़कों पर कुछ अलग ही नज़ारा देखने को मिलता है. चारों ओर भंडारों की कतारें, भक्तों का हुजूम और हनुमान चालीसा की गूंज. यह कोई आम मंगलवार नहीं होता, बल्कि इसे 'बड़ा मंगल' कहा जाता है. यह परंपरा केवल धार्मिक उत्सव भर नहीं है, बल्कि उत्तर भारत की आस्था, इतिहास और सामुदायिक एकता की मिसाल है.

क्या होता है बड़ा मंगल, क्यों है इतना खास?

बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल, हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ महीने के सभी मंगलवार को कहा जाता है. यह पर्व विशेष रूप से भगवान हनुमान की पूजा के लिए समर्पित होता है. मान्यता है कि इन दिनों हनुमान जी के वृद्ध स्वरूप की विशेष आराधना की जाती है. भक्तों का विश्वास है कि इस दिन की गई पूजा विशेष फलदायी होती है और भगवान हनुमान अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं.

बड़ा मंगल सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं रहता. इस दिन हर गली, हर मोहल्ले में भंडारे लगते हैं. कोई खिचड़ी बांटता है, कोई शरबत, तो कोई पूड़ी-सब्ज़ी. बिना किसी भेदभाव के लोग एक-दूसरे को प्रसाद बांटते हैं. यही इसकी असली सुंदरता है.

Bada Mangal 2025 की तिथियाँ

इस वर्ष बड़ा मंगल कुछ खास है क्योंकि ज्येष्ठ महीने में पाँच मंगलवार आ रहे हैं:
पहला बुढ़वा मंगल – 13 मई 2025
दूसरा बुढ़वा मंगल – 20 मई 2025
तीसरा बुढ़वा मंगल – 27 मई 2025
चौथा बुढ़वा मंगल – 2 जून 2025
पाँचवां बुढ़वा मंगल – 10 जून 2025

हर मंगलवार को हनुमान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होगी और भंडारे लगाए जाएंगे. लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, इलाहाबाद जैसे शहरों में इस दिन का उत्साह देखते ही बनता है.

कब और कैसे शुरू हुआ बड़ा मंगल?

बड़ा मंगल का इतिहास केवल धार्मिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी दिलचस्प है. एक मान्यता के अनुसार, जब श्रीराम माता सीता की खोज में निकले, तब ज्येष्ठ महीने के मंगलवार को उनकी पहली मुलाकात हनुमान जी से हुई थी. यह दिन तभी से आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाने लगा.

लेकिन बड़ा मंगल का लोकप्रिय रूप लखनऊ से जुड़ा है. कहा जाता है कि मुगल काल में नवाब वाजिद अली शाह के पुत्र की तबीयत बेहद बिगड़ गई थी. किसी उपाय से लाभ नहीं हो रहा था. तब किसी बुजुर्ग ने नवाब को अलीगंज स्थित हनुमान मंदिर में मन्नत मानने की सलाह दी. नवाब और उनकी बेगम ने वहां जाकर प्रार्थना की और चमत्कारिक रूप से नवाबज़ादे की तबीयत ठीक होने लगी. इसके बाद नवाब ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया जो ज्येष्ठ महीने में पूरा हुआ. उसी साल से लखनऊ में बड़े मंगल पर भंडारे और प्रसाद वितरण की परंपरा शुरू हो गई, जो आज भी पूरे उत्साह के साथ निभाई जाती है.

बड़ा मंगल की पूजा विधि और विशेष मंत्र

बड़ा मंगल के दिन भक्त हनुमान मंदिर में जाकर पूजा करते हैं. इस दिन सुंदरकांड, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और आरती का पाठ किया जाता है. कुछ श्रद्धालु व्रत रखते हैं और दिनभर हनुमान जी की सेवा में लगे रहते हैं.
शास्त्रों में इस दिन निम्न मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है
ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमित विक्रमाय
प्रकटपराक्रमाय महाबलाय सूर्य कोटिसमप्रभाय रामदूताय स्वाहा।
इस मंत्र का 108 बार जाप करने से जीवन में शांति, सुख और सफलता का आगमन होता है. साथ ही, कहा जाता है कि इस दिन की गई पूजा मंगल और शनि ग्रहों के दुष्प्रभाव को भी कम करती है.

आपको बता दें कि लखनऊ के अलावा अब यह परंपरा दिल्ली, प्रयागराज, बनारस, गोरखपुर, और कानपुर जैसे शहरों में भी फैल चुकी है.  बड़ा मंगल कोई साधारण मंगलवार नहीं है. यह वो दिन है जब पूरा उत्तर भारत हनुमान भक्ति में डूब जाता है. मंदिरों से लेकर गली-मोहल्लों तक एक ही नाम गूंजता है “बजरंगबली की जय!” यह पर्व बताता है कि हमारी परंपराएँ केवल धार्मिक नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली ताकत भी हैं.

यह भी पढ़ें

टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें